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रायगढ़ जिले में गौधाम योजना की धीमी रफ्तार, सड़कों पर आवारा मवेशियों का जमावड़ा बरकरार

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रायगढ़ (केलो प्रवाह)। सडक़ पर घुमने वाले आवारा मवेशियों को रखने के लिए शासन ने गौधाम योजना लागू की है। इसके तहत रायगढ़ जिले में भी 15 गौधाम का निर्माण होना था, लेकिन विडंबना यह है कि अब तक केवल तीन ही शुरू हो पाये हैं वो भी ग्रामीण क्षेत्र में। ऐसे में शहरी के प्रमुख मार्गों के साथ ही राष्ट्रीय राजमार्ग पर भी मवेशियों का जमावड़ा बना रहता है, जिससे आये दिन दुर्घटनाएं भी हो रही है। यही वजह है कि योजना के क्रियान्यवन की धीमी गति को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

सडक़ों पर घुमने वाले आवारा पशुओं को रखने के लिए पूर्ववर्ती सरकार द्वारा निर्मित गोठानों को गोधाम योजना के अंतर्गत नये नये सिरे से विकसित करने की राज्य शासन ने योजना लागू की है। इस योजना के तहत रायगढ़ जिले में भी 15 गौधाम स्वीकृत किये गये हैं तथा इसके लिए राशि का भी प्रावधान रखा गया है। वहीं गौधामों का सचंालन गौ सेवा समितियों के माध्यम से करने के लिए प्रस्ताव मंगाया गया था। रायगढ़ जिले से 25 गौठानों को गौधामों योजना के तहत विकसित करने का प्रस्ताव भेजा गया था जिसमें से शासन द्वारा 15 गौधाम निर्माण की स्वीकृति प्रदान कर दी गई है। वहीं गौधामों में पशु चिकित्सा विभाग को सभी गौधामों में चारा पानी व वैक्सीनेशन की व्यवस्था करनी है।

शसन से जिले में 15 गौधामों की स्वीकृति मिली है, लेकिन अब तक केवल तीन गौधाम ही शुरू हो पाये हैं। जो गौधाम शुरू हुए हैं वे भी ग्रामीण क्षेत्र में है जिससे शहरी क्षेत्र में आवारा पशुओं के सडक़ों पर रहने की समस्या से निजात नहीं मिल पाई है। यही वजह है कि शहर के प्रमुख मार्गों के साथ साथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर भी मवेशियों का जमावड़ा बना रहता है जिससे आये दिन दुर्घटनाएं हो रही है। सडक़ पर हो रहे हादसों में कभी मवेशियों की मौत होने तो कभी वाहन चालक के मवेशियों से टकरा कर असमय कालकलवित  होने मामले लगातार सामने आ रहे हैं, लेकिन न तो पशु चिकित्सा विभाग को इसकी फिक्र है और न ही नगर निगम इस ओर ध्यान दे रहा है।

क्या कहते हैं अधिकारी
गौधाम संचालन के लिए समितियों ने आवेदन तो किया है, लेकिन अब तक अमानत राशि जमा नहीं की गई है। इस वजह से गौधाम शुरू नहीं हो पाये हैं। वहीं शहर के दो गौधाम जल्द ही चारा पानी की व्यवस्था के साथ शुरू हो जायेंगे जिसके बाद मवेशियों को उनमें रखा जायेगा।
– डॉ. एस. के. सिंह, असिस्टेंट सर्जन पशु चिकित्सा विभाग

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