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राजेश शुक्ला बोले- मैंने भीतरघात नहीं, खुलाघात किया है

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रायगढ़। कांग्रेस से निष्कासित होने के बाद पूर्व एल्डरमैन राजेश शुक्ला ने आज कहा कि मुझ पर भीरतरघात करने के जो आरोप लगाए गए हैं, वह सरासर गलत है मैंने भीतरघात नहीं बल्कि वार्ड नंबर 14 की कांग्रेस प्रत्याशी श्रीमती अनुपमा शाखा यादव के खिलाफ खुलाघात किया है। मेरी अनुपमा से कोई रंजिश नहीं है लेकिन शाखा से मुझे काफी व्यक्तिगत शिकायतें हैं। राजेश शुक्ला का कहना है कि पूरे देश में कांग्रेस की नैया डूब चुकी है और छत्तीसगढ़ प्रदेश में डगमग करती हुई कांग्रेस की नाव डूबने के कगार पर पहुंच चुकी है. एक तो वैसे ही कांग्रेस के पास जिला संगठन में पदाधिकारियों, कार्यकारिणी, कार्यकर्ताओं की कमी है.

उसके बावजूद कांग्रेस के द्वारा कट्टर कांग्रेसियों को बगैर कारण बताओं नोटिस जारी किए सीधा निष्कासन किया जाना किसी भी रूप में उचित नहीं है. हालत इतनी गंभीर हो चुकी है कि कोई भी कांग्रेस में प्रवेश नहीं करना चाह रहा है. अभी संपन्न हुए होने जा रहे त्रिस्तरीय चुनाव में कांग्रेस को वार्ड पार्षदों, पंचायत सदस्यों, सरपंच आदि पद में खड़े करने के लिए प्रत्याशियों का टोटा पड़ गया. कई जगह से भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी निर्विरोध चुनाव जीत कर सामने आ गए. जिसका कारण कांग्रेस संगठन में छाई अनियमितता, अनुशासनहीनता, बेलगाम, संचालन है. जब तक पूरे कांग्रेस संगठन में आमूल चूल परिवर्तन और तेज तर्रार, ऊर्जावान, तर्कशील, वाकपटु, प्रखर वक्ता, युवा चेहरे को सामने नहीं लाया जाएगा तब तक कांग्रेस के अच्छे दिन नहीं आने वाले हैं. अपनी पूछ परख नहीं होने से कांग्रेस के कट्टर नेता राजेश शुक्ला (गुल्ली) ने कांग्रेस से अलग होने के लिए वार्ड नंबर 14 की भाजपा प्रत्याशी दीपमाला देवांगन का खुल्लमखुल्ला प्रचार किया गया और लोगों से समर्थन मांगा गया. जो भीतरघात के दायरे या अनुशासनहीनता के दायरे में नहीं आता है.

राजेश शुक्ला की पारिवारिक पृष्ठभूमि कट्टर कांग्रेसी की रही है. राजेश जिला युवक कांग्रेस के महामंत्री एवं अध्यक्ष रह चुके हैं जिनको पूर्व सांसद पुष्पा देवी सिंह ने 6 विभागों का सांसद प्रतिनिधि बनाया था. राजेश यूनिवर्सिटी के क्रिकेट कप्तान रह चुके हैं. इस मुकाम तक पहुंचने वाले रायगढ़ जिला में एकमात्र गुल्ली ही है. शुक्ला परिवार ने शुरू से ही कांग्रेस के लिए कार्य किया जिस वजह से इनके संबंध राष्ट्रीय स्तर के कांग्रेसी नेताओं से रहे हैं. किसी समय शुक्ला परिवार की भोपाल और दिल्ली तक में पहुंच हुआ करती थी. राजेश शुक्ला के पिता स्वर्गीय आनंदी सहाय शुक्ल की पहचान रायगढ़ के चुनिंदा बुद्धिजीवियों में हुआ करती थी, जो प्रदेश स्तर के नामी गिरामी कवि थे.

जिनकी बातों का काट करना किसी के बस में नहीं हुआ करता था. इसी तरह राजेश शुक्ला के जीजा सुरेश उपाध्याय राष्ट्रीय स्तर के कवि के रूप में जाने पहचाने जाते हैं, जिनको अनेक सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है. सुरेश उपाध्याय अपनी कविताओं की प्रस्तुति विदेश में भी कर चुके हैं. भोपाल या दिल्ली से जब भी कांग्रेस का कोई बड़ा नेता, सांसद, मंत्री रायगढ़ आते थे तो वे स्वर्गीय आनंदी सहाय शुक्ला से अवश्य मुलाकात करते थे और कृपा दृष्टि बनाए रखने का आशीर्वाद मांगा करते थे.

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