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सक्ती के ग्राम जोंगरा हत्याकांड का खुलासा: एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर में मियां-बीवी ने दी 4 लाख की सुपारी, घर में घुसकर पूर्णिमा चौहान की गोली मारकर हत्या, झारखंड और महाराष्ट्र से शूटरों समेत 9 आरोपी गिरफ्तार! पढ़िए पूरी Crime Story

ग्राम जोंगरा में हुए बहुचर्चित हत्याकांड का खुलासा

सक्ती। छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले के बहुचर्चित पूर्णिमा चौहान उर्फ पूनम हत्याकांड की गुत्थी को पुलिस ने महज चार दिनों में सुलझाने का दावा किया है। 26 जून को ग्राम जोंगरा में दिनदहाड़े घर के भीतर घुसकर हुई हत्या ने पूरे जिले को झकझोर दिया था। शुरुआत में यह वारदात अज्ञात बदमाशों द्वारा अंजाम दिया गया अंधा कत्ल प्रतीत हो रही थी, लेकिन जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, वैसे-वैसे इसकी परतें खुलती चली गईं। तकनीकी साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और लगातार पूछताछ के आधार पर पुलिस जिस निष्कर्ष तक पहुंची, उसके मुताबिक यह हत्या किसी पुरानी रंजिश या लूटपाट का नतीजा नहीं थी, बल्कि प्रेम संबंध, वैवाहिक विवाद और चार लाख रुपये की सुपारी देकर रची गई सुनियोजित साजिश थी। इस मामले में हत्या की साजिश रचने वाले पति-पत्नी समेत कुल नौ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। आरोपियों के कब्जे से हत्या में प्रयुक्त पिस्तौल, चार जिंदा कारतूस, दो मोटरसाइकिल, सात मोबाइल फोन, बैंक पासबुक और 71 हजार 500 रुपये नकद बरामद किए गए हैं।

नकाबपोश बनकर पहुंचे, नाम पूछा और बरसा दीं तीन गोलियां

26 जून 2026 की सुबह करीब 11 बजे ग्राम जोंगरा में सब कुछ सामान्य था। इसी दौरान बिना नंबर की मोटरसाइकिल पर सवार दो युवक गांव पहुंचे। दोनों ने अपने चेहरे सफेद गमछे से ढंक रखे थे ताकि कोई उनकी पहचान न कर सके। वे सीधे पूर्णिमा चौहान के घर पहुंचे और सामान्य व्यक्ति की तरह भीतर दाखिल हो गए। घर के अंदर पहुंचते ही एक युवक ने परिजनों से पूछा, “पूर्णिमा कहां है?” जैसे ही पूर्णिमा सामने आई, आरोपी ने बेहद करीब से उस पर पिस्तौल तान दी और ताबड़तोड़ तीन गोलियां दाग दीं। गोलियां उसके सिर सहित शरीर के अन्य हिस्सों में लगीं। अचानक हुई फायरिंग से घर में अफरा-तफरी मच गई। वारदात को अंजाम देने के बाद दोनों आरोपी उसी मोटरसाइकिल से फरार हो गए। गोलियों की आवाज सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे। परिजन गंभीर रूप से घायल पूर्णिमा को तत्काल अस्पताल लेकर गए, लेकिन चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। दिनदहाड़े हुई इस हत्या से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया। वहां से पिस्तौल के तीन खाली खोखे बरामद किए गए। इसके बाद सक्ती पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1), 61(2), 3(5) तथा आर्म्स एक्ट की धारा 25 और 27 के तहत अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी।

चार दिन तक चली पड़ताल, तकनीकी साक्ष्यों ने खोला राज

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस महानिरीक्षक बिलासपुर रेंज रामगोपाल गर्ग के निर्देशन तथा पुलिस अधीक्षक प्रफुल्ल कुमार ठाकुर के मार्गदर्शन में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पंकज पटेल और एसडीओपी डॉ. भुवनेश्वरी पैंकरा के पर्यवेक्षण में विशेष जांच दल गठित किया गया। नकाबपोश हमलावरों की पहचान करना पुलिस के लिए सबसे बड़ी चुनौती थी। जांच टीम ने शुरुआत से ही तकनीकी साक्ष्यों पर फोकस किया। मृतका के परिजनों, परिचितों और संदेह के दायरे में आए लोगों से पूछताछ की गई। मोबाइल टावर डंप, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) और सीसीटीवी फुटेज का विश्लेषण किया गया। जांच आगे बढ़ने के साथ पुलिस की नजर मृतका के करीबी संबंधों की ओर केंद्रित होती चली गई और यहीं से पूरे मामले की दिशा बदल गई।

आयुर्वेदिक दवाइयों के कारोबार से शुरू हुआ प्रेम संबंध

विवेचना में सामने आया कि पूर्णिमा चौहान रायगढ़ जिले के देल्लारी निवासी मुरलीशंकर चौहान के साथ आयुर्वेदिक दवाइयों के प्रचार और बिक्री का काम करती थी। साथ काम करते-करते दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और यह रिश्ता प्रेम संबंध में बदल गया। मुरलीशंकर पहले से विवाहित था। उसकी पत्नी चम्पा चौहान को इस संबंध की जानकारी होने पर परिवार में तनाव बढ़ने लगा। चम्पा चौहान ने कई बार दोनों को समझाने का प्रयास किया। बाद में मुरलीशंकर ने दूरी बनाने की कोशिश की, लेकिन पूर्णिमा कथित तौर पर उस पर शादी का दबाव बनाती रही। इसी तनाव के चलते पति-पत्नी के बीच विवाद बढ़ता गया और मामला गंभीर रूप लेने लगा।

बदलते बयानों ने खोला राज, पहुंची जांच साजिश तक

पूछताछ के दौरान चम्पा चौहान ने शुरुआत में कई बार अपने बयान बदले, लेकिन तकनीकी साक्ष्यों के सामने उसकी बातों में विरोधाभास सामने आने लगा। इसके बाद जांच निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई। विवेचना में सामने आया कि चम्पा चौहान और उसके पति मुरलीशंकर चौहान ने पूर्णिमा को रास्ते से हटाने की साजिश रची। इसके लिए झारखंड के राजेंद्र महंत से संपर्क किया गया और चार लाख रुपये में सुपारी तय हुई। पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि हत्या के बाद दो लाख रुपये एडवांस दिए गए थे। इसी के बाद यह स्पष्ट हो गया कि यह एक सुनियोजित सुपारी किलिंग थी।

मोबाइल लोकेशन से तीन राज्यों में फैली जांच

आरोपियों की तलाश में मोबाइल लोकेशन और सीडीआर की मदद ली गई। राजेंद्र महंत झारखंड के जमशेदपुर में और अन्य आरोपी महाराष्ट्र के पुणे में पाए गए। इसके बाद पुलिस की टीमें दोनों राज्यों में रवाना की गईं और स्थानीय पुलिस की मदद से घेराबंदी कर आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में आरोपियों ने पूरी साजिश स्वीकार कर ली, जिसके बाद बाकी आरोपियों की भूमिका भी स्पष्ट होती चली गई। चार लाख रुपये की सुपारी मिलने के बाद राजेंद्र महंत ने अपने साथियों गौरीशंकर सिदार, सुनील महंत, राकेश महंत, वेदप्रकाश महंत उर्फ सोनू, सुमित गबेल और चंद्रशेखर महंत के साथ मिलकर पूरी योजना बनाई। सभी ने तय किया कि वारदात के बाद रकम आपस में बांटी जाएगी।

घर के भीतर घुसा शूटर, बाहर इंतजार करता रहा साथी

योजना के मुताबिक 26 जून को सुनील महंत और गौरीशंकर सिदार ग्राम जोंगरा पहुंचे। गौरीशंकर घर के भीतर गया और पूर्णिमा पर तीन गोलियां दाग दीं। वारदात के बाद दोनों आरोपी फरार हो गए। सुमित गबेल ने मोटरसाइकिल उपलब्ध कराई, जबकि राकेश महंत ने फरारी में मदद की। इसके बाद चम्पा चौहान ने तय राशि में से दो लाख रुपये आरोपियों को सौंपे, जिसे बाद में आपस में बांट लिया गया। पुलिस ने छत्तीसगढ़, झारखंड और महाराष्ट्र में कार्रवाई करते हुए सभी नौ आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में सभी ने अपनी भूमिका स्वीकार की। पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त पिस्तौल, चार जिंदा कारतूस, दो मोटरसाइकिल, सात मोबाइल फोन, बैंक पासबुक और 71 हजार 500 रुपये नकद बरामद किए हैं। घटनास्थल से तीन खाली खोखे भी मिले हैं।

नौ आरोपी गिरफ्तार, जांच पूरी साजिश तक पहुंची

इस मामले में चम्पा चौहान, मुरलीशंकर चौहान सहित सभी नौ आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है और उन्हें न्यायालय में पेश किया जा रहा है। चार दिन पहले तक अंधे कत्ल के रूप में देखा जा रहा यह मामला अंततः प्रेम प्रसंग, वैवाहिक विवाद और सुपारी किलिंग की सुनियोजित साजिश के रूप में सामने आया, जिसने पूरे इलाके को चौंका दिया।

चार दिन तक चली पड़ताल, तकनीकी साक्ष्यों ने खोला राज

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस महानिरीक्षक बिलासपुर रेंज रामगोपाल गर्ग के निर्देशन तथा पुलिस अधीक्षक प्रफुल्ल कुमार ठाकुर के मार्गदर्शन में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पंकज पटेल और एसडीओपी डॉ. भुवनेश्वरी पैंकरा के पर्यवेक्षण में विशेष जांच दल गठित किया गया। नकाबपोश हमलावरों की पहचान करना पुलिस के लिए सबसे बड़ी चुनौती थी। इस पूरी कार्रवाई में निरीक्षक लखन लाल पटेल, कमल किशोर महतो, अमित सिंह, उप निरीक्षक सी.पी. कंवर, भूपेंद्र चंद्रा, अनवर अली, जी.एस. राजपूत, जे.के. वर्मा, नीलमणि कुसुम, चित्रांगद चंद्रा, सुरेश पाठक सहित सक्ती थाना की पूरी टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। पुलिस का कहना है कि टीमवर्क, तकनीकी जांच और लगातार की गई कार्रवाई के कारण चार दिनों के भीतर इस बहुचर्चित हत्याकांड का खुलासा संभव हो सका।

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