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जहां बनना है ओवरब्रिज, वहां हो रहे अवैध निर्माण

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  • गौशाला मार्ग हमाल पारा खरसिया में सडक़ के बीच से 40 फीट की सीमा में अनेक पक्के अवैध निर्माण

रायगढ़। अवैध निर्माण की वजह से हर शहर का हुलिया बिगड़ रहा है। यह ऐसी समस्या है जो आगे जाकर ज्यादा तकलीफ देगी। न केवल रायगढ़ शहर बल्कि जिले के दूसरे शहरी क्षेत्रों में भी यही हाल है। खरसिया में गौशाला मार्ग हमाल पारा में स्थिति नियंत्रण से बाहर हो चुकी है।आने वाले समय में रायगढ़ शहर के साथ खरसिया का भी फैलाव होना है। रायगढ़ बिलासपुर रूट में महत्वपूर्ण लिंक बन रहा खरसिया कोरबा और बलौदाबाजार से जुडऩे का केंद्र बनेगा। इस लिहाज से शहर के अंदर की सरकारी जमीनों और सडक़ मद की जमीनों को सुरक्षित रखने की भी जरूरत है। खरसिया में गौशाला मार्ग, हमालपारा रोड चर्चा में है।  यह सड़क शहर को एसडीएम ऑफिस, तहसील कार्यालय, सिविल न्यायालय, पुलिस थाना, वन विभाग, बिजली ऑफिस एवं अन्य शासकीय कार्यालयों के अलावा गौशाला से भी जोड़ती है।

इस सड़क पर ट्रैफिक का दबाव बहुत अधिक होता है। इसी सडक़ पर रेलवे ओवर ब्रिज बनना प्रस्तावित है। भविष्य में सडक़ चौड़ीकरण भी होगा। ऐसी महत्वपूर्ण सडक़ की निर्धारित सीमा में अतिक्रमण कर पक्के अवैध निर्माण किए जा रहे हैं। अतिक्रमण की वजह से रोड संकरी हो चुकी है और हादसों की भी संभावना है। वार्ड नंबर एक में बिना डायवर्सन कृषि भूमि पर, टाउन एवं कंट्री विभाग से नक्शा पास करवाए बिना एवं बिना नगर पालिका से बिना अनुज्ञा के निर्माण किए जा रहे हैं। नाली, छज्जा, सीढ़ी, पार्किंग के लिए जगह नहीं छोड़ा गया है। इस रोड के दोनों ओर अनेक अनुपयोगी वाहन लंबे समय से खड़े हैं। रात में इन वाहनों से टकराकर दुर्घटना की संभावना बनी रहती है। इस क्षेत्र में 5 डिसमिल से कम क्षेत्रफल की भूमि भी खरीद बिक्री धड़ल्ले से हो रही है।

भ्रष्टाचार से घिरी नगर पालिका

खरसिया नगर पालिका परिषद का काम शहर का सुनियोजित विकास करते हुए सड़कों पर अतिक्रमण हटाना है। नपा खरसिया का नाम भ्रष्टाचार के मामलों में कई बार उछला है। अब भी शहर में अतिक्रमण रोकने कोई इच्छाशक्ति नपा ने नहीं दिखाई है। ठेकों में कमीशनखोरी तो खरसिया नपा की पुरानी बीमारी है। राजस्व अधिकारी, पटवारी के संज्ञान में अतिक्रमण और अवैध निर्माण की जानकारी होने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। इसी रोड पर रेलवे ओवर ब्रिज बनना है। कुछ भूमि स्वामियों को मुआवजा भुगतान भी हो चुका है, लेकिन दोबारा से अतिक्रमण किया जा रहा है।

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Editorial

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