रायगढ़। औद्योगिक जिला रायगढ़ में उद्योगों के काम करने वाला विभाग ही पंगु हो चुका है। मुख्यालय ने यहां स्टाफ में कटौती कर दी है। दिलचस्प बात यह है कि सहायक प्रबंधक के दस पद हैं लेकिन एक की भी पोस्टिंग नहीं है। कुल 38 में से 16 ही स्टाफ के भरोसे विभाग चल रहा है।
जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र में स्टाफ की कमी का असर पूरे जिले पर पड़ रहा है। स्टील और पावर सेक्टर के उद्योगों के लिए भू-अर्जन से लेकर सीएसआर, पुनर्वास सारे काम उद्योग विभाग के जरिए ही होते हैं।
रायगढ़ जिले में डीआईसी कार्यालय में कर्मचारी पर्याप्त नहीं हैं। धीरे-धीरे इनकी संख्या कम होती जा रही है। मुख्य महाप्रबंधक का पद भी खाली है। महाप्रबंधक का एक पद स्वीकृत है जो भरा है। प्रबंधक के पांच पदों पर अधिकारी कार्यरत हैं, लेकिन सहायक प्रबंधक के 10 स्वीकृत पदों में से एक भी पदस्थ नहीं है। कुल 38 पदों का सेटअप स्वीकृत है जिसमें कार्यालयीन स्टाफ भी शामिल है। अधिकारियों के पद तो रिक्त हैं ही, बाबूओं के पोस्ट पर भी पदस्थापना नहीं हो रही है।
इसका असर उद्योगों निरीक्षण और कार्रवाई पर पड़ रहा है। कोई प्रकरण सामने आने पर भी स्थल जांच प्रक्रिया समय पर नहीं हो पाती। सब्सिडी के मामलों में भी दस्तावेजी गड़बडिय़ां होती हैं। गलत दस्तावेजों के आधार पर करोड़ों के अनुदान बांटे गए हैं। नए उद्योगों के लिए भू-अर्जन प्रकरणों में भी देरी होती है। सीएसआर और पुनर्वास को लेकर भी कार्रवाई नहीं की जाती।























