रायगढ़: शक्कर की कीमतों में उतार-चढ़ाव बेहद तेजी से हो रहा है। दो-तीन दिन में रेट बदल जा रहे हैं। ऐसा होने के पीछे सप्लाई कम होना नहीं, बल्कि जमाखोरी है। इस पर नियंत्रण के लिए सरकार ने थोक डीलरों के पास एक बार में 2000 क्विंटल से अधिक स्टॉक रखने पर पाबंदी लगा दी है। अभी थोक में शक्कर करीब 55 रुपए प्रति किलो मिल रही है, जबकि दुकानों में 60-65 रुपए में बिक्री हो रही है। गन्ने की कमी की वजह से शुगर मिलों को कच्चा माल कम मिला। इसका नतीजा यह है कि त्योहारी सीजन में शक्कर की कमी हो गई। थोक कारोबारियों या बड़े डिस्ट्रीब्यूटर्स ने इसे अवसर में बदलने का काम किया है। किसी भी वस्तु की कीमत जब बढ़ती है तो कुछ दिनों तक उसी रेट पर अटकी रहती है। हर दो-तीन दिनों में इसकी कीमतें ऊपर-नीचे नहीं होती। लेकिन शक्कर ने बाजार का पूरा सिद्धांत बदल दिया है। बाजार में बहुत जल्दी शक्कर की कीमतें उछाल मार रही हैं। उपभोक्ताओं को पता भी नहीं चल रहा है कि कैसे उनको मोहरा बनाकर करोड़ों का खेल हो रहा है। रायगढ़ में दस दिन पहले 2700 रुपए प्रति बोरी थोक रेट था। एक बोरी 50 किलो की होती है। इसके पहले रेट 3600 रुपए तक भी पहुंचा था। कुछ दिनों तक 2700 रुपए रहने के बाद बीते दो दिनों से 2750 रुपए प्रति बोरी हो चुका है। मतलब प्रति किलो थोक रेट 54 रुपए से 55 रुपए हो गया। खुदरा व्यापारी या किराना दुकानों में चीनी 60 रुपए से 65 रुपए के बीच बिक रही है। अगले दो दिनों में रेट कहां जाएगा, कोई नहीं जानता। इसलिए सरकार ने अब एक नया आदेश निकाला है। इसके तहत कोई भी थोक कारोबारी एक बार में 2000 क्विंटल से अधिक शक्कर भंडारित नहीं कर सकेगा।
15 सितंबर से लागू होगा नया नियम
बाजार में चीनी आपूर्ति का पूरा सिस्टम ही बिगड़ चुका है। कौन कहां जमाखोरी कर रहा है, पता नहीं चल रहा है। छग सरकार खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग ने गुरुवार को आदेश जारी किया है। इसके तहत कोई भी डीलर प्राप्त शक्कर स्टॉक को 30 दिन से अधिक नहीं रख सकेगा। साथ ही एक समय पर किसी भी स्थान पर 2000 क्विंटल से अधिक स्टॉक नहीं रख सकेगा। पहले यह लिमिट 4000 क्विंटल की थी। व्यापारियों को पोर्टल पर जानकारी अपलोड करनी होगी। यह नियम 15 सितंबर से लागू होगा। मतलब पहले 4000 क्विंटल लिमिट करने पर भी शक्कर की कीमत नियंत्रण में नहीं आई।






















