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लाईमस्टोन और डोलोमाइट खदानों के ट्रिगर कब होंगे जारी

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  • ड्रोन सर्वे में मिलेगा अवैध खदानों का बड़ा क्लस्टर, नियम विरुद्ध चल रहे खदानों पर चेहरा देखकर कार्रवाई

रायगढ़। हाल ही में कलेक्टर सारंगढ़-बिलाईगढ़ के निर्देश पर लाइमस्टोन और डोलोमाइट क्रशरों पर कार्रवाई की गई। करीब दस क्रशर सील किए गए हैं। मौहापाली में सात एकड़ में डोलोमाइट की अवैध खदान पकड़ी गई, जो अब भी चल रही है। खनन माफिया के साथ कदमताल कर रहे अफसरों की वजह से ही सारंगढ़ और बरमकेला में अवैध माइनिंग हो रही है। अभी केवल एक ही अवैध खदान पकड़ी गई है। तीन साल पहले जब ट्रिगर जारी हुए थे तब अफसरों ने ही मामले को दबाया। सारंगढ़ और बरमकेला तहसील में लाइमस्टोन व डोलोमाइट के क्रशरों ने तबाही मचा दी है। कोई सरकारी जमीन सुरक्षित नहीं है।

सरसरा, लालाधुरवा, साल्हेओना, कटंगपाली, नौघटा, बिलाईगढ़, जोतपुर, मौहापाली गांवों में अवैध खनन ने पूरा क्षेत्र अस्त-व्यस्त कर डाला है। अवैध खदानों से बोल्डर निकालने का काम लोकल लोगों को दिया जाता है ताकि कोई क्रशर संचालक डायरेक्ट न फंसे। जब भी गाड़ी पकड़ी जाती है तो उसका मालिक लोकल ही होता है। केवल डंपर और हाईवा ही क्रशर संचालकों के होते हैं। पिछले दिनों मौहापाली में अवैध खनन का बड़ा मामला पकड़ा गया है। डोलोमाईट खनन के लिए सात एकड़ जमीन पर गहरा गड्ढा किया जा चुका है। इस पर पेनाल्टी के लिए कार्रवाई की जानी है लेकिन खनिज विभाग यह तय नहीं कर पा रहा है कि किसको नोटिस दें।

आठ पोकलेन, एक जेसीबी और 19 ट्रैक्टर जब्त किए गए हैं। अब सवाल यह है कि खदान से निकाले गए कुल खनिज पर पेनाल्टी लगाई जाएगी या केवल सामान्य जुर्माना करके छोड़ दिया जाएगा। अवैध खनन पर सख्त कार्रवाई नहीं करने की एक वजह प्रशासन खुद है। जानकारी होने के बावजूद मौहापाली में न तो एसडीएम वर्षा बंसल पहुंची न ही खनिज विभाग की कोई टीम। नवपदस्थ खनिज निरीक्षक ने कार्रवाई की तो मामला पकड़ा गया। दरअसल लाइमस्टोन और डोलोमाइट की अवैध खनन को लेकर पूर्व में ट्रिगर जारी किए गए थे। तब भी प्रशासनिक लाचारी की वजह से सारंगढ़ एसडीएम ने जांच नहीं करवाई। खनिज संचालनालय ने ही मामला दबाने के आदेश दिए। अब दोबारा ट्रिगर जांच की जरूरत है।

फिर से एनजीटी जाएगा मामला

एनजीटी की प्रिंसिपल बेंच ने एक कमेटी बनाकर बरमकेला तहसील के 12 डोलोमाइट खनिपट्टों की जांच का आदेश दिया था। कमेटी में रायगढ़ और सारंगढ़-बिलाईगढ़ कलेक्टर को भी रखा गया था। छग शासन ने भी ट्रिगर जांच का आदेश दिया था। लेकिन दोनों ही बार झूठी रिपोर्ट दे दी गई। खनिपट्टों की सीमा से लगी जमीनों पर अवैध खनन हुए हैं। एनजीटी ने शुभ मिनरल्स, बाबा बैजनाथ मिनरल्स, बिंदल मिनरल्स, गंगा मिनरल्स, रायगढ़ मिनरल्स, सतगुरु सांई माइंस प्रालि, जय दुर्गा क्रशर, जय मां चंद्रहासिनी ग्रामोद्योग, ओम मिनरल्स, हरिओम मिनरल्स और नवदुर्गा क्रशर की जांच के आदेश दिए थे। छग शासन ने 11 डोलोमाइट और एक लाइमस्टोन खदान की ट्रिगर जांच का आदेश दिया था। सबके गूगल मैप भेजे गए थे, जिसमें अवैध खनन साफ दिख रहा था। इस मामले को भी दबा दिया गया।

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