रायगढ़। जिले के खरसिया थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम परसकोल के ग्रामीण रमेश चौहान की पुलिस हिरासत में हुई संदिग्ध मौत के मामले ने अब तूल पकड़ लिया है। इस बेहद संवेदनशील मामले को देखते हुए एसएसपी शशि मोहन सिंह ने एक बड़ा और कड़ा निर्णय लिया है। कल नेशनल हाईवे-49 पर हुए प्रदर्शन और विधायक उमेश पटेल की उपस्थिति में ग्रामीणों द्वारा की गई शिकायतों पर त्वरित संज्ञान लेते हुए, एसएसपी ने मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए थाना प्रभारी सहित तीन पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से रक्षित केंद्र (लाइन) भेज दिया है।
24 घंटे के भीतर पुलिस प्रशासन ने निभाया वादा
आपको बता दें कि कल जब ग्रामीणों ने हाईवे पर चक्काजाम किया था, तब मौके पर पहुंचे एसडीएम प्रवीण तिवारी और एसडीओपी प्रभात पटेल ने आक्रोशित भीड़ और पीड़ित परिवार को शांत कराते हुए 24 घंटे के भीतर कार्रवाई का आश्वासन दिया था। उसी वादे पर अमल करते हुए एसएसपी शशि मोहन सिंह ने त्वरित संज्ञान लिया और आज आदेश जारी कर दिया। पुलिसकर्मियों को थाने से हटाकर लाइन भेजने का मुख्य उद्देश्य यही है कि इस संवेदनशील मामले की ‘मजिस्ट्रियल जांच’ बिना किसी स्थानीय दखलंदाजी या दबाव के पूरी हो सके।
इन पुलिसकर्मियों पर गिरी गाज:
- निरीक्षक राजेश कुमार जांगड़े (तत्कालीन थाना प्रभारी, खरसिया)
- आरक्षक क्रमांक 677 विशोप सिंह (तत्कालीन पदस्थापना – चौकी जोबी, थाना खरसिया)
- आरक्षक क्रमांक 903 योगेश कुमार साहू (तत्कालीन पदस्थापना – थाना खरसिया)
शार्ट में जाने क्या है मामला?
दरअसल, परसकोल हत्याकांड के सिलसिले में पुलिस ने 45 वर्षीय रमेश चौहान को पूछताछ के लिए थाने बुलाया था। परिजनों का आरोप है कि पुलिस की प्रताड़ना और मारपीट की वजह से उनकी तबीयत बिगड़ी और इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। हालांकि, डेथ रिपोर्ट में मौत का कारण ‘इंट्रापैरेन्काइमल हेमरेज’ बताया गया है। इस घटना के बाद से ही इलाके में भारी जन-आक्रोश था। अब प्रशासन ने न केवल पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की है, बल्कि मृतक की पत्नी को कलेक्टर दर पर नौकरी और उचित मुआवजे की प्रक्रिया को भी प्राथमिकता के आधार पर शुरू कर दिया है।

एसएसपी के इस निर्णय से क्षेत्र में शांति व्यवस्था बहाल होने और पुलिस प्रशासन के साथ जांच के प्रति जनता का विश्वास बढ़ने की उम्मीद है।
























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