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बर्रा कोल ब्लॉक के लिए DGPS सर्वे शुरू, 12 गांवों की जमीन पर वेदांता की नजर, तमनार तनाव के बीच अब बरगढ़ खोला में हलचल

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  • वन भूमि का डायवर्सन करने के लिए बालको ने किया आवेदन, वेदांता ग्रुप को आवंटित हुआ है कोल ब्लॉक

रायगढ़, 2 फरवरी। वेदांता एल्युमिनियम को रायगढ़ जिले में बर्रा कोल ब्लॉक आवंटित है। अब कंपनी ने इसे विकसित करने के लिए कदम आगे बढ़ाया है। महाजेंको की तरह ही पहले वन भूमि से शुरुआत की जा रही है। वन विभाग ने डीजीपीएस सर्वे करने की अनुमति दी है ताकि वन भूमि की वास्तविक रिपोर्ट मिल सके। कोल मिनिस्ट्री ने रायगढ़ और कोरबा जिले की सीमा में फैले बर्रा कोल ब्लॉक का आवंटन वेदांता एल्युमिनियम को किया है। नीलामी में कंपनी ने सर्वाधिक बोली लगाई। वेदांता कंपनी का कोरबा में भारत एल्युमिनियम कंपनी प्लांट है। इस खदान में बगझर, बर्रा, जोबी, करूवाडीह, कुरू, मिनगांव, नगोई, पुछियापाली, रिलो और रामपुर की जमीनें जाएंगी। बताया जा रहा है कि करीब 3144 हे. भूमि इस कोल ब्लॉक के लिए अधिग्रहित की जाएगी।

करीब 31 वर्ग किमी क्षेत्रफल में फैलने वाले इस कोल ब्लॉक में वन भूमि करीब 5 वर्ग किमी है। कोरबा तक कोयला परिवहन आसान होने के कारण यह खदान वेदांता ने ली है। केप्टिव के साथ कमर्शियल यूज भी किया जाएगा। फिलहाल 1200 हेक्टेयर पर ही माइनिंग लीज का आवेदन किया जा रहा है। वन विभाग ने डिफरेंशियल ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम के तहत खरसिया के जोबी, रिलो, बर्रा, कुर्रू करुवाडीह और नगोई के वन भूमि व्यपवर्तन के लिए सर्वे प्रारंभ करने की अनुमति दी है। इस दौरान कंपनी कर्मचारियों के साथ वन विभाग का अमला भी मौजूद रहेगा। 

लंबे समय से हो रहा विरोध
वर्तमान में रायगढ़ जिले में किसी भी कोयला खदान के लिए समय सही नहीं है। तमनार में हिंसक प्रदर्शन के बाद माहौल तनावपूर्ण है। बर्रा कोल ब्लॉक के लिए आदिवासियों ने पहले ही जमीनें नहीं देने का निर्णय लिया है। कोयले की उपलब्धता जांचने के लिए बोरहोल हो चुके हैं। इस खदान से करीब 12 गांव विस्थापित होंगे। कोयले की उपलब्धता कहीं कम गहराई में है तो कहीं बहुत नीचे। इसलिए यह भी कहा जा रहा है कि कंपनी अंडरग्राउंड माइनिंग करेगी। अब पूरे घोषित क्षेत्र में से चुनिंदा हिस्से पर ही माइनिंग लीज का आवेदन किया जाएगा।

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