895 हेक्टेयर कमाण्ड एरिया वाला डैम हुआ अतिक्रमण का शिकार, 40% हिस्से पर फ्लाईएश डालकर माफिया ने बेची जमीन, देखकर भी प्रशासन बना तमाशबीन
रायगढ़। किरोड़ीमल नगर के कोकड़ीतराई जलाशय की जमीन पर धड़ल्ले से अतिक्रमण हो रहा है। खास बात यह है कि भू-माफिया उद्योगों से निकलने वाले फ्लाईएश का उपयोग खुलेआम पाटने में कर रहे हैं। अब तक हजारों टन फ्लाईएश जलाशय में डाल कर जमीन पर कब्जा कर लिया गया है। वहीं स्टाम्प पेपर में लिखा पढ़ी कर कौडिय़ों के दाम जमीन बेचने का सिलसिला बदस्तूर जारी है। बताया जा रहा है कि यहां अब तक लगभग दो से तीन सौ मकान बन चुके हैं। जलाशय का तकरीबन 40 प्रतिशत हिस्सा समतल हो चुका है। आश्चर्य की बात यह है कि राजस्व विभाग के अधिकारियों को इसकी जानकारी होने के बावजूद कार्रवाई नहीं की जा रही है, जिसका फायदा अतिक्रमणकारी उठा रहे हैं।
किरोड़ीमल नगर से लगे 895 हेक्टेयर कमाण्ड एरिया वाले कोकड़ीतराई जलाशय से पूर्व में आस-पास के गांवों में सिचाई की योजना बनाई गई थी, परंतु योजना केवल कागजों पर ही रह गई। वहीं, जलाशय में जल स्तर कम होने का फायदा भू-माफिया उठाने लगे। जिंदल उद्योग के कारण किरोड़ीमलनगर की आबादी भी बढऩे लगी है और इसका फायदा उठाते हुए भू-माफिया पूर्व में जलाशय की सूखी जमीन पर फ्लाईएश पाट कर समतलीकरण करते हुए अवैध रूप से कब्जा जमा लिया। वहीं स्टांप पेपर पर लिखा पढ़ी कर बाहर से काम करने आये लोगों को कौडिय़ों के दाम पर जमीन बेच दी। शुरूआत में झोपड़ीनुमा घर बनाये गये थे जो अब पक्के मकान में तब्दील हो गये हैं। भू-माफियाओं का लालच इतने में नहीं रूका और अब जलाशय में फ्लाईएश डालकर समतलीकरण करने का कार्य किया जा रहा है।
अब तक हजारों टन फ्लाईएश जलाशय में उड़ेल दिया गया है। स्थानीय लोगों के मुताबिक जलाशय का तकरीबन 40 प्रतिशत हिस्सा अब तक अतिक्रमण की चपेट में आ चुका है। स्थानिय लोगों का कहना है कि जलाशय की वजह से पूर्व में किरोड़ीमल नगर का भूजल स्तर भी काफी उपर था परंतु जलाशय को पाटने की वजह से अब भूजल स्तर काफी नीचे चला गया है। वहीं यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो कुछ ही माह में कोकड़ीतराई जलाशय का अस्तित्व ही समाप्त हो जायेगा जिससे जल संकट क्षेत्र में गहरा सकता है। कोकड़ीतराई जलाशय को पाट कर समतलीकरण करने के लिए लगातार फ्लाईएश का उपयोग किया जा रहा है। वहीं फ्लाईएश खुले मेें डाल दिये जाने से तेज हवा चलने पर उड़ कर आस पास के घरों में जा रहा है जिससे काफी प्रदुषण भी फैल रहा है। इतनी भारी मात्रा में अवैध तरीके से फ्लाईएश डंप करना ही पर्यावरण विभाग की भूमिका पर सवालिया निशान खड़े कर रहा है। विभाग की ओर से इसकी सुध आज पर्यंत नहीं ली गई है।
पूर्व में हुई जांच ठण्डे बस्ते में
क्षेत्र के लोगों ने पूर्व में जलाशय में हो रहे अवैध कब्जे की शिकायत जिला प्रशासन से की थी। इसके बाद एक जांच कमेटी का गठन भी किया गया था तथा कमेटी द्वारा की गई जांच में यह तथ्य सामने आया था कि जलाशय को पाट कर अवैध रूप से जमीन बिक्री की जा रही है और मौके पर सौ से अधिक मकानों का निर्माण होना भी पाया गया था। इसके बाद जांच रिपोर्ट ठण्डे बस्ते में डाल दी गई। इस प्रशासनिक उदासीनता का फायदा उठाते हुए एक बार फिर भू- माफिया सक्रिय हो गये हैं और जलाशय की सूखी जमीन को तो पहले ही बेच चुके हैं अब जलभराव वाले हिस्से को पाट कर कब्जा किया जा रहा है। वहीं जांच के समय जितने मकान मिले थे अब उससे दो गुना मकानों का निर्माण और हो गया है ।























