रायगढ़-खरसिया, 18 मई। खरसिया तहसील जिला रायगढ़ का नाम आज पूरे छत्तीसगढ़ ही नहीं बल्कि देशभर में गौ सेवा के क्षेत्र में सम्मान के साथ लिया जाता है और इसके पीछे जिस शख्सियत का सबसे बड़ा योगदान है, वह हैं गौसेवक राकेश केशरवानी। बीते 17 मई को राकेश केशरवानी का जन्मदिन पूरे दिन चर्चा का विषय बना रहा। सुबह से ही सोशल मीडिया पर उन्हें शुभकामनाएं देने वालों का तांता लगा रहा। छत्तीसगढ़ सहित देश के विभिन्न राज्यों, शहरों और गांवों से लोगों ने उन्हें जन्मदिन की बधाई दी। गौभक्त संत-महात्माओं, शंकराचार्यों, जनप्रतिनिधियों, नेताओं, मंत्रियों, अधिकारियों और समाजसेवियों तक ने संदेश भेजकर उनके दीर्घायु और निरंतर सेवा कार्यों की कामना की। दिनभर उनका मोबाइल फोन लगातार शुभकामना संदेशों और कॉल से व्यस्त रहा, जिससे उनकी लोकप्रियता और सामाजिक स्वीकार्यता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
राकेश केशरवानी केवल नाम या प्रसिद्धि तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उनका हर जन्मदिन सेवा के नए संकल्प के साथ जुड़ा होता है। इस बार भी उन्होंने अपने जन्मदिन को उत्सव नहीं बल्कि सेवा दिवस के रूप में मनाया। जन्मदिन के अवसर पर घायल और बेसहारा गौवंशों के लिए लगभग 300 किलो हरी सब्जियां, तरबूज, खीरा और लौकी का विशेष भंडारा कराया गया। इसके साथ ही उन्होंने 11 नग कोटना विभिन्न स्थानों पर रखवाए, ताकि सड़क पर भटक रहे गौवंशों को गर्मी के मौसम में पीने के लिए पानी आसानी से मिल सके। राकेश का मानना है कि सेवा केवल भोजन कराने तक सीमित नहीं, बल्कि जीवों की मूल आवश्यकताओं का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है। यही सोच उन्हें आम लोगों से अलग बनाती है।
पिछले लगभग नौ वर्षों से राकेश केशरवानी लगातार गौ सेवा के क्षेत्र में सक्रिय हैं। उनकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वे केवल दूध देने वाली गायों तक सीमित नहीं रहते, बल्कि सड़क दुर्घटनाओं में घायल, बीमार, अपंग और असहाय गौवंशों की जिम्मेदारी उठाते हैं। कई बार ऐसी गायें जिनकी कमर टूट चुकी होती है, पैर बुरी तरह क्षतिग्रस्त होते हैं या जो दोबारा खड़ी भी नहीं हो सकतीं, उन्हें राकेश अपने गौ सेवा गौधाम में लाकर परिवार के सदस्य की तरह उपचार, देखभाल और संरक्षण देते हैं। यह कार्य जितना भावनात्मक है, उतना ही चुनौतीपूर्ण भी है, लेकिन राकेश ने इसे अपने जीवन का उद्देश्य बना लिया है। यही कारण है कि खरसिया नगर ही नहीं, पूरे छत्तीसगढ़ में जब कहीं कोई घायल गौवंश या अन्य जीव-जंतु तकलीफ में दिखाई देता है, तो लोगों को सबसे पहले राकेश केशरवानी का नाम याद आता है।
राकेश केशरवानी की निस्वार्थ सेवा का प्रभाव अब व्यापक रूप से दिखाई देने लगा है। उनकी प्रेरणा से हजारों युवा गौ सेवा जैसे पवित्र कार्य से जुड़ रहे हैं। खरसिया और आसपास के क्षेत्रों सहित बाराद्वार, शक्ति, बम्हनीडीही से लेकर डभरा ब्लॉक तक 15 से अधिक गौ सेवा टीमें सक्रिय होकर कार्य कर रही हैं। ये टीमें अपने निजी खर्च पर गौवंशों की सुरक्षा, उपचार और संरक्षण में लगी हुई हैं। हालांकि गौसेवकों का कहना है कि सरकारी तंत्र की उदासीनता आज भी गौवंशों के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। सभी टीमें लगातार शासन-प्रशासन से बेहतर व्यवस्था की मांग कर रही हैं ताकि सड़कों पर आवारा और असुरक्षित गौवंश दिखाई न दें। ऐसे समय में राकेश केशरवानी जैसे समर्पित गौसेवक समाज के लिए प्रेरणा बनकर उभरे हैं, जिन्होंने यह साबित कर दिया कि सच्ची सेवा प्रचार नहीं, बल्कि समर्पण और संवेदना से होती है।



























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