Skip to content

रायगढ़ जिले के DMF का काम संभालेगी दिल्ली की AFC India Limited

DMFFUND

रायगढ़। जिले के डीएमएफ को संभालने के लिए प्रशासन ने कंपनियों से प्रपोजल मंगाए थे। इसमें नई दिल्ली की एक कंपनी एएफसी इंडिया लिमिटेड को सर्वाधिक अंक मिले हैं। कंपनी रायगढ़ में प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट का सेटअप करेगी जो डीएमएफ के सारे काम संभालेगी। काम की डीपीआर से लेकर मॉनिटरिंग तक का काम यही कंपनी करेगी। डिस्ट्रिक्ट मिनरल फंड के रूप में रायगढ़ जिले को प्रतिवर्ष करीब 150 करोड़ रुपए मिलने का अनुमान है। कोयला का उत्पादन जितना अधिक होगा, डीएमएफ का खजाना उतना ही ज्यादा भरेगा। डीएमएफ का प्रावधान करने के बाद से अब तक करीब 400 करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं लेकिन इम्पैक्ट नहीं दिखता।

इसकी वजह है, डीएमएफ में केवल सप्लाई, खरीदी, ट्रेनिंग के काम किए गए। प्रारंभ से लेकर अब तक खनन प्रभावित क्षेत्रों के नाम पर केवल शहरी क्षेत्रों में राशि खर्च की जाती रही। खनन की पीड़ा झेलने वाले समुदाय को किनारे कर दिया गया। करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद आज भी न तो उनके लिए कोई अच्छा स्कूल मिला, न कॉलेज, न सड़कें, न ही अस्पताल। कोयला खदानों से प्रभावित गांवों में बुनियादी सुविधाओं का टोटा ही रहा। जो भी राशि जारी की गई, वह बंदरबांट कर ली गई। केंद्र सरकार ने डीएमएफ के नए गाइडलाइन में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष प्रभावित क्षेत्रों की परिभाषा बताते हुए काम करने की हिदायत दी है।

इसलिए रायगढ़ जिले में अब सरकारी अमले पर भरोसा न दिखाते हुए आउटसोर्सिंग की गई है। जिला प्रशासन ने प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट की स्थापना के लिए देश भर की कंपनियों से निविदा मंगवाई थी। इसमें नौ कंपनियों ने आवेदन और प्रेजेंटेशन दिए। इसमें प्लाडियम कंसल्टिंग इंडिया प्रालि, अर्नेस्ट एंड यंग एलएलपी गुरुग्राम, च्वाइस कंसल्टेंसी सर्विसेस रायपुर, केपीएमजी एडवाइजरी सर्विसेस प्रालि गुरुग्राम, आईपीई ग्लोबल लिमिटेड, एएफसी इंडिया लिमिटेड नई दिल्ली, एनआईटी रायपुर, आईआईटी भिलाई और फोर्ब्स मेजर्स एलएलपी गुरुग्राम ने बिड डाली थी। एएफसी इंडिया को अनुभव, प्रेजेंटेशन आदि के आधार पर सबसे ज्यादा स्कोर मिले हैं। अब प्रशासन के साथ एग्रीमेंट होगा।

करीब एक करोड़ रुपए लेगी कंपनी

एएफसी इंडिया लिमिटेड कंपनी करीब 50 साल से इस फील्ड में सक्रिय है। कंपनी को प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट के लिए 9 टीम लीडर, 16 सिविल एक्सपर्ट, 9 फाइनेंस एंड ऑडिट एक्सपर्ट और 8 सोशल एंड लाइवलीहुड एक्सपर्ट रखने होंगे। कंपनी सालाना राशि 1.01 करोड़ रुपए की बिड डाली थी। हालांकि इससे कम राशि भी बिड की गई थी लेकिन अन्य मापदंडों में कंपनी आगे रही। आईआईटी भिलाई ने तो 3 करोड़ बिड वैल्यू डाली थी।

प्रस्ताव से लेकर निर्माण की भी मॉनिटरिंग

प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट का काम डीएमएफ का हिसाब रखना ही नहीं, सारे कामों की मंजूरी से भी जुड़ा होगा। प्रभावित क्षेत्रों में स्वीकृत किए जाने वाले काम, उनका प्रस्ताव, विस्तृत रिपोर्ट, एस्टीमेट, टेंडर, निर्माण की प्रगति सबकुछ देखना होगा। इसीलिए सिविल विशेषज्ञ भी रखे गए हैं।

इस खबर को शेयर करें:

8690517c9326392a68531b5faf7668b00e00b86685972a50e34c21832c7c1c6c?s=90&d=mm&r=g

Editorial

News Room

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ से 1988 से निरंतर प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र 'केलो प्रवाह' का यह Official Digital News Room है। हमारी संपादकीय टीम देश और छत्तीसगढ़ की प्रमुख खबरों, सीएम की गतिविधियों और शासन की जनहितैषी योजनाओं को प्रमुखता से साझा करती है। किसानों के हित में समर्पित हमारी टीम, 'जल, जंगल और जमीन' से जुड़े संवेदनशील मुद्दों और विभिन्न विभागों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने वाली रिपोर्टिंग के साथ ही सुदूर अंचलों की ज़मीनी हकीकत को सामने लाती है। जनहित से जुड़ी गतिविधियों, खनिज और औद्योगिक क्षेत्रों की 'Exclusive' खबरों को Evidence के साथ प्रमाणिकता से प्रकाशित करना हमारी प्राथमिकता है। राजनीति, प्रशासन, अपराध, स्पोर्ट्स, रोज़गार, खेती-किसानी और धार्मिक विषयों सहित हर क्षेत्र की खबरों को पूरी शुचिता के साथ प्रस्तुत करना ही हमारा संकल्प है।

Share: