- केलो परियोजना से ले रहा सालाना 11 एमसीएम पानी, शासन से नहीं मिली है विधिवत अनुमति
रायगढ़। शहरवासियों की प्यास बुझाने के लिए केलो नदी से पानी लिया जाता है। लेकिन एग्रीमेंट नहीं होने की वजह से तीन गुना दर पर बिलिंग हो रही है। शासन से विधिवत अनुमति नहीं मिलने की वजह से बकाया राशि का आंकड़ा करीब 7 करोड़ पहुंच चुका है। विभाग लगातार बिल भेज रहा है लेकिन समाधान नहीं निकल सका है। पानी के नैसर्गिक स्रोतों से पानी लेने के बदले तय राशि का भुगतान करना पड़ता है। भले ही नगर निगम पेयजल के लिए केलो नदी से पानी लेता है लेकिन इसका भुगतान केलो परियोजना रायगढ़ को करना पड़ेगा। वर्तमान में पचधारी एनीकट के पास इंटेकवेल से शहर को पानी आपूर्ति की जाती है। पहले पानी 32 एमएलडी फिल्टर प्लांट पहुंचता है। फिर वहां से पूरे शहर को आपूर्ति की जाती है। इसके बदले 64 पैसे प्रति घन मीटर पानी की दर से भुगतान किया जाना है।
नगर निगम ने सालाना 11 मिलियन क्यूबिक मीटर की मांग केलो परियोजना से की है। पानी लेने पर कोई रोक नहीं है लेकिन एग्रीमेंट करना पड़ता है। प्रत्येक संस्था को एग्रीमेंट करना पड़ता है। हैरानी की बात यह है कि नगर निगम ने एग्रीमेंट नहीं किया है। इसलिए तीन गुना दर यानी 1.92 रुपए की दर से पानी का भुगतान करना पड़ेगा। जल संसाधन विभाग रायपुर से इस संबंध में मार्गदर्शन मांगा गया था। वहां से भी पेयजल आपूर्ति के लिए पानी देने पर सहमति दी गई लेकिन विधिवत मंजूरी अब तक नहीं दी गई है। इस वजह से नगर निगम को तीन गुना दर पर भुगतान करना पड़ सकता है। लोगों से जलकर वसूलने वाले नगर निगम ने एग्रीमेंट नहीं किया है। लंबे समय से भुगतान भी नहीं होने के कारण करीब 7 करोड़ रुपए बकाया बिल हो चुका है।
एग्रीमेंट हुआ तो बिल हो जाएगा कम
जल संसाधन विभाग मुख्यालय से विधिवत एग्रीमेंट करने की मंजूरी मिलने के बाद संभव है कि बिल दोबारा बनाया जाए। जनहित पानी आपूर्ति के कारण बिल 64 पैसे प्रति घन मीटर की दर से बनाया जा सकता है। इससे बकाया बिल करीब ढाई करोड़ हो जाएगा। लेकिन नगर निगम को भुगतान करना पड़ेगा। सवाल यह है कि बिना एग्रीमेंट के पानी सप्लाई के कारण बेवजह एक मुद्दा उठा है। इसका समाधान करने के बजाय मामला लंबा खींचा जा रहा है।























