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खरसिया में मानवता की मिसाल, गौसेवक राकेश केशरवानी की तत्परता से गर्भवती गाय और बछड़े की बची जान

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खरसिया, 19 मई। खरसिया में एक बार फिर मानवता और सेवा भाव की अनूठी मिसाल देखने को मिली, जहां मौत के मुहाने पर पहुंच चुकी एक गर्भवती गाय और उसके बच्चे को समय रहते सुरक्षित बचा लिया गया। खरसिया स्थित जानकी धर्मशाला के सामने एक गाय लगभग 12 घंटे से प्रसव पीड़ा में तड़प रही थी। गाय अपने बच्चे को जन्म देने का लगातार प्रयास कर रही थी, लेकिन बच्चा अंदर ही फंस गया था। गाय की शारीरिक संरचना ऐसी थी कि सामान्य रूप से बच्चे का बाहर निकलना संभव नहीं हो पा रहा था। लगातार कई घंटों तक दर्द सहने के कारण गाय की हालत बेहद गंभीर हो चुकी थी और आसपास मौजूद लोगों में चिंता बढ़ने लगी थी।

स्थिति की गंभीरता की सूचना मिलते ही खरसिया के गौसेवक राकेश केशरवानी तत्काल मौके पर पहुंचे। उन्होंने बिना देरी किए हालात का जायजा लिया और तुरंत पशु चिकित्सकों को बुलाकर गाय की जांच कराई। डॉक्टरों की टीम ने परीक्षण के बाद स्पष्ट किया कि अब सामान्य प्रसव संभव नहीं है और गाय व उसके बच्चे की जान बचाने के लिए ऑपरेशन ही एकमात्र विकल्प है। उस समय तक करीब 12 घंटे बीत चुके थे, जिससे गाय की हालत लगातार बिगड़ रही थी और यह भी स्पष्ट नहीं था कि गर्भ में पल रहा बच्चा जीवित है या नहीं।

ऐसे चुनौतीपूर्ण हालात में गौसेवक राकेश केशरवानी ने पूरी जिम्मेदारी संभाली और तत्काल गाय को वाहन के माध्यम से गौ सेवा गौ धाम पहुंचाने की व्यवस्था कराई। वहां पहुंचते ही ऑपरेशन की तैयारी शुरू की गई। कुछ ही देर में पशु चिकित्सा प्रभारी डॉ. दिलीप पटेल, डॉ. दीपक पटेल, डॉ. पवन साहू और डॉ. हीरा सारथी अपनी टीम के साथ पहुंचे और गाय का ऑपरेशन प्रारंभ किया।

बताया गया कि गाय का ऑपरेशन भी किसी महिला के सी-सेक्शन की तरह ही जटिल प्रक्रिया होती है। इसमें तीन लेयर तक चीरा लगाकर बच्चे को बाहर निकाला जाता है और उसके बाद एक-एक कर सभी परतों में सावधानीपूर्वक टांके लगाए जाते हैं। करीब तीन घंटे तक चले इस कठिन ऑपरेशन में डॉक्टरों और गौसेवकों की टीम ने लगातार मेहनत की। आखिरकार ऑपरेशन सफल रहा और बच्चे को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। राहत की बात यह रही कि गाय भी पूरी तरह सुरक्षित है।

इस पूरे रेस्क्यू अभियान में गौसेवक राकेश केशरवानी की भूमिका सबसे अहम रही। सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचना, पशु चिकित्सकों से समन्वय करना, गाय को सुरक्षित गौ धाम तक पहुंचाना और पूरी प्रक्रिया के दौरान सक्रिय रहना, यह दर्शाता है कि वे गौसेवा को केवल सामाजिक कार्य नहीं बल्कि अपना दायित्व मानते हैं। उनकी तत्परता और संवेदनशीलता के कारण एक बेजुबान गाय और उसके बच्चे को नया जीवन मिल सका।

फिलहाल जच्चा-बच्चा दोनों सुरक्षित हैं और गौ सेवा गौ धाम में ही उनकी निरंतर देखभाल एवं उपचार किया जा रहा है। डॉक्टरों की निगरानी में गाय के टांके खुलने तक विशेष ध्यान रखा जाएगा। इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि आज भी समाज में ऐसे लोग मौजूद हैं, जो बेजुबान पशुओं के दर्द को समझते हैं और उनके जीवन की रक्षा के लिए हर संभव प्रयास करते हैं। खरसिया में गौसेवक राकेश केशरवानी और पूरी टीम के इस सराहनीय कार्य की हर ओर प्रशंसा हो रही है।

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