दुनिया में लंबे समय से लोग खेती कर रहे हैं. आज के समय में किसान कई तरह के संसाधनों की मदद से ऐसी फसलों का चुनाव करते हैं, जो कम समय में ज्यादा मुनाफ़ा देता है. इसका कारण भी सिंपल है. जब कम मेहनत से ही ज्यादा लाभ हो सकता है तो भलेगधा मजदूरी क्यों की जाए. हालांकि, ऐसे कुछ फसल होते हैं जिन्हें कैश क्रॉप करते हैं. यानी इनकी खेती करते ही किसान को अच्छी-खासी इनकम मिल जाती है. लेकिन कुछ फसल मुनाफ़ा देने के साथ ही जेल की हवा भी खिला देते हैं.भारत में सरकार से परमिशन लेने के बाद अफीम की खेती की जाती है. सरकार को पता होता है कि कहां कितनी मात्रा में अफीम की खेती हो रही है. इसकी खास वजह है. ये फसल किसान सराकर को ही बेच सकता है. इससे दवाइयां बनाई जाती है.
जो छिपकर अफीम उगाते हैं, वो इसे बतौर ड्रग्स इस्तेमाल करते हैं. ऐसे में युवाओं को नशे से मुक्त करवाने के लिए इनकी खेती पर खास नजर रखी जाती है. इन्हें बेचकर किसानों को अच्छा खासा पैसा मिलता है. लेकिन आज हम जिस फसल की बात कर रहे हैं वो अफीम और गांजा का भी बाप है. वैसे भारत में अफीम की खेती की जाती है लेकिन हम जिस पौधे की बात कर रहे हैं वो तो पूरी तरह से बैन है. हम बात कर रहे हैं ला कोका या कोका प्लांट की। इससे बनता है कोकेन. जी हां, वही ड्रग्स जो पाउडर के रूप में बेचा जाता है. कोका की खेती भारत में पूरी तरह से बैन है. अगर भारत में कोका का जिक्र होता है तो ज्यादातर लोग इसे कोका कोला से जोड़ देते हैं. लेकिन कोका प्लांट असल में कोकेन ड्रग्स का सोर्स है. हालांकि, कोका प्लांट मुख्य तौर पर साउथ अमेरिका में उगाया जाता है. वहां की मिट्टी और मौसम इस प्लांट के ग्रोथ के लिए सबसे बेस्ट माना जाता है.
कोका प्लांट की खेती स्ट्रिक्ट नियमों के तहत की जाती है. ये छोटी झाड़ियों में पैदा होती है. इसके पत्ते गोल आकार के होते हैं. ऐसे में कई बार इसे दूसरे पौधों से रिलेट कर दिया जाता है. जहां इसकी खेती लीगल है, वहां इसे उगाने वाला करोड़पति बन जाता है. लेकिन अगर ये इलीगल है और आप इसे उगाते हुए पकड़े जाते हैं तो आपके लिए ये जेल का टिकट बन जाता है. इसे दिसंबर से जनवरी के बीच में उगाया जाता है. फसल को सूरज की डायरेक्ट रौशनी से दूर रखा जाता है.























