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खरसिया के गुरदा हत्याकांड का सनसनीखेज खुलासा: महज एक ‘आम’ के लिए 16 साल के किशोर की हत्या!

Crime 2

रायगढ़। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले की खरसिया पुलिस ने एक 16 वर्षीय किशोर की अंधी हत्या की गुत्थी को सफलतापूर्वक सुलझा लिया है। ग्राम गुरदा के खेत में मिले किशोर के शव के मामले में पुलिस ने दो युवकों और एक विधि से संघर्षरत (अपचारी) बालक को गिरफ्तार किया है। पुलिस की जांच में यह चौंकाने वाला सच सामने आया है कि यह खौफनाक वारदात शराब पार्टी के दौरान चखने के लिए आम तोड़ने जैसी मामूली बात पर हुए विवाद का नतीजा थी। पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है।

बरगद के पेड़ के नीचे संदिग्ध हालत में मिला था शव

खरसिया पुलिस को 25 मई 2026 को यह सूचना मिली थी कि ग्राम गुरदा के डोंगरमुड़ा खार स्थित एक बरगद के पेड़ के नीचे एक किशोर का शव संदिग्ध अवस्था में पड़ा हुआ है। घटना की जानकारी मिलते ही एसडीओपी खरसिया प्रभात पटेल और थाना प्रभारी निरीक्षक सीताराम ध्रुव के साथ एफएसएल टीम व डॉग स्क्वॉड मौके पर पहुंची। प्रारंभिक जांच में शव के सीने, आंख और शरीर के अन्य हिस्सों पर खरोंच व गंभीर चोट के निशान पाए गए। मृतक की शिनाख्त ग्राम बरभौना (थाना छाल) निवासी 16 वर्षीय किशोर के रूप में हुई। मामले की गंभीरता को भांपते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) शशि मोहन सिंह ने तत्काल जांच के कड़े निर्देश दिए। इसके बाद शव का पोस्टमार्टम कराया गया, जिसकी शॉर्ट रिपोर्ट में मौत की प्रकृति हत्यात्मक (होमीसाइडल) पाई गई। तदोपरांत पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ अपराध क्रमांक 250/2026 और बीएनएस की धारा 103(1) के तहत हत्या का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी।

एक फोन कॉल और पल्सर बाइक से खुला राज

पुलिस की विवेचना के दौरान मृतक के बड़े भाई ने बताया कि 24 मई की सुबह गांव का ही रहने वाला ऋषि डनसेना उसके छोटे भाई को अपनी पल्सर मोटरसाइकिल पर बैठाकर काम कराने ले गया था। जब रात तक किशोर घर नहीं लौटा, तो परिजनों ने उसकी तलाश की और अगले दिन उसका शव बरामद हुआ। शक के आधार पर पुलिस ने ऋषि डनसेना को तलब किया। पूछताछ में ऋषि ने बताया कि वह मृतक को अपने साथियों चन्द्रशेखर उर्फ चंदा, रघुनाथ उर्फ रघु सिंह और एक नाबालिग के पास छोड़कर काम पर चला गया था। मामले में सबसे बड़ा सुराग तब मिला जब ऋषि ने बताया कि कुछ देर बाद जब उसने चन्द्रशेखर को फोन किया था, तो पीछे से झगड़े, मारपीट और चिल्लाने की आवाजें आ रही थीं। उसने फोन पर ही उन्हें झगड़ा बंद करने को कहा था। इसी बयान ने पुलिस की जांच को सही दिशा दी और पुलिस आरोपियों तक पहुंच गई।

चखने के लिए आम तोड़ने पर शुरू हुई थी खूनी झड़प

संदेह के आधार पर पुलिस ने चन्द्रशेखर उर्फ चंदा डनसेना, रघुसिंह उर्फ रघुनाथ राठिया और उनके साथ मौजूद एक विधि से संघर्षरत बालक को हिरासत में लिया। जब पुलिस ने तीनों से अलग-अलग कड़ाई से पूछताछ की, तो वे टूट गए। आरोपियों ने अपना जुर्म कबूल करते हुए बताया कि घटना वाले दिन डोंगरमुड़ा खार खेत में चारों एक साथ बैठकर शराब पी रहे थे। शराब पीने के दौरान चखना कम पड़ गया और आम तोड़ने की बात को लेकर मृतक किशोर और चन्द्रशेखर के बीच कहासुनी शुरू हो गई। यह मामूली बहस देखते ही देखते हाथापाई में बदल गई। गुस्से में आकर तीनों आरोपियों ने मिलकर किशोर पर घूंसे और लातों से जानलेवा हमला कर दिया। बेरहमी से हुई इस मारपीट के दौरान किशोर खेत की मेड़ से फिसलकर तालाब की तरफ गिर पड़ा और गंभीर चोटों के कारण उसकी मौत हो गई।

हादसा दिखाने के लिए रची साजिश, भेजे गए जेल

हत्या के बाद घबराए आरोपियों ने जुर्म छुपाने की एक भद्दी साजिश रची। उन्होंने साक्ष्य मिटाने के इरादे से मृतक के शव को उठाया और बरगद के पेड़ के नीचे चित अवस्था में लिटा दिया ताकि यह किसी दुर्घटना जैसा लगे। यहां तक कि जब ऋषि डनसेना ने बाद में मृतक के बारे में पूछा, तो उन्होंने झूठ बोल दिया कि वह खाना-पीना करके अपने घर लौट चुका है। पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर घटनास्थल ले जाकर घटना का रिकंस्ट्रक्शन कराया और उनके मेमोरेंडम कथन के आधार पर वारदात के वक्त पहने गए कपड़े भी जब्त कर लिए। अपराध छिपाने और साक्ष्य मिटाने के आरोप में पुलिस ने प्रकरण में बीएनएस की धारा 238 और 3(5) की बढ़ोतरी की है। न्यायालय में पेश करने के बाद तीनों को न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है। गिरफ्तार बालिग आरोपियों में 22 वर्षीय चन्द्रशेखर उर्फ चंदा डनसेना (पिता सेतराम डनसेना, निवासी ग्राम बरभौना) और 30 वर्षीय रघुसिंह उर्फ रघुनाथ राठिया (पिता नरसिंग राठिया, निवासी बेहरामुड़ा) शामिल हैं।

एसएसपी का सख्त संदेश

इस सफलता के बाद एसएसपी शशि मोहन सिंह ने जिले के अपराधियों को कड़ा संदेश देते हुए कहा है कि अपराधियों के खिलाफ रायगढ़ पुलिस की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति है। हत्या और कानून-व्यवस्था बिगाड़ने वाले तत्वों के खिलाफ ऐसी ही ताबड़तोड़ कार्रवाई जारी रहेगी। अपराध करके कानून से बचना मुश्किल है और साक्ष्य छिपाने की कोशिश करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।

इस अंधे कत्ल की गुत्थी को महज कुछ समय में सुलझाने में पुलिस की संयुक्त टीम का बड़ा हाथ रहा। एसएसपी शशि मोहन सिंह, एडिशनल एसपी अनिल सोनी और एसडीओपी प्रभात पटेल के मार्गदर्शन में थाना प्रभारी खरसिया सीताराम ध्रुव, भूपदेवपुर थाना प्रभारी उप निरीक्षक संजय नाग, प्रधान आरक्षक खीरेन्द्र जलतारे, रामनाथ बनर्जी, आरक्षक विशोप सिंह, प्रदीप तिवारी, अमित नट, सत्य नारायण सिदार और रमेश निषाद ने अहम भूमिका निभाई।

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विकास पाण्डेय

एडिटर - वेब एवं डिजिटल

विकास पाण्डेय अक्टूबर 2021 से 'केलो प्रवाह' के साथ जुड़े हैं और डिजिटल विंग के संचालन एवं संपादन की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। रायगढ़ और छत्तीसगढ़ के प्रमुख घटनाक्रम, जनहित के मुद्दों और स्थानीय सरोकारों पर रिपोर्टिंग करते हैं। उन्होंने RIG24 मीडिया नेटवर्क से पत्रकारिता की शुरुआत की और इसी दौरान BJMC की डिग्री हासिल की।

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