छोड़कर सामग्री पर जाएँ

चक्रधर समारोह : नृत्यांजलि समूह ने पेश किया बनारस घराने का कथक

IMG 20260922 WA0012
  • प्रणधा बिस्वाल, प्रियल प्रजापत, आद्या नायक और डिंपल रूपडजा की प्रस्तुति में दिखी बनारस घराने की विशिष्ट शैली

रायगढ़। 41वें चक्रधर समारोह की आठवीं संध्या में नृत्यांजलि समूह की कलाकारों ने बनारस घराने के कथक की मनोहारी प्रस्तुति देकर दर्शकों का मन मोह लिया। समूह में प्रणधा बिस्वाल, प्रियल प्रजापत, आद्या नायक एवं डिंपल रूपडजा शामिल रहीं। कलाकारों ने अपनी सधी हुई प्रस्तुति से बनारस घराने की विशिष्ट शैली को मंच पर जीवंत किया। घुंघरुओं की झंकार, तबले की थाप और भाव-भंगिमाओं के मेल ने पूरे सभागार में एक अलग ही सांगीतिक माहौल रच दिया। कथक की इस शास्त्रीय विधा में जिस सहजता और लालित्य की मांग होती है, वह कलाकारों की प्रस्तुति में साफ झलक रही थी।

लय, ताल और भाव के समन्वय ने बांधा दर्शकों का ध्यान

प्रस्तुति में लय, ताल, पद-संचालन और भावों का सुंदर समन्वय देखने को मिला। पद-संचालन में स्पष्टता और तालों में सटीकता ने दर्शकों का ध्यान शुरुआत से लेकर अंत तक बनाए रखा। कलाकारों की शास्त्रीय नृत्य प्रस्तुति को दर्शकों ने भरपूर तालियों के साथ सराहा। नृत्य की गतियों, भाव-भंगिमाओं और तालबद्ध पद-संचालन के बीच संतुलन ने प्रस्तुति को प्रभावी बनाया और सभागार में मौजूद कला प्रेमियों को कथक की बारीकियों से रूबरू कराया।

संगत कलाकारों ने प्रस्तुति को दिया विशेष आयाम

इस प्रस्तुति को प्रभावशाली बनाने में संगत कलाकारों की भूमिका भी उल्लेखनीय रही। तबला एवं पढ़त पर तबला तालमणि, अंतरराष्ट्रीय तबला वादक एवं छत्तीसगढ़ रत्न से सम्मानित गुरु मोरध्वज वैष्णव ने संगत दी। उनकी तबले की थाप ने कलाकारों के पद-संचालन और लय को मजबूती दी। गायन संगत पर नवीन प्रकाश महंत ने प्रस्तुति में भावपूर्ण रंग जोड़ा, वहीं वायलिन संगत पर राजेंद्र विश्वकर्मा ने अपनी कला से संगीत को और गहराई प्रदान की। संगत और नृत्य के बीच बेहतर तालमेल ने मंचीय प्रस्तुति को और प्रभावी बनाया।

कथक की विविध परंपराओं से समृद्ध हुई समारोह की शाम

नृत्यांजलि समूह की इस प्रस्तुति के माध्यम से दर्शकों को बनारस घराने की कथक परंपरा की झलक देखने को मिली। रायगढ़ घराने की अपनी विशिष्ट पहचान के बीच बनारस घराने की शैली ने समारोह की सांस्कृतिक विविधता को और समृद्ध किया। अलग-अलग कथक परंपराओं की विशिष्टताओं को एक ही मंच पर देखने का अवसर चक्रधर समारोह की आठवीं संध्या को खास बनाता रहा। नृत्यांजलि समूह की प्रस्तुति ने शास्त्रीय नृत्य की समृद्ध परंपरा और उसकी निरंतरता को मंच पर प्रभावी ढंग से सामने रखा।

इस खबर को शेयर करें:

e9073382a8eba25524e580ff55b8f56ea0340bb7ac24cfbd0a28106f19b38d44?s=90&d=mm&r=g

विकास पाण्डेय

न्यूज एडिटर

विकास पाण्डेय ने RIG24 Media Network से Journalism की शुरुआत की। Finance (NBFC) क्षेत्र में 15 वर्षों के अनुभव के बाद उन्होंने BJMC की Professional Degree प्राप्त की। अक्टूबर 2021 से वे ‘केलो प्रवाह’ की Digital Journalism से जुड़े हैं और Web News Portal के संचालन एवं संपादन की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। वे क्षेत्रीय घटनाक्रम, Exclusive Reports, Politics, Finance, Infrastructure, Employment, Development, Crime और जनहित के मुद्दों पर निरंतर लेखन करते हैं।

Share: