रायगढ़, 08 अप्रैल 2025: “पुष्पा झुकेगा नहीं…” लेकिन रायगढ़ में तस्करों को इस बार वन विभाग के सामने झुकना पड़ा। जंगल की आड़ में सालों से चल रही अवैध लकड़ी तस्करी की उस कहानी का पर्दाफाश हो गया, जो अब तक सिर्फ अंदाजों में थी। सोमवार रात लगभग 10 बजे, भेंड्रा रोड पर खड़ी एक 18 चक्का ट्रक पर लदी लकड़ियों ने जैसे ही रात की चुप्पी तोड़ी, वन अमले की नींद उड़ गई। मुखबिर की सूचना पर तुरंत एक्शन हुआ और मौके पर पहुंची टीम को नज़ारा देखकर यकीन नहीं हुआ क्योंकि ट्रक में भरा था सराई का गोला और आसपास बिखरी थीं साल और खैर की मोटी लकड़ियां, मानो कोई लकड़ी का ‘यार्ड’ हो। मौके पर ट्रैक्टर जेसीबी और अन्य मशीन भी मौजूद थीं।
वन विभाग के अधिकारियों ने जैसे ही ट्रक को जब्त कर चालक को हिरासत में लिया, जंगल की साजिश की परतें खुलनी शुरू हो गईं। बुधवार सुबह, पांच से ज्यादा ट्रैक्टर में लकड़ियां भरकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाई गईं। शुरुआती आकलन में इनकी कीमत 40 लाख रुपए से ज्यादा बताई जा रही है और यह आंकड़ा अभी और बढ़ सकता है।
यही नहीं… वन विभाग को शक है कि यह केवल एक रात की बात नहीं, बल्कि लंबे समय से चल रहा एक संगठित रैकेट है, जो धरमजयगढ़ वन मंडल के गहरे जंगलों से कटाई कर खुलेआम शहर के बाहर स्टॉक कर रहा था। धरमजयगढ़ के डीएफओ स्टायलो मंडावी ने पुष्टि करते हुए बताया की “जप्त लकड़ी में साल और खैर दोनों शामिल हैं। चालक से पूछताछ की जा रही है, और वाहन को राजसात करने की कार्रवाई भी होगी।”

कहानी खत्म नहीं हुई… अब जांच का दायरा बढ़ाया जा रहा है। कौन हैं इस खेल के मास्टरमाइंड? कौन देता था संरक्षण? और कब से जंगल का ये कारोबार फल-फूल रहा था? इस पूरी कार्रवाई ने न सिर्फ तस्करों की कमर तोड़ी है, बल्कि यह भी दिखाया कि जंगल से ‘पुष्पा’ की तरह तस्कर बनने चले लोग, कानून के सामने देर-सवेर पकड़े ही जाते हैं। बहरहाल इस मामले में अभी पूरी सच्चाई सामने आने के लिए बाकी है वन विभाग की टीम जांच में जुटी है।






Shource : DB
























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