रायपुर। छत्तीसगढ़ में करीब तीन दशक पुराने बहुचर्चित ‘गृह निर्माण ऋण गबन’ मामले में एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने एक और बड़ी मछली को जाल में फंसाया है। शनिवार, 4 अप्रैल 2026 को एसीबी की टीम ने ‘सहकारी आवास संघ मर्यादित भोपाल’ के तत्कालीन प्रबंधक प्रदीप कुमार निखरा को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी प्रबंधक पर पद का दुरुपयोग करते हुए कूट रचित दस्तावेजों के जरिए करोड़ों की सरकारी राशि का बंदरबांट करने और आपराधिक षड्यंत्र रचने का गंभीर आरोप है। इस गिरफ्तारी के साथ ही 1.86 करोड़ रुपए के इस पुराने घोटाले में संलिप्त चेहरों पर शिकंजा और कस गया है।
कागजों पर तान दिए 186 मकान
पूरा मामला साल 1995 से 1998 के बीच का है। जांच में खुलासा हुआ कि ‘आधुनिक गृह निर्माण सहकारी समिति मर्यादित रायपुर’ के पदाधिकारियों ने सरकारी योजना को चूना लगाने की साजिश रची। जरूरतमंदों के नाम पर 1-1 लाख रुपए के हिसाब से कुल 1.86 करोड़ रुपए का कर्ज स्वीकृत कराया गया। कागजों में तो 186 सदस्यों को ऋण मिलना दिखाया गया, लेकिन जब एसीबी ने मौके पर जाकर भौतिक सत्यापन किया, तो वहां न कोई मकान मिला और न ही वे सदस्य। जांच में यह साफ हुआ कि तत्कालीन प्रबंधक प्रदीप कुमार निखरा ने अध्यक्ष और आवास पर्यवेक्षक के साथ मिलकर कूटरचित (फर्जी) दस्तावेज तैयार किए। फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर लोन की फाइलें पास की गईं और सरकारी खजाने से निकली राशि का आरोपियों ने आपस में बंदरबांट कर लिया।
7 अप्रैल तक पुलिस रिमांड पर आरोपी
एसीबी ने इस मामले में आरोपी को विशेष न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे 7 अप्रैल 2026 तक के लिए पुलिस रिमांड पर सौंप दिया गया है। गौरतलब है कि इसी प्रकरण में बीते 18 मार्च को आरोपी थावरदास माधवानी और बसंत कुमार साहू की गिरफ्तारी भी हो चुकी है। एसीबी ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी), 467, 468, 471 (दस्तावेजों में हेराफेरी), 120बी (आपराधिक षड्यंत्र) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। ब्यूरो के सूत्रों का कहना है कि पुराने रिकॉर्ड्स की पड़ताल जारी है और इस सिंडिकेट में शामिल कुछ अन्य चेहरे भी बेनकाब हो सकते हैं।





















