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प्रोटेक्टेड एरिया में डालना है अंडरग्राउंड केबल, धनवादा पावर वाले खंभे से ले गए

Dhanwada
  • CSPDCL के अधिकारियों ने की मदद, रायगढ़ के एक अफसर ने की डील, कलेक्टर से राजस्व वन में एनओसी लेकिन काम संरक्षित वन में

रायगढ़। आम आदमी को एक मीटर लगवाने में बिजली विभाग के पांव पकडऩे पड़ते हैं, लेकिन कोई गलत काम करना हो जिसमें रुपए बरस रहे हों तो सीएसपीडीसीएल के अफसर लार टपकाने लगते हैं। धरमजयगढ़ ब्लॉक में धनवादा पावर एंड इंफ्रास्ट्रक्चर प्रालि के हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट के लिए ऐसा ही किया गया। अब पता चला है कि कंपनी ने प्रोटेक्टेड फॉरेस्ट एरिया में काम किया है लेकिन एनओसी राजस्व वन क्षेत्र की ली। कंपनी के मैनेजर ने ऐसी सेटिंग की है कि सारे विभाग एक टेबल पर आकर साइन कर गए। दुर्गम आदिवासी इलाकों के अंदर किस तरह के अपराध हो रहे हैं, इसका विशुद्ध उदाहरण धनवादा पावर का हाइड्रो प्रोजेक्ट है जो मांड नदी में लगाया गया है। कांग्रेस सरकार के शासनकाल में इस प्रोजेक्ट का प्लान बना।

एनओसी लेने के लिए कंपनी ने गलत तथ्यों को सही बताए। अफसरशाही ने कंपनी का खुलकर साथ दिया। कंपनी ने भालूपखना के खनं 347, 365, रैरूमाखुर्द के खनं 29/2, 87/2, 94/2 और चरखापारा के 792/1 में राजस्व वन क्षेत्र में 33 केवी ट्रांसमिशन लाइन बिछाने के लिए तत्कालीन कलेक्टर से एनओसी मांगी। इन तीनों गांवों में कुल 2.510 हे. पर कलेक्टर ने एनओसी दे दी। कलेक्टर ने शर्त रखी कि यदि वन विभाग द्वारा भू-प्रत्यावर्तन की कार्यवाही की जाती है तो उनको कोई आपत्ति नहीं है। मजे की बात यह है कि कंपनी ने बिना वन विभाग से प्रत्यावर्तन की कार्यवाही कराए निर्माण प्रारंभ कर दिया। इधर सीएसपीडीसीएल रायगढ़ के अधिकारियों ने दूसरा खेल खेला।

कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए वन विभाग को पत्र लिखा गया कि इस क्षेत्र में नए विद्युत खंभे लगाने की जरूरत है। जब खंभे लग गए तो धनवादा पावर को सौंप दिया। कंपनी ने अपने 33 केवी लाईन के केबल खींच लिए। विद्युत विभाग ने अपना ही नियम तोड़ दिया। 8 जून 2023 को राजपत्र में प्रकाशित कंडिका का उल्लेख करते हुए सीएसपीडीसीएल रायपुर कार्यालय ने पत्र लिखा जिसमें कहा गया कि प्रोटेक्टेड एरिया में 33 केवी या उससे कम वोल्टेज वाले लाइनों को केबल से अंडरग्राउंड किया जाना है। संरक्षित क्षेत्र में वन विभाग से सलाह लेकर 33 केवी, 11 केवी और एलटी लाइनों को अंडरग्राउंड केबल, एबी केबल या कवर्ड कंडक्टर से बदला जाना है।

हाथी प्रभावित क्षेत्र में भी विद्युत विभाग की आंखें बंद

घरघोड़ा के चुहकीमार नर्सरी में तीन हाथियों की मौत के बाद हाईकोर्ट में मामला पहुंचा था। विद्युत विभाग और वन विभाग को सख्त निर्देश भी मिले थे। इसके बावजूद रायगढ़ कार्यालय के एक बड़े अधिकारी ने धनवादा कंपनी का खुलकर साथ दिया। हाथी प्रभावित क्षेत्र में नियमत: अंडरग्राउंड केबल लगाए जाने थे। लेकिन कंपनी के दबाव में अपने बिजली खंभे उसको उपयोग करने के लिए दिए गए।

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धनवादा कंपनी के लिए तगड़ी लॉबिंग

कांग्रेस शासनकाल में कंपनी ने धरमजयगढ़ के सेंसिटिव फॉरेस्ट एरिया में मांड नदी को चुना। इतने अंदर में प्रोजेक्ट लाने का उद्देश्य था कि चुपचाप काम पूरा कर लिया जाएगा। हैदराबाद की कंपनी मुरली कृष्णा धनवादा, राजेंद्र प्रसाद पाकला और श्रीनिवासुलु एंटीबेड्डी की है। सूत्रों के मुताबिक एक मजबूत राजनीतिक घराने से संबद्ध यह कंपनी तत्कालीन सरकार के संरक्षण में रायगढ़ में घुसी। नियमों को तोड़-मरोडक़र कंपनी ने काम किया।

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