- प्रदूषण की चपेट में आएगा पुसौर और रायगढ़ ब्लॉक, सड़क पर दस गुना ज्यादा दौड़ेंगी फ्लाई एश की गाडिय़ां
रायगढ़। एनटीपीसी लारा के तीसरे चरण के दो यूनिट की स्थापना आगामी दो जून को महलोई में जनसुनवाई होनी है। सबसे अहम बात यह है कि तीनों चरणों के छह यूनिट तैयार होने के बाद लारा प्लांट की क्षमता 4800 मेगावाट हो जाएगी। इससे उत्सर्जित फ्लाई एश का परिवहन करने के लिए ट्रकों की संख्या सैकड़ों में पहुंच जाएगी। पुसौर और रायगढ़ ब्लॉक का हाल क्या होगा? एनटीपीसी लारा पावर प्लांट देश का सबसे ज्यादा बिजली उत्पादन करने वाला प्लांट बन जाएगा। यहां की बिजली छग के अलावा दूसरे प्रदेशों को भी रोशन करेगी। लेकिन इसकी कीमत पुसौर और रायगढ़ जिले के लोग चुकाएंगे जिसकी भरपाई नहीं हो सकेगी।
अपनी पुश्तैनी जमीनें देने के बाद प्रदूषण के गहरे अंधकार में पूरा इलाका समा जाएगा। वर्तमान में पहले चरण में निर्मित दो यूनिटों से 1600 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है। दूसरे चरण में 800-800 मेगावाट की दो यूनिटों का निर्माण चल रहा है, जिसके बाद क्षमता 3200 मेगावाट हो जाएगी। दूसरे चरण का काम 2028 तक पूरा होने की उम्मीद है। तीसरे चरण में भी इतनी ही क्षमता के दो यूनिट लगाए जाएंगे। इसके बाद प्लांट की क्षमता 4800 मेगावाट हो जाएगी। तीसरे चरण में करीब 227 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित की जानी है, जिसमें
212 हे. निजी, दो हे. सरकारी और 12 हे. वन भूमि है। प्लांट से अभी जो राखड़ निकल रहा है, उसके परिवहन में भारी गड़बड़ी की गई। सोचिए कि छह यूनिट बनने के बाद एक करोड़ टन एश हर साल निकलेगा। इसके लिए स्लरी पाइप लाइन की योजना अब भी अधर में लटकी है। मतलब पूरा राखड़ प्लांट के एश डाइक में डाला जाएगा। वहां से ट्रकों के जरिए परिवहन किया जाएगा। अभी 30 लाख टन राखड़ का निराकरण नहीं हो पा रहा है, एक करोड़ टन की निकासी होने पर क्या होगा।
कितनी नौकरियां देगी कंपनी
एनटीपीसी ने पुनर्वास नियमों की अनदेखी की है। आसपास गांवों के पढ़े लिखे युवा भी यहां काम नहीं कर पाते। तीसरे चरण की जनसुनवाई के पहले लोगों से क्या वादा किया गया है। जब लारा प्लांट से एक करोड़ टन एश का परिवहन करने के लिए तीन गुना ज्यादा संख्या में ट्रक निकलेंगे तो ये इन्हीं गांवों की छाती से होकर गुजरेंगे। मतलब प्रदूषण की चपेट में आने वाले गांवों में हालात दुष्कर होने वाले हैं।
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