जशपुर: शहर के बांकी नदी किनारे बसी लक्ष्मीनगर कॉलोनी में करोड़ों रुपए की सड़क परियोजना की स्वीकृति के बावजूद लोग आज भी कीचड़ भरे रास्तों पर चलने को मजबूर हैं। करीब छह साल पहले स्थापित इस कॉलोनी में 1.5 किलोमीटर लंबी सड़क के निर्माण के लिए 1 करोड़ 48 लाख रुपए स्वीकृत किए गए थे, जिसकी जिम्मेदारी पीएमजीएसवाई विभाग को सौंपी गई थी। टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद गर्मी में काम शुरू तो हुआ, लेकिन धीमी गति और मानसून के आगमन ने इसे बीच में ही रोक दिया, जिससे निवासियों की उम्मीदों पर पानी फिर गया है।
अधूरी सड़क, अधूरी उम्मीदें
विभाग ने काम शुरू किया था, पर बारिश ने सब कुछ रोक दिया। लक्ष्मीनगर के आधे हिस्से में सड़क की चौड़ाई बढ़ाने और उसे समतल करने का काम हो चुका है, जिससे इस क्षेत्र में फिलहाल कीचड़ की समस्या नहीं है। लेकिन बांकी नदी की ओर से कॉलोनी में प्रवेश करने वाला लगभग 300 मीटर का रास्ता अब भी गड्ढों और दलदल से भरा हुआ है। कॉलोनीवासियों को आशा थी कि इस साल उन्हें कीचड़ से मुक्ति मिलेगी, लेकिन निर्माण की धीमी रफ्तार के चलते अब उन्हें और एक साल इंतजार करना पड़ेगा। लक्ष्मीनगर के बसने के बाद ग्राम पंचायत बघिमा का क्षेत्रफल और आबादी काफी बढ़ गई है, जो अब सन्ना रोड से कॉलेज रोड तक जशपुर नगरपालिका क्षेत्र को अंग्रेजी के ‘सी’ अक्षर की तरह घेरे हुए है।
मूलभूत सुविधाओं से वंचित जीवन
ग्राम पंचायत बघिमा द्वारा नगरपालिका में शामिल होने का प्रस्ताव न दिए जाने के कारण इस नई कॉलोनी के लोग नगरीय सुविधाओं से वंचित हैं। पानी की समस्या इतनी गंभीर है कि अधिकांश निवासियों ने या तो कुएं खुदवाए हैं या बोरिंग करवाई है। नए मकान बनाने से पहले पानी की व्यवस्था करना प्राथमिकता बन गई है। स्ट्रीट लाइट न होने से शाम होते ही यह रिहायशी इलाका अंधेरे में डूब जाता है। पीएमजीएसवाई से इतनी लंबी सड़क की स्वीकृति मिलना भी आसान नहीं था, क्योंकि ग्राम पंचायत बघिमा का यह क्षेत्र टिकैतगंज और कॉलेज रोड से पक्की सड़कों से जुड़ा था। अधिकारियों को निर्माण की अनिवार्यता का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करना पड़ा, जिसके बाद ही इसे मंजूरी मिल पाई।
लक्ष्मीनगर में लगभग 160 मकान बने हैं, जिनमें से अधिकांश सरकारी कर्मचारियों के हैं। कुछ साल पहले यह इलाका खाली पड़ा था, जहां जमीन की प्लॉटिंग की गई और मालिकों ने किफायती दरों पर जमीन बेचना शुरू किया। शहर के नजदीक ग्राम पंचायत क्षेत्र में घर बनाने का मौका पाकर कर्मचारियों ने जमीन खरीदी और अपने आशियाने बनाए। नए मकान बनने से बैंकों के होम लोन कारोबार में भी उछाल आया है। सड़क बनने के बाद इस इलाके में जमीन की कीमतें और भी बढ़ जाएंगी, क्योंकि कॉलोनी पक्की सड़क से जुड़ जाएगी। यही कारण है कि सड़क निर्माण से पहले ही यहां जमीन के दाम दोगुने हो चुके हैं।






















