- केंद्र-राज्य सरकार और निजी कंपनी को नोटिस
बिलासपुर। रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ विकासखंड स्थित भालूपखना में संचालित 7.50 मेगावाट लघु जल विद्युत परियोजना से जुड़े कथित वन भूमि उपयोग, 33 केवी ट्रांसमिशन लाइन विस्तार और पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन के मामले में दायर जनहित याचिका पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में सुनवाई जारी है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा एवं जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने मामले में राज्य सरकार, केंद्र सरकार तथा संबंधित निजी कंपनी से जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई 2026 को निर्धारित की गई है।
जनहित याचिका सामाजिक कार्यकर्ता विवेक कुमार पांडेय ने दायर की है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि धरमजयगढ़ विकासखंड के ग्राम भालूपखना स्थित धनबादा पावर की 7.50 मेगावाट लघु जल विद्युत परियोजना के लिए आवश्यक वैधानिक वन स्वीकृतियां प्राप्त किए बिना वन एवं राजस्व भूमि पर गैर-वानिकी गतिविधियां संचालित की गईं। साथ ही परियोजना की 33 केवी ट्रांसमिशन लाइन के विस्तार में भी निर्धारित कानूनी प्रक्रिया और आवश्यक अनुमतियों का पालन नहीं किया गया।
11 केवी पोल पर 33 केवी लाइन ले जाने का आरोप
याचिका के अनुसार, भालूपखना से चरखापारा तक 11 केवी विद्युत लाइन के नवीनीकरण के दौरान सीएसपीडीसीएल द्वारा नए पोल लगाए गए। आरोप है कि इन्हीं पोलों का उपयोग निजी जल विद्युत परियोजना की 33 केवी ट्रांसमिशन लाइन के लिए भी किया गया। याचिकाकर्ता का दावा है कि इससे अलग से वन भूमि डायवर्सन और अन्य वैधानिक अनुमतियों की आवश्यकता से बचने का प्रयास किया गया। याचिका में यह भी कहा गया है कि परियोजना प्रबंधन ने ट्रांसमिशन लाइन एवं अन्य निर्माण कार्यों के लिए वन विभाग और जिला प्रशासन के समक्ष अनुमति हेतु आवेदन प्रस्तुत किया था, लेकिन आवश्यक स्वीकृतियां प्राप्त होने से पहले ही निर्माण कार्य कर लिया गया।
‘फर्जी नवीनीकरण’ और मिलीभगत के आरोप
जनहित याचिका में आरोप लगाया गया है कि विद्युत विभाग के कुछ अधिकारियों और संबंधित ठेकेदार की कथित मिलीभगत से 11 केवी लाइन के नवीनीकरण के नाम पर ऐसा विद्युत ढांचा तैयार किया गया, जिसका लाभ सीधे निजी जल विद्युत परियोजना को मिला। याचिकाकर्ता ने इसे सरकारी संसाधनों के संभावित दुरुपयोग और प्रक्रिया संबंधी पारदर्शिता से जुड़ा गंभीर विषय बताया है। याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि 11 केवी लाइन नवीनीकरण तथा निजी परियोजना की 33 केवी ट्रांसमिशन लाइन – दोनों कार्यों का ठेका एक ही पंजीकृत ठेकेदार कुलदीप सिंह के पास था। आरोप है कि अलग-अलग कार्यों के लिए पृथक संरचना विकसित करने के बजाय एक ही विद्युत ढांचे का उपयोग किया गया, जिससे शासकीय और निजी कार्यों के बीच स्पष्ट विभाजन नहीं रह गया।
हाथी प्रभावित क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर भी चिंता
याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में कहा है कि धरमजयगढ़ वनमंडल प्रदेश के प्रमुख हाथी प्रभावित क्षेत्रों में शामिल है, जहां हाथियों का नियमित आवागमन रहता है। हाथी वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत अनुसूची-1 के संरक्षित वन्यजीव हैं। याचिका में दावा किया गया है कि यदि आवश्यक सुरक्षा मानकों और वैधानिक प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया, तो इससे वन्यजीवों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका हो सकती है।
पहले तकनीकी आधार पर खारिज हुई थी याचिका
रिकॉर्ड के अनुसार, याचिकाकर्ता ने पहले डब्ल्यूपी (पीआईएल) क्रमांक 24/2026 दायर की थी। सुरक्षा राशि जमा करने से छूट का आवेदन स्वीकार नहीं होने पर हाईकोर्ट ने 7 मई 2026 को याचिका निरस्त कर दी थी। हालांकि अदालत ने नियमों के अनुरूप सुरक्षा राशि जमा कर नई जनहित याचिका दायर करने की स्वतंत्रता प्रदान की थी। इसके बाद दायर वर्तमान याचिका पर 19 मई 2026 को प्रारंभिक सुनवाई हुई, जिसमें हाईकोर्ट ने राज्य सरकार, केंद्र सरकार और संबंधित निजी कंपनी को नोटिस जारी किए। 18 जून 2026 की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने जवाब प्रस्तुत करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा, जिसे अदालत ने स्वीकार करते हुए एक सप्ताह की मोहलत दी।
निजी कंपनी की ओर से जवाब दाखिल किए जाने की जानकारी भी न्यायालय के समक्ष दी गई। अदालत ने याचिकाकर्ता को संबंधित जवाबों पर रिजॉइंडर दाखिल करने की अनुमति प्रदान की है। मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई 2026 को होगी।






















