- धरमजयगढ़ के कोयला धारित क्षेत्रों में कैसे हुआ डायवर्सन, कुछ और गोदाम सब्सिडी के लिए कतार में
रायगढ़, (केलो प्रवाह)। उद्योग विभाग से सब्सिडी लेने वाली इकाइयों का गणित बेहद साफ है। धरमजयगढ़ में अवैध शेड और गोदामों को तोडऩे की कार्रवाई होने लगी तो लोग उद्योग विभाग को जरिया बनाकर अवैध लाभ लेने लगे। जो जमीन दो-तीन साल में खदान में बदल जाएगी, वहां राइस मिल, गोदाम, कोल्ड स्टोरेज की सब्सिडी ले ली गई। सबसे बड़ा सवाल यह है कि भूमि का डायवर्सन करने से पहले यह देखा ही नहीं गया। धरमजयगढ़ में एक-एक कर सात लोगों को सब्सिडी मंजूर कर ली गई। मेंढरमार, बायसी कॉलोनी और धरमजयगढ़ में करोड़ों की लागत दिखाकर यूनिट स्थापित की गई हैं।
सरकार को बताया जाता है कि उनके यूनिट में लाखों रुपए लगे हैं। हकीकत यह है कि बिलों को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया जाता है। मनमानी लागत दिखाकर 35-40 प्रश सब्सिडी मिल जाती है जिसमें पूरी यूनिट ही फ्री हो जाती है। अब तो बड़ा खेल हो गया है। मेंढरमार, बायसी कॉलोनी और धरमजयगढ़ में तीन कोयला खदानों के लिए जमीन ली जानी है। सरकार ने पहले ही इसका आवंटन कर दिया है।
प्रभावित क्षेत्र की भी जानकारी सार्वजनिक हो चुकी है। जिस जमीन का भू-अर्जन किया जाना है, वहां डायवर्सन और निर्माण की अनुमति कैसे मिल गई। राजस्व विभाग ने प्रतिवेदन बनाते समय यह नहीं देखा कि उक्त भूमि कोल बेरिंग एरिया में आ रहा है। अब सात इकाइयों को उद्योग विभाग ने सब्सिडी देने का आदेश दे दिया है। दो साल में भू-अर्जन होगा तो वही यूनिट कोयला खदान शुरू करने में सबसे बड़ी रुकावट बनेगी।
फर्जी प्रकरणों को किया था पास
रायगढ़ जिले में उद्योग विभाग ने पूर्व में कई फर्जी प्रकरणों को पास किया था। अलग-अलग विभागों में दिए दस्तावेजों में लागत को अलग-अलग बताया गया था। मतलब एक ही यूनिट की लागत पर्यावरण विभाग में 40 लाख बताई तो उद्योग विभाग में 1 करोड़। इसका मतलब है कि सब्सिडी के लिए ज्यादा से ज्यादा लागत दिखाने का काम मिल-जुलकर किया जा रहा है। खुलासा हुआ तो तत्कालीन जीएम शिव राठौर ने मामला दबा दिया। कार्रवाई के बजाय उन फर्मों को सब्सिडी बांट दी। धरमजयगढ़ में भी कोयला खदान प्रभावित क्षेत्र में इकाइयों की लागत बढ़ा-चढ़ाकर दिखाई गई है।






















