छोड़कर सामग्री पर जाएँ

तमनार कांड: एक सप्ताह पहले भेजी थी छह गांवों की आपत्तियां

IMG 20251228 WA0013
  • इधर कलेक्टर ने पर्यावरण संरक्षण मंडल को भेजा पत्र, आंदोलन प्रारंभ होने के बाद प्रशासन ने ग्रामीणों को मनाने किया था प्रयास

रायगढ़। तमनार में ग्रामीणों और पुलिस बल के बीच झड़प के बाद माहौल बेहद संवेदनशील है। प्रशासन ने जनसुनवाई निरस्त करने की तैयारी शुरू कर दी है। एक सप्ताह पहले भी पर्यावरण विभाग ने छह गांवों से मिली आपत्तियों को सदस्य सचिव सीईसीबी को भेजा था। शनिवार की घटना के बाद कलेक्टर ने सदस्य सचिव सीईसीबी को आगे की कार्यवाही न करने का आग्रह किया है। 15 दिन से अधिक समय से तमनार के 14 गांवों के ग्रामीण जेपीएल के सामने धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शन की वजह से कोयला परिवहन रुक गया है। शुक्रवार को कुछ वाहनों को पुलिसकर्मियों ने पार कराया था। शनिवार को फिर से ऐसा करने का प्रयास किया गया, जिसके बाद झड़प हो गई। पुलिसकर्मियों को पीटा गया। घटना के बाद जेपीएल के सामने दस हजार लोग जमा हो गए थे। रविवार सुबह से फिर ग्रामीणों ने मोर्चा संभाला।

अब प्रशासन जनसुनवाई निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू कर रहा है। आंदोलन प्रारंभ होने के एक सप्ताह बाद ही प्रशासन ने ग्रामीणों की आपत्तियों को छग पर्यावरण संरक्षण मंडल को भेजा था। मिली जानकारी के मुताबिक बिजना, लिबरा, समकेरा, आमगांव, बुडिय़ा और महलोई के ग्रामीणों की टीका-टिप्पणी और आपत्तियां तमनार तहसीलदार के पास जमा की गई। 16 दिसंबर को क्षेत्रीय पर्यावरण अधिकारी को सारे पत्र भेजे गए थे। उन्होंने 23 दिसंबर को सदस्य सचिव छग पर्यावरण संरक्षण मंडल को आपत्तियां भेजी थी। 8 दिसंबर की जनसुनवाई को लेकर निरस्त करने की मांग पूरी करने के लिए लंबी प्रक्रिया है।

एनजीटी या कमेटी को ही अधिकार
जनसुनवाई कराने के बाद कार्यवाही विवरण के साथ अभिमत सीईसीबी को भेजा जाता है। वहां से केंद्र सरकार के पर्यावरण मंत्रालय को प्रस्ताव भेजा जाता है। मंत्रालय की कोल कमेटी ही जनसुनवाई के बाद संबंधित कंपनी को पर्यावरणीय अनुमति जारी करती है। अब जनसुनवाई काो निरस्त करने का अधिकार इसी कमेटी के पास है। यदि कंपनी को पर्यावरणीय स्वीकृति मिल जाती है तो फिर निरस्त करने का अधिकार नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल को होता है।

कलेक्टर ने सदस्य सचिव को लिखा पत्र
ग्रामीणों से किए वादे के मुताबिक कलेक्टर ने सदस्य सचिव छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल को भेजे गए पत्र में जनसुनवाई के संबंध में कोई अग्रिम कार्यवाही न करने का अनुरोध किया है। पत्र में कहा गया है कि जनसुनवाई के विरोध में 14 गांवों के ग्रामीण 12 दिसंबर से ग्राम सीएचपी चौक पर धरना दे रहे हैं। शनिवार को क्षेत्र में स्थिति तनावपूर्ण हो गई। आक्रोशित ग्रामीण 8 दिसंबर को हुई जनसुनवाई को निरस्त किए जाने की मांग कर रहे हैं।

ऐसे हालात में जनसुनवाई के बाद प्रक्रिया आगे बढ़ती है, तो स्थिति और बिगड़ सकती है। इसलिए जनसुनवाई के संबंध में कोई अग्रिम कार्यवाही न की जाए। ग्रामीणों ने भी एक पत्र कलेक्टर के नाम जारी किया है जिसमें उन्होंने शर्त रखी है कि जनसुनवाई निरस्त करने, पूर्व में दर्ज एफआईआर निरस्त करने और कर्मचारियों का निलंबन वापस लेने पर आंदोलन समाप्त कर दिया जाएगा।

इस खबर को शेयर करें:

8690517c9326392a68531b5faf7668b00e00b86685972a50e34c21832c7c1c6c?s=90&d=mm&r=g

Editorial

News Room

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ से 1988 से निरंतर प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र 'केलो प्रवाह' का यह Official Digital News Room है। हमारी संपादकीय टीम देश और छत्तीसगढ़ की प्रमुख खबरों, सीएम की गतिविधियों और शासन की जनहितैषी योजनाओं को प्रमुखता से साझा करती है। किसानों के हित में समर्पित हमारी टीम, 'जल, जंगल और जमीन' से जुड़े संवेदनशील मुद्दों और विभिन्न विभागों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने वाली रिपोर्टिंग के साथ ही सुदूर अंचलों की ज़मीनी हकीकत को सामने लाती है। जनहित से जुड़ी गतिविधियों, खनिज और औद्योगिक क्षेत्रों की 'Exclusive' खबरों को Evidence के साथ प्रमाणिकता से प्रकाशित करना हमारी प्राथमिकता है। राजनीति, प्रशासन, अपराध, स्पोर्ट्स, रोज़गार, खेती-किसानी और धार्मिक विषयों सहित हर क्षेत्र की खबरों को पूरी शुचिता के साथ प्रस्तुत करना ही हमारा संकल्प है।

Share: