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खरसिया के कालू हत्याकांड में आरोपियों को पांच साल का कठोर कारावास

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  • हाईकोर्ट ने दिया आदेश, गिरफ्तारी की भनक लगते ही फरार हुए आरोपी, हत्या की धारा को हटाकर गैर इरादतन हत्या में बदला

रायगढ़। वर्ष 2013 में घटित खरसिया के बहुचर्चित कालू हत्याकांड में हाईकोर्ट ने आरोपियों को पांच साल के कठोर कारावास से दंडित किया है। कई साल तक चली सुनवाई के बाद कोर्ट ने माना कि यह जानबूझकर सुनियोजित तरीके से की गई हत्या नहीं है, बल्कि आवेश में हुई घटना है। इसलिए धारा 302 को हटाकर धारा 304 भाग दो के तहत सजा सुनाई गई है। पुलिस द्वारा बनाए गए आरोपियों में से तीन को संदेह का लाभ भी दिया गया है।घटना 24 अक्टूबर 2013 की है। खरसिया में विक्की अग्रवाल के पुत्र की जन्मदिन की पार्टी कन्या भवन में थी। पार्टी में आरोपी रॉकी अग्रवाल, महावीर अग्रवाल और मृतक प्रमोद अग्रवाल उर्फ कालू भी मौजूद थे। अचानक से किसी बात पर दोनों की कालू से बहस हो गई। दोनों आरोपियों ने अपने साथियों को मौके पर बुला लिया।

रॉकी पर आरोप था कि उसने कालू के सिर पर पत्थर से वार किया गया। महावीर ने लोहे की रॉड से हमला किया। लहुलूहान हालात में कालू को पास के निजी अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। पवन अग्रवाल की शिकायत पर पुलिस ने आईपीसी की धारा 147, 302 के तहत अपराध दर्ज किया था। मौके से लोहे की रॉड और पत्थर बरामद किए गए थे। कई प्रत्यक्षदर्शियों ने घटना की गवाही दी। पुलिस ने रॉकी अग्रवाल, महावीर अग्रवाल, नीतिश अग्रवाल, मुकेश अग्रवाल, संजय अग्रवाल, सुशील अग्रवाल, श्रीकिशन अग्रवाल, कन्हैया वैष्णव (वर्तमान में मृत), शनि सिदार, नीरज यादव, भगदान चौहान को गिरफ्तार कर चालान पेश किया था। मामला सेशंस जज रायगढ़ की अदालत में चला। 

आवेग में आकर हुई घटना

सेशंस कोर्ट रायगढ़ ने आरोपियों के खिलाफ साक्ष्यों व बयानों के आधार पर राहत दी। इसके विरुद्ध हाईकोर्ट में अपील की गई। आरोपीगण वर्तमान में जमानत पर हैं। एक आरोपी कन्हैया की मृत्यु हो चुकी है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और न्यायाधीश बिभु दत्ता गुरु ने पाया कि हत्या सुनियोजित तरीके से नहीं बल्कि उस क्षण के आवेग में आकर की गई। इसलिए धारा 302 के स्थान पर धारा 304 भाग दो का आरोपी माना। संजय अग्रवाल, मुकेश अग्रवाल और सुनील अग्रवाल को प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों के आधार पर निर्दोष माना। अन्य सात आरोपियों को पांच-पांच साल के कठोर कारावास और 1000 रुपए के अर्थदंड से दंडित किया गया। 

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