- उत्पादन को बढ़ाने के बजाय कम करने पर आमादा दोनों कंपनियां
रायगढ़, 2 सितंबर (केलो प्रवाह)। प्रदेश में कोरबा, दंतेवाड़ा और रायगढ़ ऐसे तीन जिले हैं जहां खनिजों से सबसे ज्यादा राजस्व मिलता है। वर्ष 25-26 में रायगढ़ से प्राप्त राजस्व में कमी हो गई जिसकी वजह से टारगेट से पिछड़ गए। इस बार सरकार ने टारगेट को बढ़ा दिया है लेकिन अंबुजा सीमेंट्स और हिंडाल्को की वजह से फिर से पिछडऩा तय है। रायगढ़ जिले में दो केप्टिव माइंस चला रही कंपनियों हिंडाल्को इंडस्ट्रीज और अंबुजा सीमेंट्स फुल प्रोडक्शन नहीं कर पा रही हैं। केप्टिव यूज के लिए मिली खदान से भरपूर उत्पादन करने के बजाय कोयला खरीदकर प्लांट चलाए जा रहे हैं।
कोयला मंत्रालय ने देश में कोयला की जरूरत को पूरा करने के लिए सार्वजनिक और निजी क्षेत्र को अलग-अलग कोयला खदानें आवंटित की हैं। इन खदानों से कोयला उत्पादन करने की मात्रा भी तय है। कंपनियों को केप्टिव यूज के लिए कोल माइंस दिए गए। लेकिन अब वही कंपनियां कम उत्पादन कर रही हैं। हिंडाल्को इंडस्ट्रीज और अंबुजा सीमेंट्स ने बीते साल केवल एक चौथाई ही कोयला उत्पादन किया। हिंडाल्को इंडस्ट्रीज ने गारे पेलमा 4/4 को 3001 रुपए प्रति टन और गापे 4/5 को 3502 रुपए प्रति टन की सर्वाधिक बोली लगाकर प्राप्त किया था। इसमें से गापे 4/5 कोल माइंस को कोयला महंगा पडऩे का कारण बताकर सरेंडर किया जा चुका है।
अंबुजा सीमेंट्स ने गारे पेलमा 4/8 कोल ब्लॉक को 2291 रुपए प्रति टन की बोली लगाकर प्राप्त किया था। इसके बाद साल दर साल प्रीमियम बढ़ता रहा और कोयले की उत्पादन लागत भी बढ़ती रही। हिंडाल्को इंडस्ट्रीज को गारे पेलमा 4/4 कोल माइंस से सालाना 10 लाख टन कोयला उत्पादन की पर्यावरणीय स्वीकृति मिली है। लेकिन हिंडाल्को ने वर्ष 25-26 में मात्र 2.3 लाख टन ही उत्पादन किया। इस बार भी हिंडाल्को ने 3 लाख टन कोयला निकालने की ही जानकारी दी है जबकि 8.4 लाख टन निकाला जाना है।
इसी तरह इसी तरह अंबुजा सीमेंट्स को गापे 4/8 माइंस से 12 लाख टन कोयला सालाना उत्पादन करना है। जबकि कंपनी ने इस वर्ष मात्र 3.6 लाख टन ही कोयला निकाला। वर्ष 26-27 के प्लान में अंबुजा सीमेंट्स ने 6 लाख टन निकालने का प्लान बनाया है। वर्ष 26-27 में रायगढ़ जिले से करीब 2772 करोड़ का टारगेट है जबकि 25-26 में करीब 2170 करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त किया गया था।
उत्पादन कम करने पर होगी कार्रवाई
कोल कंट्रोलर ऑर्गनाइजेशन की समीक्षा में दोनों खदानों से कम उत्पादन पर सवाल होंगे। इस वजह से रायगढ़ जिले को मिलने वाला राजस्व घट गया है। किसी भी हाल में कोयला उत्पादन में कमी नहीं की जा सकती। जितना टारगेट है, उतना उत्पादन करना होगा। दोनों कंपनियों ने बेहद ऊंची दरों पर कोल ब्लॉक हासिल किए थे। साल दर साल प्रीमियम बढऩे के कारण उनका कोयला महंगा हो चुका है। जबकि एसईसीएल इससे कहीं कम कीमत पर कोयला दे रहा है। इसलिए दोनों कंपनियां खुद उत्पादन करने के बजाय खरीदकर काम चला रही हैं। अब दोनों कंपनियों को शॉर्ट प्रोडक्शन के कारण कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।






















