रायगढ़। जिले में एक नाबालिग के साथ हुए दुष्कर्म के मामले में विशेष पॉक्सो न्यायालय ने कड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने इस जघन्य अपराध के दोषी को उसके प्राकृतिक जीवन के अंत तक (आजीवन) कारावास की सजा से दंडित किया है। इसके साथ ही, अदालत ने पीड़िता के पुनर्वास के लिए विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से सात लाख रुपये की सहायता राशि दिलाने की भी अनुशंसा की है। घटना 14 दिसंबर की है। धरमजयगढ़ थाना क्षेत्र में एक नाबालिग लड़की अपनी सहेली के साथ गांव में ही आयोजित एक वैवाहिक कार्यक्रम में शामिल होने जा रही थी।
इसी दौरान रास्ते में अकील साय (पहाड़ी कोरवा) नामक युवक ने उसे बलपूर्वक रोक लिया। आरोपी उसे खींचकर सुनसान जंगल की ओर ले गया और वहां उसके साथ जबरन दुष्कर्म किया। वारदात के बाद पीड़िता किसी तरह अपने घर पहुंची और पिता को पूरी घटना की जानकारी दी। शारीरिक चोट और सदमे के कारण जब उसकी तबीयत बिगड़ने लगी, तो उसे तुरंत इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया। पिता की रिपोर्ट पर धरमजयगढ़ पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए त्वरित कार्रवाई की। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ पॉक्सो और दुष्कर्म की धाराओं में केस दर्ज कर जांच पूरी की और चालान सीधे अदालत में पेश कर दिया।
इस संवेदनशील मामले की सुनवाई विशेष न्यायाधीश शहाबुद्दीन कुरैशी की अदालत में हुई। अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक अर्चना मिश्रा ने मजबूती से पैरवी की। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और गवाहों के बयानों के आधार पर अदालत ने अकील साय को दुष्कर्म का दोषी करार दिया। न्यायाधीश ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि समाज में ऐसे अपराधों के लिए कोई जगह नहीं है। अदालत ने दोषी अकील साय को शेष प्राकृतिक जीवन काल तक जेल की सजा और 5 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है।























