रायगढ़। उड़ीसा से छत्तीसगढ़ के बीच चल रहे कबाड़ तस्करी और फर्जी दस्तावेजों के जरिए सरकार के राजस्व को चूना लगाने वाले एक बड़े अंतर्राज्यीय नेटवर्क का पुसौर पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। यह गिरोह न सिर्फ चोरी का स्क्रैप ठिकाने लगा रहा था, बल्कि पुलिस और कोर्ट को गुमराह करने के लिए रातों-रात फर्जी ई-वे बिल तैयार करने का खेल भी खेल रहा था। मामले की कड़ियां उड़ीसा से लेकर रायगढ़ और रायपुर तक जुड़ी हुई हैं। पुलिस ने इस फर्जीवाड़े में शामिल उड़ीसा के दो बड़े कबाड़ कारोबारियों को दबोच लिया है, जबकि रायगढ़ का मुख्य सरगना नीरज अग्रवाल अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है, जिसकी तलाश में पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है।
ऐसे शुरू हुआ कबाड़ तस्करी के इस बड़े खेल का भंडाफोड़
इस पूरे काले कारोबार की परतें तब खुलनी शुरू हुईं जब बीती 13 मार्च 2026 को पुसौर पुलिस ने जांच के दौरान दो संदिग्ध ट्रकों को रोका था। इस्तगासा क्रमांक 04/26 और 05/26 की जांच के दौरान पुलिस ने जब ट्रक चालक कुबेर यादव और सरोज भोई से कड़ाई से पूछताछ की, तो उन्होंने चौंकाने वाला खुलासा किया। चालकों ने बताया कि वे उड़ीसा के बलांगीर क्षेत्र से भारी मात्रा में चोरी का स्क्रैप लोड कर रायगढ़ के पूंजीपथरा इलाके में स्थित फैक्ट्रियों में खपाने के लिए ला रहे थे। जब पुलिस ने माल के कागजात मांगे, तो रायगढ़ के कारोबारी नीरज अग्रवाल द्वारा टैक्स इनवॉइस और ई-वे बिल पेश किए गए। लेकिन जब पुसौर पुलिस ने इन दस्तावेजों की बारिकी से पड़ताल की, तो भारी विसंगतियां सामने आईं। कागजों में माल भेजने का स्थान (डिस्पैच लोकेशन) अलग-अलग दिखाया गया था। पुलिस को तुरंत समझ आ गया कि वैध कागजात की आड़ में बेईमानी से शासन को राजस्व का नुकसान पहुंचाकर चोरी की संपत्ति को खपाया जा रहा है। इसके बाद पुसौर थाने में अपराध क्रमांक 79/26 के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(2), 317(5) और 3(5) के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की गई।
उड़ीसा तक पहुंची जांच की आंच, खुली फर्जीवाड़े की फैक्ट्री
मामले की गहराई तक जाने के लिए रायगढ़ पुलिस की एक विशेष टीम गठित की गई, जो सुराग पीछा करते हुए सीधे उड़ीसा के भेडन थाना क्षेत्र स्थित ‘मसौदी इंटरप्राइजेस’ नामक फर्म पर जा पहुँची। वहाँ पुलिस ने फर्म के संचालक गुलाम हैदर और उसके भाई गुलाम मोहम्मद को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की। पुलिसिया पूछताछ के आगे दोनों भाई ज्यादा देर टिक नहीं सके और उन्होंने पूरे रैकेट का सच उगल दिया। आरोपियों ने कुबूल किया कि वे विभिन्न छोटे-मोटे कबाड़ चोरों और व्यापारियों से बिना किसी कागजात के स्क्रैप खरीदते थे और उसे उड़ीसा, रायपुर तथा रायगढ़ के बड़े प्लांटों में भेजते थे। यह माल कभी बिना बिल के तो कभी फर्जी दस्तावेजों के सहारे भेजा जाता था।
व्हाट्सएप पर रातों-रात तैयार होते थे फर्जी ई-वे बिल
पकड़े गए आरोपियों ने पुलिस के सामने सबसे बड़ा खुलासा यह किया कि जब मार्च महीने में पुसौर पुलिस ने उनके स्क्रैप से लदे ट्रकों को पकड़ा था, तब रायगढ़ के मुख्य आरोपी नीरज अग्रवाल के होश उड़ गए थे। ट्रकों और माल को पुलिस तथा कोर्ट से छुड़ाने के लिए नीरज अग्रवाल ने उड़ीसा के इन फर्म संचालकों से संपर्क किया। इसके बाद नीरज अग्रवाल के कहने पर आरोपियों ने रातों-रात कंप्यूटर पर फर्जी ई-वे बिल तैयार किए। इन बिलों में समय और तारीख की ऐसी कूटनीति (बैक डेटिंग) की गई जिससे लगे कि यह बिल ट्रक पकड़े जाने से पहले ही जारी हो चुके थे। इन फर्जी ई-वे बिलों को मूल्यवान प्रतिभूति के रूप में इस्तेमाल कर कोर्ट और पुलिस की आंखों में धूल झोंकने की तैयारी थी। इन बिलों को बकायदा व्हाट्सएप के जरिए भेजा गया था ताकि इन्हें असली बताकर कोर्ट से गाड़ियां छुड़वाई जा सकें। पुलिस ने आरोपी गुलाम हैदर के मेमोरेंडम पर वारदात में इस्तेमाल हुआ एवन कंपनी का मोबाइल फोन और मसौदी इंटरप्राइजेस के जीएसटी बिल से जुड़े फर्जी दस्तावेज जब्त कर लिए हैं। प्रारंभिक जांच में यह भी साफ हो गया है कि इस फर्जीवाड़े से राज्य सरकार को लाखों रुपये के जीएसटी राजस्व की चपत लगाई गई है।
संगीन धाराएं जुड़ीं, दो ड्राइवर पहले ही जा चुके हैं जेल
फर्जीवाड़े और कूटनीचना का यह स्तर देखकर पुसौर पुलिस ने मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई अन्य गंभीर धाराएं जैसे 336(3), 338, 340(2) और 61 बीएनएस जोड़ी हैं। इस मामले में पुलिस ने बीते कल यानी 20 मई 2026 को ही दोनों ट्रक ड्राइवरों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था, जिनमें वार्ड क्रमांक 18 बांदू टिकरा, थाना कोतवाली बरगढ़ (उड़ीसा) का रहने वाला सरोज भोई पिता परमे भोई (उम्र 44 वर्ष) और वार्ड क्रमांक 01 मेदनीपुर सराईपाली, थाना बसना, जिला महासमुंद (छत्तीसगढ़) का रहने वाला कुबेर यादव पिता निताई यादव (उम्र 37 वर्ष) शामिल हैं। वहीं आज पुलिस ने उड़ीसा के कबाड़ माफिया भाइयों गुलाम हैदर और गुलाम मोहम्मद को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है। अब पुलिस की पूरी टीम फरार मास्टरमाइंड नीरज अग्रवाल के ठिकानों पर दबिश दे रही है।
इस टीम ने किया नेटवर्क को ध्वस्त और एसएसपी की सख्त चेतावनी
अंतर्राज्यीय कबाड़ और टैक्स चोरी के इस बड़े सिंडिकेट को बेनकाब करने में पुसौर थाना प्रभारी निरीक्षक हर्षवर्धन सिंह बैस, उप निरीक्षक कुंदन लाल गौर और उनके हमराह स्टाफ की मुख्य और बेहद पेशेवर भूमिका रही, जिन्होंने उड़ीसा में घुसकर आरोपियों को दबोचा। इस बड़ी कार्रवाई के बाद एसएसपी वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह ने अवैध कारोबारियों को कड़ा और सीधा अल्टीमेटम दिया है। एडिशनल एसपी अनिल सोनी और डीएसपी उन्नति ठाकुर के मार्गदर्शन में जारी इस अभियान को लेकर एसएसपी शशि मोहन सिंह ने साफ कहा है कि फर्जी दस्तावेज बनाकर सरकार के खजाने को नुकसान पहुँचाने वाले और चोरी की संपत्तियों का अवैध व्यापार करने वाले माफियाओं के खिलाफ रायगढ़ पुलिस का अभियान लगातार जारी रहेगा। अवैध स्क्रैप के धंधे में शामिल किसी भी रसूखदार या अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा और उनके खिलाफ ऐसी ही कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी ताकि अपराधियों के भीतर कानून का डर बना रहे।























