रायगढ़। सरकारी जमीनों को बचाने में नाकाम राजस्व विभाग कार्रवाई भी नहीं करवा पा रहा है। जांच में सब कुछ प्रमाणित होने के बावजूद धरमजयगढ़ अनुविभाग का एक मामला अब तक तहसील और पुलिस थाने के बीच अटका हुआ है। सरकारी जमीन को निजी बनाकर एक पटवारी के साथ मिलकर जमीन दलालों ने रजिस्ट्री करवा ली। बेचने और खरीदने वालों पर एफआईआर के निर्देश दिए गए थे लेकिन हुआ कुछ नहीं। राजस्व अनियमितताओं पर जब सख्त कार्रवाई बंद हो जाती है, तो भूमाफिया बेलगाम हो जाते हैं। मौका मिलते ही सरकारी जमीनें तक बेच दी गई हैं।
धरमजयगढ़ में शासकीय भूमि को तीन व्यक्तियों ने पटवारी के साथ मिलकर बेच दिया। शिकायत होने पर जांच हुई। कापू के ग्राम रायमेर की भूमि खनं 467/23 रकबा 0.248 हे., 467/25 रकबा 0.965 हे. और 467/36 रकबा 0.874 हे. शासकीय भूमि बड़े झाड़ के जंगल मद में दर्ज थी। वर्ष 1930 में मूल खसरा नंबर 467 रकबा में 89.46 हे. जंगल मद दर्ज था। बाद में इसके कई टुकड़े करके ग्रामवासियों को पट्टेदार के रूप में दर्ज किया गया। लेकिन उपरोक्त तीनों खसरों में किसी का नाम दर्ज नहीं था। इस जमीन को पहले उजित राम पिता नान्ही राम के नाम पर दर्ज किया गया।
उसकी ओर से आम मुख्त्यारनामा कैलाश कुमार जेठवानी पिता परशुराम जेठवानी निवासी धरमजयगढ़ के नाम किया गया। कैलाश ने यह जमीन मधुसूदन अग्रवाल पिता शंभूनारायण अग्रवाल निवासी पत्थलगांव को बेच दी। पटवारी राकेश साय ने विक्रय पत्र के साथ चतुर्सीमा, बी-वन खसरा और नक्शा दिया। इसकी शिकायत हुई तो प्रशासन में खलबली मच गई। आनन-फानन जांच करवाई गई। पता चला कि उजित राम किसी कैलाश जेठवानी को नहीं जानता। मतलब फर्जी तरीके से जमीन हथियाने के लिए ऐसा कुचक्र रचा गया।
एफआईआर का आदेश लेकिन दस्तावेज नहीं भेजे
जांच में पाया गया कि खनं 467/23 रकबा 0.248 हे., 467/25 रकबा 0.965 हे. और 467/36 रकबा 0.874 हे. भूमि शासकीय भूमि के रूप में दर्ज थी। यह किसी को भी आवंटित नहीं थी। इसीलिए रायमेर गांव के उजित राम का नाम पहले दर्ज कराया गया। इसके बाद जमीन की पावर ऑफ अटॉर्नी कैलाश जेठवानी के नाम दी गई। उसने पत्थलगांव के मधुसूदन अग्रवाल को जमीन बेची। जमीन पर गिरदावरी भी की गई है जिसमें धान की फसल का उल्लेख है। जांच करने के बाद पटवारी राकेश साय को सस्पेंड किया गया गया था। इसके अलावा राकेश साय, कैलाश जेठवानी और मधुसूदन अग्रवाल के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने की अनुशंसा की गई है। पुलिस को तहसील से सारे दस्तावेज ही नहीं भेजे गए।
क्या कहते हैं टीआई
सरकारी जमीन बेचने वाले मामले में केवल तहसील से एक निर्देश पत्र आया है। संलग्न दस्तावेज प्राप्त ही नहीं हुए।
– इंगेश्वर यादव, टीआई, कापू






















