रायगढ़। धान खरीदी के बाद अब उठाव तेजी से हो रहा है। अब समितियों पर सूखत चढऩे लगा है। खरीदी के साथ-साथ उठाव नहीं होने के कारण धान दो महीने तक समिति में ही पड़ा रहा। अब उठाव के बाद वजन में कमी आ रही है। धान का वजन कराने पर मिलर को 2-5 क्विंटल धान कम मिल रहा है। धान सूखत की परेशानी से हर साल समिति प्रबंधक जूझते हैं। उठाव में देरी के कारण समिति में धान सूखने लगता है। नमी कम होने और धूप तेज होने के कारण हर दिन धान का वजन कम होने लगता है। इस बार समितियों में प्रति बोरा 41 किलो तक धान भी खरीदा गया है। जिले में 47.82 लाख क्विं. धान की खरीदी हुई थी।
इसमें से करीब 35 लाख क्विं. धान का उठाव हो चुका है। करीब 40 हजार क्विं. धान दोनों संग्रहण केंद्रों में भेजा गया है। बाकी पूरा धान मिलर्स ने उठाया है। अब करीब 13 लाख क्विं. धान उपार्जन केंद्रों में शेष है। समिति से लोड करने के बाद मिलर्स जब धर्मकांटा में धान का वजन करवाते हैं, तो वजन में कमी आ रही है। मिली जानकारी के मुताबिक किसी गाड़ी में 2 क्विं. तो किसी में 5 क्विं. धान कम हो रहा है। यह कमी समिति के खाते में जुड़ती जा रही है। उठाव पूरा होने के बाद समिति से इसकी वसूली की जाएगी। उठाव में जितनी भी देरी होगी, कमी उतनी ही ज्यादा होगी।
फरवरी में पूरा धान उठाने का आदेश
राइस मिलर्स को जल्द से जल्द धान उठाव का आदेश दिया गया है ताकि सूखत और गड़बड़ी का पता चल सके। जब तक उठाव पूरा होगा, तब तक बोनस का भुगतान भी हो चुका होगा। जिन केंद्रों में शॉर्टेज आएगा, वहां धान की भरपाई कराने की जिम्मेदारी फिर से प्रबंधक और ऑपरेटर को दी जाएगी। इस बार सख्त मॉनिटरिंग के कारण उम्मीद की जा रही है कि बोगस खरीदी नहीं हुई होगी।
























