रायगढ़। एक राष्ट्र एक चुनाव के प्रस्ताव सहित दो एजेंडों को लेकर नगर निगम में विशेष सम्मेलन बुलवाया गया था। दोनों ही मुद्दों पर कांग्रेस ने भले ही सत्ता पक्ष को घेरा। हालांकि वन नेशन वन इलेक्शन के प्रस्ताव पर कांंग्रेस ने इसे व्यवहारिक नहीं होना बताते हुए आपत्ति दर्ज की परंतु बहुमत के आधार पर स्वीकृति प्रदान कर दी गई। वहीं गोवर्धनपुर सडक़ निर्माण के लिए हुए टेण्डर की दर स्वीकृति के प्रस्ताव पर काफी बहस हुई परंतु जनहित के मुद्दे को देखते हुए सदन में निविदा दर को स्वीकृति प्रदान कर दी। विषय सूची में लाये गये दोनों ही प्रस्तावों को कांग्रेस ने गलत ठहराते हुए शहर सरकार को जमकर घेरा। वहीं ग्रीष्म काल में पेयजल की समस्या तथा बरसात के पूर्व नालों की सफाई जैसे जनहित के मुद्दों के बजाए चुनाव को लेकर विशेष सम्मेलन बुलाये जाने को लेकर भी विपक्ष ने सवाल उठाया।
एक राष्ट्र एक चुनाव के प्रस्ताव को नगर निगम से पारित करवाने के लिए मंगलवार को विशेष सम्मेलन बुलवाया गया था। सम्मेलन में कुल दो एजेंडे रखे गये थे, जिसमें शालिनी स्कूल से गोवर्धनपुर पुल तक बीटी सडक़ निर्माण के लिए हुए 4 करोड़ 12 लाख 68 हजार रूपए के टेण्डर में आई निविदा दर की स्वीकृति का प्रस्ताव रखा गया था। बैठक के शुरू होते ही नेता प्रतिपक्ष सलीम नियारिया ने एजेंडे पर सवाल उठाते हुए कहा कि गर्मी का मौसम है कई वार्डों में ंपानी की समस्या है। इस मुद्दे पर शहर सरकार बैठक नहीं कर रही है। क्या वन नेशन वन इलेक्शन पानी से ज्यादा महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि पूर्व में बजट सम्मेलन के दौरान टैक्स व यूजर्स चार्ज को लेकर उन्होंने सुझाव दिये थे, उस पर भी अलग से बैठक कर चर्चा करने की बात कही गई थी परंतु आज पर्यंत कोई बात नहीं हो पाई है जबकि टैक्स जमा करने के लिए अब केवल एक दिन मात्र शेष बच गया है। इसके अलावा नालों की सफाई अब तक शुरू नहीं हो पाई है। ऐसे जनहित के मुद्दों पर बैठक होनी चाहिए। इस पर सभापति डिग्रीलाल साहू ने कहा कि इन मुद्दों के लिए कार्य योजना बनाई गई है, जिसके लिए अलग से बैठक बुलवाई जाएगी। इस पर सलीम ने कहा कि बैठक का दिन तय कर दें उसके बाद सम्मेलन के एजेंडे पर चर्चा हो। वहीं कांग्रेस पार्षद ने भी कहा कि पानी की समस्या है और टैंकरों की भी कमी है इस पर चर्चा होनी चाहिए। वहीं महापौर जीवर्धन चौहान ने कहा कि पानी की समस्या पर अलग से बैठक बुलवाई जाएगी फिलहाल आज के एजेंडे पर बात करें। वहीं विशेष सम्मेलन के पहले प्रस्ताव एक राष्ट्र एक चुनाव को पारित करने के लिए सदन में रखा गया जिस पर नेता प्रतिपक्ष सलीम नियारिया व पूर्व सभापति जयंत ठेठवार ने समवेत स्वर में कहा कि प्रथम तो प्रस्ताव ही गलत है, चूंकि पूर्व में विधान सभा में इस प्रस्ताव को पारित किया जा चुका है। यदि बड़े सदन में प्रस्ताव पारित हो गया है तो नगर निगम में लाने का कोई औचित्य नहींं है। वहीं कांग्रेस की ओर से सभी पार्षदों ने इस प्रस्ताव को अव्यवहारिक बताते हुए विरोध जताया।
कंग्रेस पार्षदों ने सभापति को अपनी लिखित आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा कि वन नेशन वन इलेक्शन का प्रस्ताव सैद्धांतिक कल्पना मात्र है, जिसका कोई भी व्यवहारिक रूप से अस्तित्व नहीं हो सकता है खासकर हमारे देश में तो बिल्कुल भी नहीं। पूर्व में भी इस विषय को अमल में लाने का प्रयास हुआ, लेकिन सफलता हासिल नहीं हो पाई। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद सन् 1952 में पहला चुनाव हुआ तब सयुंक्त रूप से केन्द्र व राज्यों के चुनाव कराये गये थे और इस परंपरा को कायम रखने का विचार था, लेकिन 1967 तक ही यह व्यवस्था कायम रही और उसके बाद से अलग-अलग चुनाव का सिलसिला शुरू हुआ जो आज भी चल रहा है। इस प्रस्ताव के पक्षधर जहां यह कहते हैं कि इससे चुनावी खर्च कम होगा तो वहीं स्वयं निर्वाचन आयोग का कहना है कि और देशों के मुकाबले हमारे देश में चुनाव में सबसे कम खर्च होता है। इसलिए लागत कम आने वाला दावा स्वत: ही खारिज हो जाता है। इसके अलावा भारत देश के अलग-अलग राज्यों में भिन्न-भिन्न भौगोलिक व सांंस्कृतिक परिस्थितियां है तथा कुछ राज्यों कों छोड़ कर साक्षरता का प्रतिशत भी काफी कम है। ऐसे में मतदाताओं को एक साथ चार वोट डालने होंगे तथा ग्रामीण क्षेत्र के मतदाताओंं को 6 वोट डालने पड़ेंगे। इससे पहले देश को पूर्ण साक्षर बनाने की आवश्यकता है। इन सभी तथ्यों के साथ कांग्रेस ने अपनी आपत्ति दर्ज की। हालांकि कांगेे्रस की आपत्ति दर्ज करते हुए बहुमत के आधार पर प्रस्ताव को पारित कर दिया गया।
गोवर्धनपुर पुल तक सड़क निर्माण पर हुई तिखी बहस
एजेंडा क्रमांक 2 में शालिनी स्कूल से गोवर्धनपुर पुल तक बीटी सडक़ निर्माण के लिए हुए 4 करोड़ 12 लाख 68 हजार रूपए के टेण्डर में आई निविदा दर की स्वीकृति का प्रस्ताव रखा गया था। इसके साथ ही एजेंडे में उक्त सडक़ निर्माण के लिए तहसीलदार से सीमांकन उपरांत शासकीय भूमि पर निर्माण कराये जाने की स्वीकृति पर विचार तथा शेष कार्य के स्थल परिवर्तन किये जाने के लिए स्थल चयन का प्रस्ताव था। इस प्रस्ताव पर चर्चा शुरू करते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ पार्षद जयंंत ठेठवार ने सवाल उठाते हुए कहा कि एक ही प्रस्ताव में दर स्वीकृति व शासकीय जमीन पर निर्माण तथा निजी भूमि आने के कारण स्थल परिवर्तन तीनों अलग अलग विषय है। परिषद को गलत जानकारी दे कर गुमराह करने का अधिकारी प्रयास कर रहे हैं। चूंकि इस मार्ग पर गोवर्धनपुर के अलावा ग्रीन सिटी, साकेत कुंज, एश्वर्यम कालोनी सहित अन्य कालोनियां भी तथा वहां के बाशिंदे लंबे समय से सडक़ निर्माण की मांग कर रहे है। हमारा प्रस्ताव का विरोध नहीं है लेकिन सही जानकारी के साथ प्रस्ताव लाया जाए ताकि एक साथ सभी स्वीकृतियां हो जाए और जल्द कार्य प्रारंभ करवाया जा सके। इस पर नगर निगम आयुक्त ने जानकारी देते हुए बताया कि शालिनी स्कूल तिराहा से गोवर्धनपुर पुल तक 11 सौ मीटर सडक़ निर्माण का पूर्व में प्रस्ताव बनाया गया था। इसका सर्वे कराया गया जिसमें 350 मीटर निजी भूमि आने के कारण लगभग 670 मीटर की सडक़ बनाया जाना प्रस्तावित है जिसकी अनुमानित लागत 4 करोड़ 12 लाख 68 हजार रूपए है। इस पर जयंत ने आपत्ति जताते हुए कहा कि प्रस्ताव में निविदा दर की स्वीकृति, स्थल परिवर्तन की स्वीकृति एक साथ करा ली जा रही है तो इसमें और बचा ही क्या है क्यों न साथ ही साथ ठेकेदार को भुगतान की भी स्वीकृति करा दी जाए उन्होंने कहा कि इस तरह आधी अधूरी जानकारी के साथ प्रस्ताव लाकर परिषद को गुमराह करेंगे तो इसका विरोध होगा ही। वहीं इस प्रस्ताव का भविष्य में दुरूपयोग भी होगा। जयंत ने कहा कि वर्तमान में वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने शहर के चारों ओर फोर लेन सडक़ के प्रस्ताव की शासन से स्वीकृति कराई है जिसमें निजी भूमि आने पर मुआवजा दिये जाने का प्रावधान भी है। यह एक अच्छी बात है और बिना बाधा के कार्य भी पुरा होगा। इसी प्रकार का प्रस्ताव नगर निगम को भी बनाना चाहिए था जिसमें निजी भूमि का अधिग्रहण करते हुए शासकीय दर पर मुआवजा देने के साथ ही सडक़ निर्माण की स्वीकृति के लिए शासन को भेजा जाना चाहिए था। इसके अलावा इस बात को लेकर भी सवाल उठे कि प्रस्ताव में सडक़ की चौड़ाई कितनी होगी ? इस मार्ग पर भारी वाहनों की भी काफी आवाजाही है लिहाजा सडक़ की क्षमता क्या होगी? कोई भी बात स्पष्ट नहीं है जिससे भविष्य में कालोानाईजरों को अनावश्यक लाभ दिलाने का प्रस्ताव तैयार किया जाना लग रहा है। वहीं जनता के हित से जुड़ा मुद्दा होने के कारण निविदा दर को सर्वसम्मति से स्वीकृति प्रदान करते हुए प्रस्ताव में चर्चा के दौरान आये सुझावों को जोड़ने का निर्णय लिया गया।
विशेष सम्मेलन बुलाये जाने पर हरि ने जताई आपत्ति
भाजपा पार्षद हरि सराफ ने शहर सरकार द्वारा दो एजेंडे के लिए विशेष सम्मेलन बुलवाये जाने पर आपत्ति जताते हुए कहा कि गर्मी के मौसम को देखते हुए पानी की समस्या व नालों की सफाई इत्यादि जनहित के मुद्दों को लेकर किसी प्रकार की बैठक नही की जा रही है। वहीं इन दो मुद्दों के लिए विशेष सम्मेलन बुलवाये जाने के बजाए सामान्य सभा की बैठक करवाई जानी चाहिए थी, जिसमें हम पार्षद भी सवाल पूछ सकते थे। सामान्य सभा की बैठक न बुलवा कर जनप्रतिनिधियों के अधिकार का हनन किया गया है।























