रायगढ़। लैलूंगा विकासखंड स्थित खम्हार पाकुट जलाशय में मछली पालन आदिवासी परिवारों के लिए आजीविका और आय का मजबूत साधन बन गया है। यहां की आदिवासी मछुआ सहकारी समिति ने 75 क्विंटल मछली का उत्पादन कर 10.50 लाख रुपये की आय अर्जित की है। इस पूरे उत्पादन और बिक्री के बाद समिति को खर्च काटकर 7.50 लाख रुपये का शुद्ध लाभ मिला है।
जिला प्रशासन द्वारा ग्रामीण और आदिवासी परिवारों की आजीविका को सशक्त बनाने के उद्देश्य से स्थानीय संसाधनों का उपयोग बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। इसी पहल के तहत खम्हार पाकुट जलाशय से जुड़े 52 आदिवासी मछुआ सदस्यों को इस कार्य के जरिए सीधा आर्थिक संबल मिला है।
10 साल के पट्टे पर लिया गया 191 हेक्टेयर का जलक्षेत्र
खम्हार पाकुट सिंचाई जलाशय का औसत जलक्षेत्र 191.340 हेक्टेयर है। समिति ने इस जलाशय को 10 साल के पट्टे पर लेकर मछली पालन की गतिविधियां योजनाबद्ध तरीके से शुरू की हैं। जिला प्रशासन के मार्गदर्शन और मत्स्य पालन विभाग के सहयोग से समिति के सदस्य सामूहिक रूप से मछली उत्पादन और बिक्री का कार्य संभाल रहे हैं। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़े हैं और समिति की आय में भी इजाफा हुआ है।
दो लाख बीज डालकर तैयार हुआ 75 क्विंटल उत्पादन
समिति के सदस्यों के अनुसार, जलाशय में मछली का बेहतर उत्पादन हासिल करने के लिए लगभग दो लाख मछली बीज (फिंगरलिंग) का संचयन किया गया था। इस योजनाबद्ध प्रयास के परिणामस्वरूप समिति को 75 क्विंटल मछली का उत्पादन मिला, जिसे बाजार में बेचकर 10.50 लाख रुपये की कुल आय हुई और समिति ने 7.50 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा कमाया।
प्रशिक्षण और उपकरणों से आसान हुआ काम
विभागीय अधिकारियों ने जानकारी दी कि मत्स्य पालन प्रसार योजना के तहत समिति के सदस्यों को मछली पालन की आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण दिया गया है। इसके अलावा सदस्यों को मछली पकड़ने के लिए जाल और मछलियों को खराब होने से बचाने के लिए आइस बॉक्स भी उपलब्ध कराए गए हैं। इन संसाधनों की मदद से मत्स्याखेट, रखरखाव और विपणन का काम सुगम हुआ है, जिससे समिति के सभी 52 सदस्य आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहे हैं।























