रायगढ़। सरकार ने गत वर्ष की तरह ही इस बार भी यूरिया उपलब्ध कराने का आदेश जारी किया है। लेकिन डीएपी की किल्लत जस की तस रहेगी। इसे पूरा करने के लिए नैनो डीएपी उपयोग करने को कहा जा रहा है लेकिन किसानों को मालूम ही नहीं, कैसे यूज करना है। दरअसल बीजों को उपचारित करके डीएपी का उपयोग किया जाना है। तरल उर्वरकों के उपयोग के लिए सरकार ने इफको से अनुबंध किया। मांग के हिसाब से नैनो उर्वरकों का निर्माण करके भेजा जा रहा है। वर्तमान में सहकारी समितियों में नैनो यूरिया और नैनो डीएपी का भंडारण हो चुका है
लेकिन किसानों में इसका उठाव करने की जल्दबाजी नहीं है। दरअसल नैनो डीएपी का इस्तेमाल थोड़ा संभलकर करने की सलाह दी जा रही है। किसानों को अब तक कृषि विभाग ने इस्तेमाल को लेकर सही समझाईश नहीं दी है। सही जानकारी किसानों तक पहुंच ही नहीं रही है। इसलिए नैनो उर्वरकों का उठाव कम है। नैनो डीएपी को बीजों के साथ ही उपयोग करना है। इस बारे में कृषि विभाग का मैदानी अमला कोई अभियान नहीं चला रहा है।
नैनो डीएपी का उपयोग तीन बार किया जा सकता है लेकिन कितनी मात्रा में करना है, यह समझने में किसानों को मुश्किल हो रही है। इधर शासन ने यूरिया के 80 प्रश वितरण के पुराने आदेश को निरस्त किया है। अब खरीफ 2025 की मात्रा के बराबर ही किसानों को यूरिया मिलेगी। नैनो यूरिया की खपत कम हो जाएगी।























