रायगढ़। जब मंच पर रोशनी बिखरी और ढोल-नगाड़ों की गूंज के बीच कलाकारों ने कदम बढ़ाए, तो पूरा प्रांगण मानो सौ साल पीछे स्वतंत्रता संग्राम के उस दौर में पहुंच गया, जब देशभक्ति की एक तान ही करोड़ों दिलों को एकजुट कर देती थी। चक्रधर समारोह की 8वीं संध्या में संस्कार कला संघ, जबलपुर द्वारा ‘वंदे मातरम’ की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में विशेष नृत्य नाटिका प्रस्तुत की गई, जिसने उपस्थित दर्शकों को भावविभोर कर दिया। नृत्य, अभिनय, संगीत और संवाद के अद्भुत संगम के माध्यम से कलाकारों ने स्वतंत्रता संग्राम और क्रांतिकारियों के त्याग व बलिदान की गाथा को मंच पर जीवंत कर दिया।
नृत्य नाटिका में बड़े ही प्रभावशाली ढंग से दिखाया गया कि किस तरह ‘वंदे मातरम्’ स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान राष्ट्रीय चेतना और देशभक्ति का स्वर बना और लाखों भारतीयों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया। क्रांतिकारियों द्वारा मातृभूमि की आजादी के लिए किए गए संघर्ष, यातनाएं और बलिदान के मार्मिक प्रसंगों को बेहद संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत किया गया। साथ ही ‘वंदे मातरम’ की रचना, उसके पीछे की प्रेरणा और उसके ऐतिहासिक महत्व को भी नाटिका के माध्यम से सामने रखा गया। कलाकारों के भावपूर्ण अभिनय, समवेत संगीत और सधे हुए नृत्य संयोजन ने उस दौर के संघर्ष और बलिदान की गाथा को इतना सजीव कर दिया कि दर्शक कुछ पल के लिए स्वयं को स्वतंत्रता संग्राम के उस युग में महसूस करने लगे।
प्रस्तुति के जरिए दर्शकों को स्वतंत्रता संग्राम के दौर की भावनाओं से जोड़ने के साथ ही नई पीढ़ी को स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग, बलिदान और देशभक्ति से परिचित कराने का सार्थक संदेश दिया गया। मंच पर उभरे इन दृश्यों ने उपस्थित दर्शकों को भावुक कर दिया और उनमें देशभक्ति की भावना का गहरा संचार किया। कार्यक्रम के दौरान समूचा प्रांगण ‘वंदे मातरम्’ के उद्घोष से गूंज उठा, जिसने माहौल को और भी भावनात्मक व ऊर्जावान बना दिया।नृत्य नाटिका का निर्देशन कमलेश यादव ने किया, जिसमें संस्कार कला संघ, जबलपुर के 18 कलाकारों ने सहभागिता की।
कलाकारों की इस प्रभावशाली प्रस्तुति को दर्शकों ने भरपूर सराहा और तालियों की गड़गड़ाहट से कलाकारों का उत्साहवर्धन किया। समारोह में उपस्थित लोगों ने इस प्रस्तुति को चक्रधर समारोह की अब तक की सबसे यादगार प्रस्तुतियों में से एक बताया।






















