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अपर आयुक्त ने निरस्त किया था नामांतरण, अब फिर से जमीन हासिल करने की तैयारी

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रायगढ़, (केलो प्रवाह)। बैकुंठपुर स्थित विवादित भूमि को लेकर फिर से बवाल मचना शुरू हो गया है। एक पक्ष ने पुन: जमीन को हासिल करने के लिए तहसीलदार के समक्ष नामांतरण आवेदन लगा दिया, जबकि उन्हीं का नामांतरण अपर आयुक्त ने 2023 में ही खारिज कर दिया था। कलेक्टर से हुई लिखित शिकायत के बाद अब जांच की जा रही है। जमीनों का खेल भी अजब-गजब है। तीन साल पहले अपर आयुक्त ने जिस नामांतरण को निरस्त किया था, अब उन्हीं के नाम पर वापस जमीन करने के लिए प्रयास हो रहे हैं। जमीन पर आठ खातेदार हैं लेकिन उनको सूचना भी नहीं दी गई। यह बैकुंठपुर की भूमि खनं 127/2 रकबा 1.4070 हे. और 135/5क रकबा 0.0490 हे. से जुड़ा है।

मिली जानकारी के मुताबिक 2012 में इस जमीन की बिक्री मनीराम सिंघानिया ने रेड कारपेट बिल्डकॉन व अन्य को किया था। इसके विरुद्ध प्रदीप सिंघानिया ने एसडीएम और अपर कलेक्टर न्यायालय में अपील की थी लेकिन उनका आवेदन ही निरस्त कर दिया। इसके बाद अपर आयुक्त के समक्ष प्रकरण प्रस्तुत किया गया। 2023 में अपर आयुक्त ने उस नामांतरण को ही निरस्त कर दिया जिसके बाद जमीन सईदा खान व अन्य के नाम पर दर्ज हुई। इस आदेश के विरुद्ध रेड कारपेट बिल्डकॉन की ओर से राजस्व मंडल में अपील की गई थी। राजस्व मंडल ने 2 जुलाई 2026 को आदेश पारित कर राजीनामा के आधार पर बिना गुण-दोष पर कोई निष्कर्ष देते हुए प्रकरण समाप्त करने का आदेश दिया था। अपर आयुक्त का आदेश अब भी प्रभावशील है। इस भूमि को पुन: हासिल करने के लिए जोड़तोड़ शुरू हो चुका है। कलेक्टर से इसकी शिकायत की गई है।

भूमिस्वामी की ओर से खास मुख्तियार पंकज अग्रवाल का कहना है कि शामिलाती जमीन में सईदा खान का भी नाम दर्ज है जिसकी मृत्यु 2006 में हो चुकी है। लेकिन उनके वारिसानों को सूचना दिए बिना जमीन का नामांतरण करने का प्रयास किया जा रहा है। तहसीलदार के समक्ष आवेदन प्रस्तुत किया गया है। इसके विरुद्ध आपत्ति प्रस्तुत की गई है और फौती नामांतरण का आवेदन भी प्रस्तुत किया गया है। शिकायत के बाद एसडीएम को जांच के लिए आवेदन अग्रेषित किया गया है।

खातेदारों को सूचना दिए बिना ही कार्यवाही
शिकायतकर्ता का कहना है कि खातेदारों व उनके वारिसानों को सूचना दिए बगैर ही कपटपूर्वक नामांतरण करने की मंशा से आवेदन प्रस्तुत किया गया है। उक् 0त भूमि खरीदी दिनांक से पहले से जब्त थी। एसडीएम ने लोकशांति भंग होने की आशंका को देखते हुए जमीन को जब्त किया था, लेकिन उसकी रजिस्ट्री करवा ली गई। जमीन को जब्ती से मुक्ति का आदेश 22 अप्रैल 2026 को किया गया है। इसके बाद अचानक से अब नामांतरण आवेदन सामने आ गया।

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Editorial

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