- लाइमस्टोन और रेत को भी ऑनलाइन पोर्टल से जोड़ा, बाकी खनिजों की तरह धर्मकांटा का प्रावधान अभी नहीं
रायगढ़। खनिज विभाग में पीली-गुलाबी मैन्युअल टीपी अब पुरानी बात हो गई है। एक अप्रैल से शुरू हो चुके ऑनलाइन टीपी को लेकर क्रशर संचालक परेशान हैं। अब पहले से ज्यादा अवैध परिवहन शुरू हो गया है। पहले से जारी करवाई गई मैन्युअल टीपी ही चलाई जा रही है। 15 दिनों में एक भी क्रशर संचालक ने ऑनलाइन टीपी नहीं कटवाई है। मुख्य खनिजों की तरह ही गौण खनिजों में भी ई-परमिट और ई-ट्रांजिट पास जारी हो रहे हैं। अब कोई भी खनिज मैन्युअल टीपी से परिवहन नहीं किया जाएगा। खनिजों के उत्पादन और परिवहन को सरल बनाने के लिए ऑनलाइन पोर्टल 2.0 को लाइव किया गया है। अब तक कोयला, आयरन ओर, मैंगनीज, बॉक्साइट आदि के परिवहन में ई-ट्रांजिट पास जारी किया जाता है।
गाड़ी का वजन होने के साथ ही टीपी जेनरेट हो जाती है। एक अप्रैल से गौण खनिजों के लिए भी यही व्यवस्था लागू हो चुकी है। इस संबंध में रायगढ़ जिले की स्थिति देखी गई तो पता चला कि अभी केवल खनिपट्टा धारकों ने ही पोर्टल में पंजीयन करवाया है। भंडारण अनुज्ञा का पंजीयन नहीं हुआ है। एक अप्रैल से अब तक एक भी क्रशर ने ऑनलाइन टीपी नहीं जारी कराई है। सभी मैन्युअल टीपी के भरोसे चल रहे हैं। हालांकि इसमें एक अपडेट यह है कि अभी वे-ब्रिज को अनिवार्य नहीं किया गया है। रायगढ़ का लाइमस्टोन लो ग्रेड का माना जाता है। इसलिए वे-ब्रिज की अनिवार्यता अभी लागू नहीं की गई है।
ओवरलोड चल रहे हैं वाहन
वे-ब्रिज अनिवार्य होने के बाद ऑनलाइन टीपी तभी जेनरेट होगी जब खनिज का वजन किया जाएगा। गाड़ी की क्षमता के हिसाब से ही टीपी काटी जा सकेगी। अभी मैन्युअल टीपी से ही काम किया जा रहा है जिसमें दर्ज मात्रा से अधिक लोड किया जा रहा है। वे-ब्रिज अनिवार्य करने के बाद क्रशर संचालकों का पूरा हिसाब-किताब एक क्लिक पर मौजूद होगा।























