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FSSAI का सख्त एक्शन: अखबार में लिपटा नाश्ता सेहत के लिए काल, परोसा तो होगी जेल, जानें नया नियम

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न्यूज डेस्क। सड़क किनारे खड़े होकर गरमा-गरम समोसे, कचौड़ी या वड़ा-पाव का आनंद लेना हम सभी को पसंद है। अक्सर दुकानदार जल्दीबाजी में या सुविधा के नाम पर इन चीजों को पुराने अखबार में लपेटकर थमा देते हैं और हम बिना सोचे-समझे उसे खा लेते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस कागज पर खबरें छपी होती हैं, वह आपकी सेहत के लिए कितना बड़ा खतरा बन सकता है? हाल ही में देश की शीर्ष खाद्य सुरक्षा संस्था ने इस चलन को लेकर एक ऐसा सख्त रुख अपनाया है, जिसे जानकर हर फूड वेंडर के होश उड़ जाएंगे। अब अगर किसी ने ग्राहकों को अखबार में खाना परोसा, तो उसे भारी जुर्माने के साथ-साथ जेल की हवा भी खानी पड़ सकती है।

स्याही में घुला है गंभीर बीमारियों का जहर

यह मामला सिर्फ अखबार के गंदे होने का नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक बहुत बड़ा स्वास्थ्य संकट छिपा है। अखबारों को छापने के लिए जिस स्याही का इस्तेमाल होता है, उसमें सीसा (Lead) और कई अन्य भारी धातुओं के साथ-साथ खतरनाक सिंथेटिक रंगों और रसायनों का मिश्रण होता है। जब आप गरमा-गरम पकवान को इन कागजों में रखते हैं, तो वह स्याही पिघलकर सीधे आपके भोजन में मिल जाती है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह स्याही लंबे समय तक शरीर में जाकर कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकती है। यह जहर शरीर में धीरे-धीरे जमा होता है और धीरे-धीरे हमारे आंतरिक अंगों को नुकसान पहुंचाता है।

मुंबई की एक कार्रवाई ने हिलाया सिस्टम

अचानक उठे इस सख्त तेवर के पीछे एक बड़ी वजह सामने आई है। हाल ही में देश के एक महानगर में स्थित एक बेहद मशहूर वड़ा-पाव विक्रेता को अखबार में खाना पैक करते हुए पकड़ा गया था। इस मामले ने खाद्य सुरक्षा अधिकारियों का ध्यान खींचा और स्थानीय नगर निगम की टीम ने मिलकर उस प्रतिष्ठान पर बड़ी कार्रवाई की। इस घटना के बाद से ही पूरे देश के लिए एक कड़ा अल्टीमेटम जारी कर दिया गया है। अथॉरिटी ने स्पष्ट कर दिया है कि अब किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जो दुकानदार या हॉकर इस नियम को नजरअंदाज करेंगे, उनके खिलाफ सीधे खाद्य सुरक्षा नियमों के तहत मुकदमा दर्ज किया जाएगा।

नियमों के घेरे में हर छोटा-बड़ा कारोबारी

यह चेतावनी केवल बड़े होटलों या आलीशान रेस्तरां के लिए नहीं है, बल्कि उन सभी छोटे-मोटे कारोबारियों पर भी समान रूप से लागू होती है जो सड़क किनारे अपनी दुकान चलाते हैं। चाहे वह ठेले वाला हो, फूड डिलीवरी करने वाला किचन हो, या फिर शहर के बीचों-बीच चल रहा कोई फास्ट फूड सेंटर, हर किसी को अपनी पैकिंग के तरीके बदलने होंगे। खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2018 के तहत अखबार का इस्तेमाल पैकिंग या परोसने के लिए पहले से ही प्रतिबंधित था, लेकिन अब इस पर सख्त निगरानी शुरू कर दी गई है। दोषी पाए जाने पर न केवल दुकान का लाइसेंस रद्द हो सकता है, बल्कि ₹5 लाख तक का जुर्माना और 6 महीने तक की जेल का प्रावधान भी सुनिश्चित किया गया है।

सिर्फ इंक ही नहीं, गंदगी भी है बड़ा खतरा

अखबार का कागज प्रिंटिंग प्रेस से निकलने के बाद गोदामों, परिवहन के विभिन्न साधनों और अनगिनत हाथों से गुजरता है। इस सफर में उस पर धूल-मिट्टी के साथ-साथ ऐसे बैक्टीरिया भी चिपक जाते हैं जो नंगी आंखों से दिखाई नहीं देते। इसके अलावा, अखबार का इस्तेमाल कई बार तेल सोखने के लिए भी किया जाता है, जिससे कागज के रेशे और हानिकारक तत्व सीधे खाने के संपर्क में आते हैं। एक जागरूक उपभोक्ता होने के नाते, अब आपकी जिम्मेदारी है कि आप ऐसी दुकानों से दूरी बनाएं या फिर दुकानदार से सुरक्षित पैकेजिंग की मांग करें। स्वास्थ्य से बढ़कर कुछ भी नहीं है, इसलिए अपनी थाली में जहर परोसने से खुद को बचाएं।

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विकास पाण्डेय

न्यूज एडिटर

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिला मुख्यालय से वर्ष 1988 से निरंतर प्रकाशित हो रहे प्रतिष्ठित दैनिक समाचार पत्र 'केलो प्रवाह' के 'Digital Wing' में News Editor की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। Finance (NBFC) क्षेत्र के 15 वर्षों के अनुभव के बाद इन्होंने 'RIG24 Media Network' से Journalism की शुरुआत की और कार्य के दौरान ही 'BJMC' की Professional Degree प्राप्त की। ​विकास अक्टूबर 2021 से 'केलो प्रवाह' के Web News Portal और Social Media Platforms का संचालन एवं संपादन कर रहे हैं। ये विशेष रूप से क्षेत्रीय घटनाक्रम, Exclusive रिपोर्ट्स, सीएम की गतिविधियों और सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं के साथ-साथ Agriculture, Politics, Finance, Infrastructure, Development, Employment, Sports, Career, Current Affairs, सामाजिक, देश-प्रदेश और शासन-प्रशासन से संबंधित कई विषयों पर निरंतर लेखन कर रहे हैं, जो पाठकों की जरूरत के अनुसार उपयोगी हों।

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