रामपुर। कोरबा जिले के करतला थाना क्षेत्र के ग्राम पंचायत रामपुर में बुधवार दोपहर आकाशीय बिजली गिरने से एक दुखद घटना सामने आई, जिसमें छह साइबेरियन पक्षियों की मौत हो गई। घटना के बाद क्षेत्र में भय और चिंता का माहौल है तथा ग्रामीणों ने गांव में स्थापित तड़ित चालकों (लाइटनिंग अरेस्टर) की कार्यप्रणाली और प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, दोपहर लगभग 3:45 बजे मौसम अचानक खराब हो गया और तेज गरज-चमक के साथ वर्षा प्रारंभ हो गई। इसी दौरान गांव के दशहरा चौक के समीप स्थित एक विशाल इमली के पेड़ पर आकाशीय बिजली का जोरदार प्रहार हुआ। उस समय पेड़ पर बड़ी संख्या में पक्षी बैठे हुए थे, जिनमें से छह साइबेरियन पक्षी बिजली की चपेट में आकर मौके पर ही मृत हो गए।
घटना के तुरंत बाद स्थानीय ग्रामीण मौके पर पहुंचे और मृत पक्षियों को देखकर स्तब्ध रह गए। ग्रामीणों का कहना है कि यह घटना केवल पक्षियों तक सीमित रही, लेकिन यदि उसी समय वहां लोग मौजूद होते तो जनहानि की भी आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता था। इस कारण पूरे गांव में आकाशीय बिजली को लेकर दहशत का माहौल बना हुआ है। घटना ने गांव में स्थापित तड़ित चालकों की उपयोगिता और उनकी तकनीकी स्थिति को लेकर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में पहले से तड़ित चालक लगाए गए हैं, जिनका उद्देश्य आकाशीय बिजली से जन-धन और पशु-पक्षियों की सुरक्षा करना है। बावजूद इसके बिजली सीधे इमली के पेड़ पर गिरी और छह पक्षियों की जान चली गई।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, संबंधित विभागों और पंचायत प्रतिनिधियों से मांग की है कि गांव में लगे सभी तड़ित चालकों का तत्काल तकनीकी परीक्षण कराया जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि वे वर्तमान में सक्रिय और कार्यशील हैं या नहीं। ग्रामीणों का मानना है कि यदि उपकरण निष्क्रिय या खराब पाए जाते हैं, तो उन्हें तत्काल बदलकर आधुनिक और उच्च क्षमता वाले तड़ित चालक स्थापित किए जाने चाहिए। स्थानीय लोगों ने यह भी सुझाव दिया है कि स्कूल पारा, दशहरा चौक तथा आसपास के संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त उच्च क्षमता वाले तड़ित चालक लगाए जाएं, जिससे लगभग दो किलोमीटर के दायरे में रहने वाले लोगों, मवेशियों और पक्षियों को बेहतर सुरक्षा प्रदान की जा सके। ग्रामीणों के अनुसार मानसून के दौरान क्षेत्र में अक्सर आकाशीय बिजली गिरने की घटनाएं सामने आती रहती हैं, ऐसे में सुरक्षा उपायों को और मजबूत बनाना समय की आवश्यकता है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि इस घटना को गंभीरता से लेते हुए विशेषज्ञों की टीम भेजकर पूरे क्षेत्र का निरीक्षण कराया जाए तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि मानसून अभी प्रारंभिक चरण में है और आने वाले दिनों में मौसम की गतिविधियां और तेज हो सकती हैं। ऐसे में समय रहते प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है, ताकि ग्रामीणों को आकाशीय बिजली के भय से राहत मिल सके और जन-जीवन के साथ-साथ वन्यजीव एवं पक्षियों की भी सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। यह घटना एक बार फिर प्राकृतिक आपदाओं से बचाव के लिए आधुनिक सुरक्षा व्यवस्थाओं की नियमित निगरानी और तकनीकी परीक्षण की आवश्यकता को उजागर करती है।





















