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बर्रा कोल ब्लॉक के विरोध में ग्रामीणों ने खरसिया तहसील के सामने किया सड़क जाम

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रायगढ़। खरसिया ब्लॉक में वेदांता कंपनी को आवंटित बर्रा कोल ब्लॉक का विरोध अब सडक़ पर पहुंच गया है। शुक्रवार को सैकड़ों ग्रामीणों ने तहसील कार्यालय के सामने सड़क जाम कर दिया। ग्रामीणों की मांग है कि वेदांता कंपनी के सर्वे को रुकवाया जाए। आदिवासियों ने जमीनें नहीं देने का ऐलान किया है। कोयला मंत्रालय ने बर्रा कोल ब्लॉक की नीलामी की थी जिसमें वेदांता कंपनी ने इसे हासिल किया था। बर्रा कोल ब्लॉक करीब 3144 हे. भूमि पर फैला हुआ है। वेदांता कंपनी का कोरबा और झारसुगुड़ा में प्लांट है, इसलिए बर्रा कोल ब्लॉक के लिए बोली लगाई गई। इस खदान में बगझर, बर्रा, जोबी, करूवाडीह, कुरू, मिनगांव, नगोई, पुछियापाली, काफरमार और रामपुर समेत 12 गांवों की जमीनें जाएंगी। बताया जा रहा है कि करीब 3144 हे. भूमि इस कोल ब्लॉक के लिए अधिग्रहित की जाएगी।

करीब 31 वर्ग किमी क्षेत्रफल में फैलने वाले इस कोल ब्लॉक में वन भूमि करीब 5 वर्ग किमी है। इतने जंगलों का विनाश करके खरसिया शहर ये 16 किमी दूर कोयला खदान शुरू होगी। कोयले का केप्टिव के साथ कमर्शियल यूज भी किया जाएगा। लेकिन बरगढ़ खोला अंचल के आदिवासियों ने इसका विरोध किया है। शुक्रवार को सैकड़ों ग्रामीणों ने तहसील कार्यालय का घेराव कर दिया। कंपनी के सर्वे से आदिवासी नाराज हैं। उनका कहना है कि वे बरगढ़ खोला अंचल में आदिवासियों का अस्तित्व, इतिहास सब कुछ मिट जाएगा। 12 गांव नक्शे से मिट जाएंगे। तहसील के सामने सडक़ पर ही ग्रामीण बैठ गए जिससे रोड जाम हो गया। काफी देर तक विरोध प्रदर्शन होता रहा। ग्रामीणों को आश्वासन देने के बाद ही वे हटे।

पांचवीं अनुसूची के तहत अधिसूचित क्षेत्र
बर्रा कोल ब्लॉक का आवंटन होने के बाद ही विरोध प्रारंभ हो गया था। आदिवासियों ने किसी भी कीमत पर कोल ब्लॉक के लिए जमीनें नहीं देने का निर्णय लिया है। खरसिया तहसील को पांचवी अनुसूची के तहत रखा गया है क्योंकि यहां आदिवासियों की बहुतायत है, लेकिन इनकी पहचान को खत्म करने के लिए कोल ब्लॉक आवंटित किया गया है। तमनार में गांवों की हालत देखकर लोग अब कोल ब्लॉक का विरोध कर रहे हैं।

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बोरहोल सर्वे कर रही है कंपनी
वेदांता कंपनी को बर्रा कोल ब्लॉक के एक्सप्लोरेशन में संतोषजनक परिणाम नहीं मिला है। कंपनी अब ड्रिलिंग के जरिए जमीन में ओबी की गहराई, कोल सीम की मोटाई, क्वालिटी आदि का विस्तृत सर्वे करवा रही है। कोयले की उपलब्धता और डेंसिटी में अंतर आ रहा है। एमईसीएल ने केवल 16 बोरहोल ड्रिलिंग की थी, जिनकी गहराई कुल 6458 मीटर थी। कोल ब्लॉक में प्रति वर्ग किमी औसतन एक बोरहोल भी नहीं किया गया। ड्रिलिंग डाटा में बहुत ज्यादा अंतर है।

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