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नोटिस दिए, नापजोख की, कोटवारी जमीन नहीं करवा सके मुक्त

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  • अतरमुड़ा में 29 लोगों ने किया है अवैध निर्माण, सडक़ चौड़ीकरण में देना पड़ेगा मुआवजा

रायगढ़ (केलो प्रवाह)। विकास की राह में सबसे बड़ा रोड़ा अवैध कब्जे बन रहे हैं। लोगों ने सरकारी जमीनों के अलावा कोटवारी जमीनों पर भी अतिक्रमण कर लिया है। जांच में पुष्टि होने के बावजूद जमीनें वापस नहीं ली जा सकती। बड़े अतरमुड़ा में कब्जा होने के दौरान भी जानकारी सामने आई लेकिन निर्माण नहीं रोक सके। अब उस सडक़ के चौड़ीकरण में प्रशासन को मोटा मुआवजा देना पड़ेगा। कोटवारी जमीनों की अवैध खरीदी-बिक्री पर कार्रवाई हो रही है। सभी केस निकालकर राजस्व मंडल के आदेश का पालन किया जा रहा है, लेकिन कोटवारी जमीन से अतिक्रमण हटाने का काम धीमा है।

सरकार ने कहा था कि कोटवारी जमीनों को अहस्तांतरणीय दर्ज करते हुए बेजा कब्जे से मुक्त कराएं। इस पर अब तक कोई एक्शन नहीं लिया गया। बड़े अतरमुड़ा का मामला तो कई महीनों से लंबित है। यहां खसरा नंबर 65/3 रकबा 1.951 हे. भूमि ग्राम नौकर सेवा भूमि के रूप में दर्ज है। इस पर 29 लोगों ने अवैध कब्जा कर लिया है। इसकी जांच और सीमांकन करीब दो साल पहले हुआ था। सात कब्जे ऐसे हैं जहां केवल बाउंड्रीवॉल घेरकर कब्जा किया गया है। कोई निर्माण नहीं किया गया है। 22 लोगों ने निर्माण कर लिया है। किसी ने 1200 वर्गफुट तो किसी ने 5000 वर्गफुट जमीन पर अतिक्रमण कर लिया है।

अतिक्रमण करने वालों में सरकारी डॉक्टर भी हैं। इसकी रिपोर्ट भी दाखिल की जा चुकी है। तहसीलदार ने सभी को नोटिस भी दिया था। लेकिन मामला साफ होने के बाद भी अंतिम आदेश नहीं दिया जा रहा है। कोटवारी जमीन पर डॉ. पटेल, अनिल पिता भोलाराम, मनोज यादव, महेंद्र निषाद, पिंटू चौहान, सुमित्रा खडिय़ा, किशोर बाबू, चैतन्य चौधरी, सतीश पटेल, सीमा देहरी, संजय मिस्त्री, पिंकी देवी, चुन्नू यादव, अर्जुन यादव, बबली वर्मा, शत्रुघन भगत, श्याम बसंत और अन्य का कब्जा पाया गया है।

रोड का होगा चौड़ीकरण
एसईसीएल की ओर से मरीन ड्राइव को आगे बढ़ाते हुए बोंदाटिकरा पुल या विकास स्कूल के बाजू से प्राची विहार होते हुए मेडिकल कॉलेज रोड से जोड़ा जाएगा। यह सडक़ भी एक तरह से बायपास की तरह हो जाएगी। प्राची विहार के पास रोड के दोनों ओर निर्माण हो चुके हैं। यहीं पर कोटवारी जमीन पर निर्माण भी हुए हैं। अब रोड चौड़ा होगा तो अतिक्रमण का भी मुआवजा देना पड़ेगा। इससे शासन को नुकसान होना तय है।

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