- मिलूपारा के लोगों ने परिसंपत्तियों का मुआवजा पाने की है अपील, खरसिया से धरमजयगढ़ फेज-1 प्रोजेक्ट
रायगढ़, 26 अक्टूबर। कोयला परिवहन को आसान बनाने के लिए रेल लाइनों का विस्तार अब भी बाधाओं से जूझ रहा है। खरसिया-धरमजयगढ़ पहले चरण की रेल लाइन में मिलूपारा का ढाई किमी हिस्सा अब भी रुकावट बना हुआ है। लोग चाहते हैं कि जमीन पर हुए निर्माण का उनको मुआवजा मिले। कोयला मंत्रालय ने रेल लाइन के जरिए कोयले का परिवहन बढ़ाने के लिए ऐसे क्षेत्रों में नई लाइनों का जाल बिछाया है। रायगढ़ जिले को कोरबा से जोडक़र एक वृत्ताकार रूट बनाने के लिए काम चल रहा है, लेकिन भू-अर्जन हमेशा से ही अड़चन की तरह बना रहा है।
खरसिया से धरमजयगढ़ पहले चरण का काम अब तक पूरा नहीं हो सका है। छोटे-छोटे हिस्से में काम अब भी बचा हुआ है। इसमें से एक भाग मिलूपारा का भी है। बताया जा रहा है कि पिछले दो महीनों से इस जगह पर कुछ भी काम नहीं हुआ है। इरकॉन ने मंत्रालय की समीक्षा बैठक में यह स्वीकार भी किया है। दरअसल मिलूपारा में ढाई किमी के हिस्से में निजी जमीनें आ रही हैं। निवासियों ने जमीन पर मौजूद परिसंपत्तियों का मुआवजा पाने के लिए आर्बिट्रेशन में केस दायर किया है। इस जगह पर भी कई शेड बनाए गए हैं। इस वजह से मिलूपारा में काम नहीं हो पा रहा है। ढाई हेक्टेयर में फॉरेस्ट क्लीयरेंस आौर डायवर्सन भी रुका हुआ है। महाजेंको के कोल धारित क्षेत्र से होकर रेल लाइन गुजर रही है।
विद्युत लाइनें शिफ्ट करने का काम भी धीमा
रेल लाइन में परिचालन के लिए विद्युत लाइनें बिछाना है। यह काम बेहद धीमा है। सीएसपीडीसीएल की 19 लाइनों में से 14 स्थापित हो गई हैं। धरमजयगढ़ से उरगा फेज-2 में 43 पावर लाइनों में से 32 शिफ्ट हो चुके हैं। इरकॉन का कहना है कि अब जून 2026 तक काम पूरा होगा। इंडियन ऑयल की पाइपलाइन भी रास्ते में आ रही है।























