- थोक में कौड़ियों के भाव तो चिल्लर में कट रही आम आदमी की जेब
रायगढ़। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के कारण दुनियाभर में गहराए तेल संकट की आंच अब सीधे रायगढ़ के आम आदमी की रसोई तक पहुंच गई है। पिछले दस-बारह दिनों के भीतर पेट्रोल-डीजल के दामों में 7 से 8 रुपये की भारी बढ़ोतरी ने पूरे ट्रांसपोर्टिंग सिस्टम की कमर तोड़ दी है। इधर, भीषण गर्मी और बेमौसम बारिश ने जिले के लोकल किसानों को ऐसा रुलाया है कि वे अपनी बची-खुची उपज पटेल पाली थोक मंडी में औने-पौने दाम पर बेचने को मजबूर हैं। शहर का बाजार अब पूरी तरह बाहरी राज्यों से आने वाली सब्जियों पर निर्भर हो गया है। हालात ये हैं कि मंडी में जो सब्जी कौड़ियों के भाव है, वह चिल्लर मार्केट में आते ही आम आदमी का बजट बिगाड़ रही है।
इस पूरी स्थिति की जमीनी हकीकत समझने के लिए कृषि उपज मंडी से लेकर संजय मार्केट और किराना दुकानों की पड़ताल की गई, तो जो सच सामने आया वह चौंकाने वाला था। बाजार की नब्ज टटोलने की शुरुआत पटेलपाली स्थित जिले की एकमात्र कृषि उपज मंडी से हुई। यहां आलू-प्याज जैसे रोजमर्रा के आइटम भी मंदी की मार झेल रहे हैं। अग्रवाल ट्रेडिंग कंपनी और मिश्रा आलू भंडार के मुताबिक, थोक में प्याज 14 से 20 रुपये और आलू 8 से 13 रुपये किलो तक गिर गया है। मंदी का मुख्य कारण विशुद्ध रूप से मांग में आई कमी है। आलम यह है कि फिलहाल हफ्ते में बमुश्किल 25 से 30 टन वाली दो गाड़ी आलू- प्याज ही बाजार में खप पा रहा है।
आलू बंगाल और उत्तर प्रदेश के अलीगढ़-खंदौली से आ रहा है, जबकि प्याज नासिक, जलगांव, उमराना और लासलगांव से पहुंचती है। वहीं इंदौर और राजस्थान से आ रहा लहसुन थोक में 2700 से 4500 रुपये प्रति कट्टा (करीब 30 किलो) चल रहा है, लेकिन बाजार में इसकी भी मांग सुस्त है। हरी सब्जियों के थोक व्यापारी ‘शिवलाल एंड लाल बाबू फल सब्जी मर्चेंट’ के संचालक ओम प्रकाश साहू बताते हैं कि भीषण गर्मी की मार के साथ ईंधन की बढ़ती कीमत ने ट्रांसपोर्टिंग महंगी कर दी है। थोक मंडी में लोकल किसानों की सब्जियां कम आ रही हैं। ओडिशा के महानदी क्षेत्र कनकतुरा और पचगांव से आ रहा करेला 30 रुपये, मखना 10 रुपये और लौकी 15 रुपये में थोक बिक रही है।
वहीं हावड़ा का परवल 20 और देशी परवल 32 रुपये और बैंगन 15 रुपये किलो है। जशपुर के सरनाघाटी की मिर्ची 50 रुपये तो पुसौर क्षेत्र की भिंडी 20 रुपये में पहुंच रही है। रायपुर की शिमला मिर्च 120 रुपये और धमधा-भाटापारा की फूलगोभी 25 रुपये है। टमाटर बैंगलोर से 750 रुपये और मध्य प्रदेश व अंबिकापुर से 600 रुपये कैरेट (25 किलो) आ रहा है, जबकि नींबू दक्षिण भारत के इलूर-गुडुर से बिलासपुर होते हुए 50-60 रुपये किलो में रायगढ़ पहुंच रहा है।

स्थानीय किसानों को उपज का मिल रहा कौड़ियों के भाव
इस पूरी सप्लाई चेन में सबसे बुरी स्थिति स्थानीय किसानों की है, जिनकी जेब में मुनाफे के नाम पर कुछ भी नहीं आ रहा है। पटेलपाली मंडी में अपनी उपज लेकर पहुंचे कुछ किसानों ने बताया कि वे अपनी लौकी बैंगन और अन्य सब्जियां लेकर मंडी तो आते हैं, लेकिन यहां उपज का कौड़ियों के भाव ही मिलता है। मंडी में सब्जियों के दाम इस कदर गिरे हुए हैं कि कई बार खेती की लागत और ट्रांसपोर्ट का भाड़ा तक नहीं निकल पाता। स्थिति यह हो जाती है कि उन्हें मजबूरी में औने-पौने दाम पर ही अपना माल छोड़कर जाना पड़ता है। इससे साफ है कि मौसम की मार और बाजार की मंदी ने लोकल किसानों की कमर तोड़कर रख दी है।

डेली मार्केट पहुंचते ही सब्जियों को लग गए महंगाई के पंख
मंडी में भले ही सब्जियां सस्ती लगें, लेकिन जब बाहरी राज्यों की और स्थानीय किसानों से औने-पौने दाम पर खरीदी गई यही उपज चिल्लर विक्रेताओं के माध्यम से शहर के संजय मार्केट पहुंचती है, तो इसमें महंगाई के पंख लग जाते हैं। आलू- प्याज के खुदरा व्यापारी मिथुन ट्रेडर्स के संचालक मिथुन अग्रवाल बताते हैं कि गर्मी के कारण आलू डैमेज हो रहा है और प्रति कट्टा 100 रुपये का सीधा नुकसान व्यापारियों को उठाना पड़ रहा है। पिकअप का भाड़ा भी बढ़ गया है। इसलिए थोक में 8-13 रुपये वाला आलू चिल्लर में 25 रुपये और प्याज 30 रुपये किलो बिक रहा है। टमाटर विक्रेता राकेश बरेठ, सुरेंद्र देवांगन और बबलू गुप्ता की पीड़ा भी कम नहीं है। अम्बिकापुर, मरवाही और बंगलोर से आ रहा टमाटर उन्हें 50 रुपये किलो बेचना पड़ रहा है। गर्मी में मार्केट में कोई ग्राहक नहीं आता। लोकल टमाटर की खपत कम है। टमाटर खराब होने के डर से शाम को नुकसान से बचने के लिए उसे औने-पौने दाम पर बेचना पड़ता है। वे बमुश्किल 5 रुपये का मार्जिन लेकर काम कर रहे हैं।

सब्जी विक्रेता कमल किशोर साहू के मुताबिक थोक के मुकाबले चिल्लर में लगभग सभी सब्जियां ढाई गुना महंगी हैं। बाजार में धनिया पत्ती के दाम आसमान छू रहे हैं और यह 200 रुपये किलो बिक रही है। इसी तरह शिमला मिर्च, नींबू और मुनगा 120 रुपये, अदरक 100 रुपये, खेखसा 80 रुपये और हरी मिर्च 60 रुपये किलो पर पहुंच गए हैं। परवल 60 रुपये, करेला 50 रुपये, फूलगोभी 50 रुपये, गाजर 50 रुपये और चुकंदर 60 रुपये के पार हैं। वहीं लौकी, बैंगन और मूली 30 रुपये, पत्ता गोभी, बरबटी, कटहल और भिंडी 40 रुपये किलो बिक रहे हैं।

रोज कमाने-खाने वालों पर मौसम और मंदी की दोहरी मार
संजय मार्केट के व्यापारियों का दर्द केवल मौसम और महंगाई तक ही सीमित नहीं है। हरी सब्जी विक्रेता विकास द्विवेदी बताते हैं कि गांधी पुतला, चक्रधर नगर, घड़ी चौक और कोतरा रोड जैसे शहर के हर चौक-चौराहे पर लोगों ने दुकानें खोल ली हैं, जिसके कारण मुख्य सब्जी मंडी में ग्राहक आ ही नहीं रहे हैं। वहीं, आलू-प्याज व्यापारी संतोष जायसवाल ने बताया कि बाजार में 10 और 20 रुपये के नोटों तथा 5 और 10 रुपये के सिक्कों की भारी कमी हो गई है।


चिल्लर न होने के कारण कई बार ग्राहक लौट जाते हैं। सक्ती जिले के नवापारा से ट्रेन के जरिए रोज आकर सब्जी बेचने वाली बुजुर्ग अमृत बाई यादव और जमीन पर बैठकर सब्जी बेचने वाली मालती चौहान का रोजगार गर्मी की भेंट चढ़ गया है। मांग की कमी से इनकी बिक्री न के बराबर है। बिहार के रहने वाले कटहल विक्रेता अभिषेक कुमार और लखपति बताते हैं कि गर्मी से कटहल पक जा रहा है। 40 रुपये किलो बेचने के बाद भी डिमांड कम है, जिससे उन्हें लगातार नुकसान उठाना पड़ रहा है।

किराना बाजार में पैकेजिंग का खेल और सुपरमार्केट की चकाचौंध
खाद्य तेल के थोक विक्रेता मित्तल ट्रेडिंग के संचालक पीयूष मित्तल ने बताया कि किंग तेल (15 किलो सोयाबीन) 2570 रुपये, फॉर्च्यून (13 किलो सोयाबीन) 2540 रुपये और अमृत ब्रांड राइस तेल (14.700 किलो) 2200 रुपये है। भारत में 78 प्रतिशत खाने का तेल विदेशों से आयात होता है। वहां रेट कम होने से फिलहाल तेल की कीमत डेढ़ सौ रुपये प्रति टीपा कम हुई है, लेकिन ट्रांसपोर्टिंग का दबाव बना हुआ है। लेकिन खुदरा बाजार में महंगाई का एक नया ‘खेल’ सामने आया है। फुटकर किराना दुकानों की पड़ताल में यह तथ्य उजागर हुआ कि कई पैकेटबंद आइटमों की मात्रा गुपचुप तरीके से घटा दी गई है।

जो सामान पहले 1000 रुपये में 800 ग्राम मिलता था, अब कंपनियों ने कीमत वही रखकर उसका वजन 600 ग्राम कर दिया है। फुटकर व्यापारी पाहवा जनरल स्टोर के संचालक सावन पाहवा बताते हैं कि मार्केट में 750 ग्राम सोयाबीन तेल 165 रुपये और सरसों तेल 200 रुपये लीटर चल रहा है। चावल में 400 से 500 रुपये प्रति क्विंटल का उछाल आया है। राहल दाल 130 रुपये, उड़द 120 रुपये और झूँनग 90 रुपये में बिक रहा है। सावन बताते हैं कि बड़े रिटेलर शोरूम के लुभावने ऑफर के चक्कर में ग्राहक वहां जा रहे हैं, जिससे छोटे दुकानदारों का काम प्रभावित हुआ है।

कोतरा रोड स्थित अग्रवाल ट्रेडर्स के संचालक नरेश अग्रवाल ने रेट लिस्ट साझा करते हुए बताया कि बाजरा 40, काबुली चना 120, मक्का 40, ज्वार 40, मूंगदाल छिलका 110, चना दाल 80, मूंगफली दाना 140, अनिक घी 650, आसाम चायपत्ती 300 रुपये किलो, मसूर दाल 80, लाल चना 70, सफेद मटर 60, हरा मूंग 100, उड़द दाल 100 और राहल दाल 130 रुपये किलो है। चावल 55 से 100 रुपये किलो बिक रहा है। रसोई का सामान फिलहाल बहुत महंगा नहीं हुआ है, लेकिन ग्राहकों की मांग में भारी कमी आई है।

सीमित आमदनी में रसोई संभालना हुआ मुश्किल
इस पूरी जमीनी पड़ताल का सबसे कड़वा सच सब्जी मंडी में मिली एक आम महिला के दर्द से सामने आता है। उन्होंने बताया, “पहले हमारे घर का राशन और सब्जी दोनों मिलाकर महीने का खर्च 7 से 8 हजार रुपये में आराम से चल जाता था। लेकिन अब रसोई संभालना बहुत मुश्किल हो गया है। बजट बिल्कुल अलाऊ नहीं कर रहा है। हमारी जितनी इनकम है, हमें उसी में गुजारा करना है, इसलिए हमने अपनी डिमांड ही कम कर दी है।” इस बात की तस्दीक किराना व्यापारी सावन पाहवा भी करते हैं। उनका कहना है कि जो ग्राहक पहले हर महीने 6 से 7 हजार रुपये का राशन खरीदते थे, उन्होंने अब अपना बजट घटाकर 4 से 5 हजार रुपये कर दिया है। पूरी पड़ताल का निष्कर्ष यही है कि महंगाई, मौसम और मंदी के इस त्रिकोण ने आम आदमी को इस कदर घेर लिया है कि उसने महंगाई से लड़ने के लिए अपनी आमदनी नहीं, बल्कि अपनी जरूरतें ही कम कर दी हैं

सब्जियों के ताजे भाव
धनिया पत्ती – ₹200/किलो
शिमला मिर्च – ₹120/किलो
मुनगा – ₹120/किलो
नींबू – ₹120/किलो
अदरक – ₹100/किलो
खेखसा – ₹80/किलो
हरी मिर्च – ₹60/किलो

परवल – ₹60/किलो
चुकंदर – ₹60/किलो
करेला – ₹50/किलो
फूलगोभी – ₹50/किलो
गाजर – ₹50/किलो
पत्ता गोभी – ₹40/किलो
बरबटी – ₹40/किलो

भिंडी – ₹40/किलो
कटहल – ₹40/किलो
लौकी – ₹30/किलो
बैंगन – ₹30/किलो
प्याज – ₹30/किलो
मूली – ₹30/किलो
आलू – ₹25/किलो























You must be logged in to post a comment.