रायगढ़। महतारी वंदन योजना की तरह सरकार अब श्रमिकों के डाटाबेस को शुद्ध करना चाहती है। ई-केवायसी के जरिए श्रमिक की पहचान और उसकी वास्तविक स्थिति की पुष्टि की जाएगी। संदेहास्पद रिकॉर्ड वाले श्रमिकों की पहचान की जाएगी ताकि योजनाओं का लाभ वास्तविक श्रमिक को मिल सके। सरकारी योजनाओं का बेजा लाभ प्राप्त करने के उद्देश्य से लोग अपनी वास्तविक जानकारी छिपाते हैं। मनरेगा हो या महतारी वंदन योजना, प्रारंभ में अपात्रों ने अवैध लाभ प्राप्त किए हैं। मृत व्यक्तियों के नाम से मस्टररोल और पंजीयन सामान्य बात थी। जब आधार नंबर को अनिवार्य किया गया तो इससे मोबाइल नंबर और बैंक एकाउंट को भी लिंक किया गया।
अब श्रमिकों का भी आधार नंबर दर्ज किया जा चुका है तो सरकार एक बार डाटाबेस को फिल्टर करना चाहती है। इसके लिए ई-केवायसी कराने का आदेश दिया गया है। श्रमिक को अपने निकट के कॉमन सर्विस सेंटर में जाना होगा। वहां यह देखा जाएगा कि उक्त आधार नंबर उसी श्रमिक का है। श्रमिक का नाम, जन्मतिथि, मोबाइल नंबर आदि का मिलान किया जाएगा। आधार में दर्ज जानकारी के हिसाब से ही पंजीयन होगा। श्रमिक की वर्तमान लाइव फोटो भी ली जाएगी ताकि पुष्टि हो सके। कहीं कोई फर्जीवाड़ा न हो, इसलिए यह प्रक्रिया अपनाई जा रही है।
एक्सेप्शन केस में होगी जांच
सीएससी संचालक को आधार नंबर से कोई पंजीयन अभिलेख नहीं मिले तो उपलब्ध विवरण के आधार पर खोज की जाएगी। जो भी दस्तावेज मिलें उसका आधार से मिलान किया जाएगा। ऐसे मामलों को एक्सेप्शन केस श्रेणी में रखकर परीक्षण के लिए जिला स्तर पर भेजा जाएगा। सक्षम अधिकारी इसका परीक्षण के बाद निर्णय लेगा। यह प्रक्रिया इसलिए की जा रही है ताकि श्रमिक की पहचान सुनिश्चित हो सके।





















