- राज्यसभा सांसद निधि से करीब एक करोड़ के काम थे स्वीकृत, 94 लाख की होनी है रिकवरी, बिना काम किए सीधे भुगतान
रायगढ़। राज्यसभा सांसद मद से मिले एक करोड़ रुपए को ठगकर हड़पने वाले ठेकेदार पर अब प्रशासन ने शिकंजा कस दिया है। बताया जा रहा है कि प्रशासन ने करीब 94 लाख रुपए शासन के खाते में जमा करने का आदेश दिया है। अन्यथा आरआरसी जारी करने और एफआईआर दर्ज करने की कार्रवाई होगी। मनरेगा में तीन करोड़ का घपला करने वाले ने 12 साल बाद अपनी कहानी फिर से लिखी है। इस बार सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास मद से मिले एक करोड़ के कामों में हेराफेरी की गई। बिना काम किए ही जनपद पंचायत को बायपास करके रकम का आहरण कर लिया गया। कांग्रेस के राज्यसभा सांसद केटीएस तुलसी ने 2020 से अप्रैल 2026 तक कार्यकाल के दौरान रायगढ़ जिले में भी काम अनुशंसित किए।
रायगढ़ जिले में कोसीर सारंगढ़ के फर्म महावीर ट्रेडर्स कोसीर संचालक नंदराम लहरे ने एकताल, धनुआरडेरा और मिड़मिड़ा में सीसी रोड और सोलर स्ट्रीट लाइट के 11 कामों की मंजूरी ली। कुल 99 लाख के कामों के लिए भुगतान हो चुका है। जिला योजना सांख्यिकी से करीब 90 प्रश राशि आहरित की जा चुकी है। वर्ष 23-24 में ये कार्य स्वीकृत किए गए थे। नियमों के तहत सांख्यिकी विभाग से काम की स्वीकृति की फाइल निर्माण एजेंसी जनपद पंचायत पुसौर को भेजी जानी थी। वहां से वर्क ऑर्डर, प्लान आदि फाइनल होने के बाद काम शुरू किया जाना था, लेकिन ठेकेदार ने ऐसी सेटिंग की कि सीधे रकम ही आहरित कर ली। काम नहीं हुआ तो इसकी शिकायत हुई। जांच के बाद कलेक्टर ने ठेकेदार के विरुद्ध कार्रवाई करने का आदेश दिया है। इसके लिए फाइल बढ़ाई गई है।
पकड़ा गया तो भेजा परिजनों को
कलेक्टर ने इस मामले में जांच के आदेश दिए थे। गड़बड़ी प्रमाणित होने के बाद ठेकेदार नंदराम लहरे को नोटिस दिया था। ठेकेदार ने यहां भी चाल चली। उसने अपने परिजनों को भेज दिया था। अब जानकारी मिली है कि 2021 में पडिग़ांव में भी उसने ऐसा ही किया था।
एक महीने की ली थी मोहलत
घपला सामने आया तो जिला योजना सांख्यिकी विभाग ने पुसौर जनपद से रिपोर्ट लेकर वेंडर को नोटिस दिया। तब नंदराम लहरे ने 15 दिन के अंदर काम शुरू कर एक महीने में पूरा करने का आश्वासन दिया। लेकिन दो महीने गुजरने के बाद भी काम पूरे तो क्या शुरू भी नहीं हुए। पुसौर जनपद को भी सूचना नहीं दी गई। अब कलेक्टर ने पुसौर सीईओ व सरपंच, सचिव को आदेश दिया है कि पोर्टल से कार्यों को निरस्त कर राशि शासन के खाते में जमा करवाएं। राशि जमा नहीं करने पर वेंडर के विधित व दंडात्मक कार्यवाही करें।












