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पुराने लोगों को मिली ताकत, नए प्रबंधक बने रबर स्टाम्प

रायगढ़। इस बार शासन ने कई दागी समितियों में पुराने प्रबंधकों की जगह नए प्रबंधकों को नियुक्त किया, लेकिन ये सिर्फ रबर स्टाम्प बनकर रह गए हैं। धान खरीदी का पूरा जिम्मा पुराने लोगों के ही हाथ है। जिनके कार्यकाल में गबन हुए, वही लोग खरीदी कर रहे हैं। सरकार ने धान खरीदी को लेकर बेहद सख्ती दिखाई है। ऐसा लगा जैसे बिचौलियों को समितियों में घुसने ही नहीं दिया जाएगा। करीब 10 दागी समितियों में परीक्षा पास करके आए प्रबंधकों को नियुक्त किया गया। समितियों में जमे पुराने कर्मचारियों ने कई घोटालों को अंजाम दिया। उनको किनारे करने के लिए नए प्रबंधकों से खरीदी कराने का आदेश दिया गया था। समितियों में इन प्रबंधकों की नियुक्ति भी की गई। लोइंग, तमनार, जतरी, खरसिया, धरमजयगढ़, कुड़ेकेला, लिबरा, राजपुर और लैलूंगा में इन नए प्रबंधकों की पोस्टिंग हुई है, लेकिन इनको पूरी तरह धान खरीदी का प्रभार नहीं मिला।

कुछ अफसरों ने ऐसी कहानी बताई कि पुराने लोगों की एंट्री हो गई। कहा गया कि नए प्रबंधक धान खरीदी नहीं कर पाएंगे। इसलिए उनको केवल वित्तीय प्रभार दिया गया। जतरी में जितेश देवांगन प्रबंधक हैं, लेकिन फड़ प्रभारी बालकृष्ण पटेल हैं। पिछले कई सालों से यही धान खरीदी करते आ रहे हैं। इसी वजह से जतरी में धान का बकाया दो करोड़ से अधिक है। इसी तरह राजपुर के प्रबंधक मनमोहन शर्मा हैं लेकिन उनको वित्तीय प्रभार देकर बिठाया गया है। राजपुर में भारद्वाज साहू और बगुडेगा में राजेश भगत धान खरीदी प्रभारी हैं। लैलूंगा समिति में कमलेश साहू को प्रबंधक नियुक्त किया गया है, लेकिन वे केवल वित्तीय काम देख रहे हैं। लैलूंगा केंद्र में संदीप सिदार और बिरसिंघा में झसकेतन प्रधान को धान खरीदी का काम दिया गया है।

पुराने कर्मचारी कर रहे परेशान

सूत्रों के मुताबिक नवपदस्थ प्रबंधकों एक तरह से बाहरी हो गए। धान खरीदी केंद्रों में पुराने लोगों का काकस काम करता है। ये किसी बाहरी को दखल देना स्वीकार नहीं कर सकते। इसलिए पहले ज्वाइनिंग के समय परेशानी हुई। धान खरीदी के समय साजिश करके इनको साइड कर दिया गया है। लिबरा, तमनार सभी जगहों पर यही हाल है। तुरेकेला में तो गबन के आरोपी ने अपने बेटे को प्रबंधक बना दिया। गबन करने वाले घोटालेबाज ही समितियां चला रहे हैं।

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