रायगढ़। जिले में चक्रवात ‘अर्नब’ के प्रभाव से फसलों को पहुंचे नुकसान का जायजा लेने के लिए कृषि विभाग और बीमा कंपनी के अधिकारियों ने प्रभावित क्षेत्रों का संयुक्त निरीक्षण किया। अधिकारियों के दल ने ग्राम धनागर और बनसिया का दौरा कर खेतों में फसल क्षति का प्रत्यक्ष आकलन किया और प्रभावित किसानों से संवाद किया।
निरीक्षण दल में प्रभारी उप संचालक कृषि हरीश राठौर, सहायक सांख्यिकी अधिकारी सौरव पटेल, ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी तरुण पटेल, बीमा कंपनी के जिला समन्वयक संजीव साहू और ब्लॉक समन्वयक भिखम साहू शामिल रहे। दल ने किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के प्रावधानों की जानकारी दी।
72 घंटे के भीतर नुकसान की सूचना देना अनिवार्य
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने किसानों को बताया कि चक्रवात, बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि जैसी प्राकृतिक आपदाओं से फसल प्रभावित होने पर घटना के 72 घंटे के भीतर सूचना देना अनिवार्य है। किसान नुकसान की मात्रा और कारण सहित जानकारी बीमा कंपनी के टोल-फ्री नंबर 1800-419-0344, हेल्पलाइन नंबर 14447 या ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से दर्ज करा सकते हैं। इसके अलावा स्थानीय कृषि व राजस्व अधिकारियों तथा संबंधित बैंक शाखा को भी सूचना दी जा सकती है।
अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत फसल कटाई के बाद खेत में सुखाने के लिए रखी गई अथवा बंडलों में बंधी अधिसूचित फसलों को चक्रवात या बेमौसम बारिश से नुकसान पहुंचने पर भी नियमानुसार क्षतिपूर्ति की पात्रता होगी।
मुआवजे की प्रक्रिया और समय-सीमा
योजना के प्रावधानों के अनुसार, फसल क्षति की सूचना मिलने के 48 घंटे के भीतर बीमा कंपनी द्वारा क्षति निर्धारकों की नियुक्ति की जाएगी। इसके बाद 10 दिनों के भीतर नुकसान का आकलन पूरा किया जाएगा। संपूर्ण प्रक्रिया संपन्न होने के 15 दिनों के भीतर नियमानुसार क्षतिपूर्ति राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में अंतरित की जाएगी।
प्रभारी उप संचालक कृषि हरीश राठौर ने बीमा कंपनी के जिला समन्वयक को निर्देशित किया कि किसानों से प्राप्त सूचनाओं को गंभीरता से लेते हुए तय समय-सीमा में सर्वे और आकलन का कार्य पूरा करें, ताकि प्रभावितों को समय पर राहत मिल सके। उन्होंने किसानों से भी अपील की कि वे फसल क्षति की सूचना निर्धारित 72 घंटे की अवधि में संबंधित माध्यमों पर अवश्य दर्ज कराएं।























