रायगढ़, 9 फरवरी। भाजपा और कांग्रेस में नगर निगम की सत्ता हासिल करने के लिए कांटे की टक्कर है। मतदाता शांत है, केवल प्रत्याशी मुखर है। इस बार दोनों पार्टियों के बीच एक अजीब सी रणनीति दिखी है। भाजपा ने इस बार सात प्रत्याशियों के वार्ड बदले हैं। जबकि आरक्षण बदलने पर कांग्रेस ने प्रत्याशी ही बदल दिया। नगर निगम रायगढ़ का चुनाव इस बार भाजपा के लिए नाक का सवाल बन गया है। जबकि कांग्रेस को मौन मतदाता का सहारा है। कांग्रेस का मानना है कि भाजपा कुछ भी दावा करे लेकिन वोटर अंतिम समय में ही अपना निर्णय लेगा। दोनों पार्टियों ने कुछ अलग रणनीति बनाई है। भाजपा ने इस बार कुछ प्रत्याशियों को पिछली बार से अलग दूसरे वार्ड से उतारा है।
कई प्रत्याशी आरक्षण की वजह से अपने वार्ड में नहीं लड़ सके तो कुछ ने दूसरे वार्ड से लडऩे की इच्छा दिखाई। पिछले 2019 के चुनाव में जिस वार्ड से प्रत्याशी लड़े थे, उनको वही वार्ड नहीं मिल पाया। ऐसे में भाजपा ने उनको दूसरे वार्ड से उतारा। जबकि कांग्रेस ने नए चेहरे उतारे हैं। भाजपा में सात ऐसे प्रत्याशी हैं, जिन्होंने पिछले चुनाव से इस बार वार्ड बदल दिया। इसमें आशीष ताम्रकार और सरिता राजेंद्र ठाकुर के वार्ड हैं। दोनों ने आरक्षण बदलने पर आपस में ही वार्ड एक्सचेंज कर लिए। अशोक यादव ने पिछले चुनाव में वार्ड 2 से निर्दलीय लडक़र भाजपा-कांग्रेस को हराया था। इस बार उनको वार्ड 16 से उतारा गया है। ऐसे ही कौशलेष मिश्रा हमेशा से वार्ड 22 से ही लड़ते रहे लेकिन इस बार उन्होंने वार्ड 28 का रुख किया।

























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