- बर्रा कोल ब्लॉक का सर्वे कर रही वेदांता लिमिटेड, खरसिया में 31 वर्ग किमी में फैली है माइंस
रायगढ़, 09 अगस्त। दर्जन भर गांवों को उजाड़ने तैयार बैठी वेदांता कंपनी ने मनमानी अभी से शुरू कर दी है। बिना अनुमति के किसानों के खेतों में बोरहोल किया जा रहा है। कोयले की उपलब्धता जांचने के लिए कंपनी पूरे क्षेत्र में बोरहोल करवा रही है। कोयला मंत्रालय ने खरसिया में बर्रा कोल ब्लॉक का आवंटन वेदांता एल्युमिनियम को किया है। पहले इसका सर्वे मिनरल एक्सप्लोरेशन एंड कंसल्टेंसी लिमिटेड (एमईसीएल) ने किया था। एमईसीएल ने केवल 16 बोरहोल ड्रिलिंग की थी जिसकी गहराई कुल 6458 मीटर थी।
24 वर्ग किमी में फैले इस कोल ब्लॉक में प्रति वर्ग किमी औसतन एक बोरहोल भी नहीं किया गया। जबकि सैकड़ों बोरहोल करने के बाद ही कोयले की सही जानकारी मिलेगी। इसके लिए वेदांता ने बोरहोल करना प्रारंभ किया है। बताया जा रहा है कि कंपनी बिना अनुमति के किसानों की जमीन पर ड्रिलिंग कर रही है। भूप्रवेश की विधिवत अनुमति ही नहीं ली गई है। मनमाने तरीके से ड्रिल करके कोयले का पता लगाया जा रहा है। इतने बड़े क्षेत्रफल में कोयला कितनी गहराई में है, इसका पता ड्रिल करके ही लगाया जा सकता है।
कंपनी को जमीनों में काम करने के लिए भूप्रवेश की अनुमति लेनी होती है। कोल ब्लॉक पूरी तरह एक्सप्लोर्ड तभी माना जाता है जब बोरहोल या ड्रिलिंग की दूरी 200 मीटर तक आ जाए। बहुत तेजी से कंपनी ड्रिलिंग कर रही है। करीब 3144 हे. क्षेत्रफल में कोल ब्लॉक फैला हुआ है। करीब 12 गांव विस्थापित होंगे। कई गांवों में जमीन नहीं देने के लिए संकल्प पारित हो चुका है।
बहुत गहराई में है कोयला
इस कोल ब्लॉक में कोयले की उपलब्धता कहीं कम गहराई में है तो कहीं बहुत नीचे। इसलिए यह भी कहा जा रहा है कि कंपनी अंडरग्राउंड माइनिंग करेगी। ओपन कास्ट करने के लिए खर्च ज्यादा होगा। हालांकि भूमिगत खदान में भी माइनिंग कॉस्ट ज्यादा होती है। कंपनी का विरोध अभी से होने लगा है। उस पर से बिना अनुमति के बोरहोल किया जा रहा है।























