रायगढ़। पुसौर थाना क्षेत्र के ग्राम जकेला में डिग्री कॉलेज के प्रोफेसर कपूर चंद गुप्ता के अपहरण और डिजिटल लूट के सनसनीखेज मामले को पुलिस ने महज 48 घंटे के भीतर सुलझा लिया है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह के दिशा-निर्देशन में पुसौर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इस खौफनाक वारदात को अंजाम देने वाले चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। पकड़े गए आरोपियों के पास से लूटी गई 99,100 रुपये की नकद राशि, वारदात में इस्तेमाल की गई मोटरसाइकिल, चाकू और मोबाइल फोन भी बरामद कर लिए गए हैं।
पुलिस के अनुसार, घटना 5 अक्टूबर की शाम की है, जब 47 वर्षीय प्रोफेसर कपूर चंद गुप्ता अपनी नियमित इवनिंग वॉक पर निकले थे। थकान महसूस होने पर वे शोभा राइस मिल के पास सड़क किनारे डबरी के समीप आराम करने बैठ गए। इसी दौरान आरोपियों ने सुनियोजित तरीके से उन्हें घेर लिया। आंखों पर पट्टी बांधकर और चाकू की नोक पर डरा-धमकाकर आरोपी उन्हें एक सुनसान जगह ले गए। वहां आरोपियों ने मारपीट कर उनके मोबाइल का पासवर्ड और Google Pay व BHIM UPI का एक्सेस हासिल कर लिया। इसके बाद आरोपियों ने प्रोफेसर को खरसिया की ओर ले जाकर थाना भूपदेवपुर क्षेत्र के ग्राम पंडरीपानी में एक कमरे में बंधक बना दिया।
बंधक बनाकर यूपीआई से ट्रांसफर कराई रकम, परिजनों की सतर्कता से बची जान
बंधक बनाए रखने के दौरान लुटेरों ने यूपीआई और क्यूआर कोड के जरिए प्रोफेसर के खाते से एक परिचित महिला के खाते में लगातार कई ट्रांजेक्शन किए और लिमिट खत्म होने तक पैसे उड़ाए। किसी को शक न हो, इसलिए आरोपियों ने चाकू की नोक पर प्रोफेसर से उनके परिजनों को फोन भी करवाया। लेकिन इसी बातचीत के दौरान परिजनों को किसी अनहोनी का अंदेशा हो गया। सतर्क परिजन खोजबीन करते हुए सीधे पंडरीपानी पहुंच गए। जैसे ही आरोपियों को ग्रामीणों और परिजनों के आने की भनक लगी, वे प्रोफेसर को वहीं छोड़कर भाग खड़े हुए। सूचना मिलते ही थाना प्रभारी निरीक्षक हर्षवर्धन सिंह बैस के नेतृत्व में पुलिस टीम मौके पर पहुंची और पीड़ित को सुरक्षित मुक्त कराया। पुसौर थाने में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 140(3), 309(6), 142 और 351(3) के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई।
तीन दिन पहले बनाई थी साजिश, सारंगढ़ से खुला पहला सुराग
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अनिल सोनी के मार्गदर्शन में गठित पुलिस टीम ने सारंगढ़ क्षेत्र से पहले आरोपी सुनील सारथी को 24 घंटे के भीतर हिरासत में लिया। पूछताछ के आधार पर पुलिस ने मुख्य आरोपी राजेंद्र कुमार महंत उर्फ प्रदीप महंत, उसके भाई नरेंद्र उर्फ नंदू महंत और दिनेश सारथी को भी घेराबंदी कर दबोच लिया। पूछताछ में सामने आया कि आरोपियों ने 3 अक्टूबर को सुनील सारथी के घर पर अपहरण की साजिश रची थी। उन्होंने सीधे-साधे नौकरीपेशा प्रोफेसर को आसान निशाना मानकर वारदात की योजना बनाई थी। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार मुख्य आरोपी राजेंद्र उर्फ प्रदीप महंत का पूर्व आपराधिक इतिहास रहा है और वह पूर्व में हत्या के मामले में भी जेल जा चुका है। पुलिस ने आरोपी सुनील सारथी को न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है, जबकि अन्य तीन आरोपियों को पुलिस रिमांड पर लेने के लिए न्यायालय में पेश किया जा रहा है।

रायगढ़ एसएसपी ने इस त्वरित कार्रवाई की सराहना करते हुए स्पष्ट संदेश दिया है कि अपहरण और लूट जैसे गंभीर अपराधों में संलिप्त किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा। पुलिस ने डिजिटल साक्ष्यों और हथियारों को जब्त कर लिया है और चारों किडनैपर अब पुलिस की गिरफ्त में हैं।

























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